UAPA Supreme Court Bail Verdict : गैर-कानूनी गतिविधि रोकथाम कानून (UAPA) के तहत पिछले करीब 12 वर्षों से जेल में बंद दो आरोपियों, मोहम्मद साकिब अंसारी और वकार अजहर को सुप्रीम कोर्ट से राहत मिल गई है। शीर्ष अदालत ने दोनों को जमानत देते हुए स्पष्ट किया कि इतने लंबे समय तक बिना ट्रायल पूरा हुए हिरासत में रखना संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत मिले व्यक्तिगत स्वतंत्रता के मौलिक अधिकार का गंभीर हनन है।
जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस संदीप मेहता की पीठ ने दिल्ली हाई कोर्ट के उस फैसले को पलट दिया, जिसने ट्रायल कोर्ट द्वारा जमानत याचिका खारिज करने के आदेश को सही ठहराया था।
सुप्रीम कोर्ट- धीमी गति से चल रहा है ट्रायल
अदालत ने ई-कोर्ट पोर्टल के आंकड़ों का हवाला देते हुए बताया कि केस की सुनवाई बेहद सुस्त रफ्तार से आगे बढ़ रही है। अभियोजन पक्ष के कुल 197 गवाहों में से अब तक सिर्फ 68 के बयान दर्ज हो सके हैं। जनवरी 2025 से लेकर अब तक महज दो गवाहों से पूछताछ हुई है। कोर्ट ने टिप्पणी की कि 25 आरोपियों वाले इस मामले का मुकदमा निकट भविष्य में खत्म होता नहीं दिखता।
सह-आरोपी को पहले ही मिल चुकी है राहत
अदालत ने ध्यान दिलाया कि दोनों आरोपी 2014 से लगातार कस्टडी में हैं और राजस्थान के दो अन्य मामलों में उन्हें पहले ही जमानत या सजा पर रोक मिल चुकी है। इसके अलावा, मामले के एक अन्य सह-आरोपी मोहम्मद मारूफ को भी पहले जमानत मिल चुकी है। इन सभी तथ्यों को देखते हुए कोर्ट ने दोनों को तुरंत रिहा करने का आदेश दिया।
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