नई दिल्ली : दिल्ली के उप मुख्यमंत्री व शिक्षा मंत्री मनीष सिसोदिया ने गुरुवार को विज्ञान भवन में दिल्ली सरकार के स्कूलों के प्रिंसिपल्स को संबोधित करते हुए कहा कि समाज में भूख, बेरोजगारी, निरक्षरता, हिंसा से शिक्षा के जरिए लड़ने की जरुरत है। उन्होंने दावा किया कि दिल्ली सरकार के शिक्षक इन समस्याओं पर सर्जिकल स्ट्राइक करने को लेकर प्रतिबद्ध हैं। दिल्ली सरकार के शिक्षा विभाग ने सभी सरकारी स्कूलों के प्रिंसिपल्स के लिए तीन दिवसीय एडमिनिस्ट्रेटिव कैपेसिटी बिल्डिंग प्रोग्राम शुरू किया है।
इसका उद्घाटन गुरुवार को दिल्ली के उप-मुख्यमंत्री और शिक्षा मंत्री मनीष सिसोदिया ने किया। सिसोदिया ने कहा कि शिक्षा का उद्देश्य बच्चों की खुशी के साथ ही यह भी है कि वे समाज में दूसरों की खुशी में योगदान के लिए इसका उपयोग कैसे करते हैं। उन्होंने कहा कि हम अखबारों की सुर्खियां पढ़तें हैं जो हमें उदास कर देती हैं। सेना इस पर सर्जिकल स्ट्राइक नहीं कर सकती। ये काम आपको करना होगा। दिल्ली के अध्यापक और शिक्षाकर्मी बेरोजगारी, भूख, निरक्षरता, हिंसा और घृणा जैसी समस्याओं पर सर्जिकल स्ट्राइक करेंगे।
इस मौके शिक्षा मंत्री सिसोदिया ने आम आदमी पार्टी सरकार की दिल्ली में शिक्षा के क्षेत्र की कल्याणकारी उपलब्धियों को भी रेखांकित किया। पिछले पांच साल में हम माइनस से ग्राउंड लेवल पर आए हैं। अब हमें बिल्डिंग बनानी है। पांच साल बाद जब मैं दोबारा आपके सामने शिक्षा मंत्री के रूप में यहां बात करूंगा, तब मैं इंफ्रास्ट्रक्चर और शिक्षकों की उपलब्धता इत्यादि के बारे में बात नहीं करूंगा। इस इमारत की नींव तैयार हो चुकी है, पांच साल बाद हम इमारत के बाकी हिस्सों की बात करेंगे। पांच साल बाद हम हैप्पीनेस, आन्ट्रप्रनर्शिप माइंडसेट इत्यादि की बात करेंगे।
नौकरियां बच्चों के पीछे भागेें… हैप्पीनेस कैरिकुलम के बाद, आन्ट्रप्रनर्शिप माइंडसेट कैरिकुलम सरकार का सबसे बड़ा रिफॉर्म है। इस बारे में बात करते हुए शिक्षा मंत्री ने कहा कि मैं जब आन्ट्रप्रनर्शिप की बात कर रहा हूं तो इसका मतलब आन्ट्रप्रनर्शिप स्किल्स मसलन, बिजनेस डेवलपमेंट, कैपिटल, मार्केटिंग इत्यादि से नहीं है। यहां मेरा आशय आन्ट्रप्रनर्शिप माइंडसेट का है।
पूरी दुनिया में 9वीं से लेकर 12वीं तक के स्टूडेंट्स के लिए इतने बड़े पैमाने पर ऐसा कोई प्रोजेक्ट नहीं चलाया जा रहा है। इस प्रोजेक्ट के नतीजों के बारे में अगर मैं एक लाइन में कहूं तो ये है –हमारे बच्चे नौकरियों के पीछे न भागें, नौकरियां हमारे बच्चों के पीछे-पीछे आएं। चार साल बाद, अगर हमारे बच्चे नौकरियों के पीछे भाग रहे होंगे तो समझ लीजिए कि हम अपने मकसद में फेल हो गए।


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