बाजारों में सजी पतंगों की रंगीन दुनिया, आसमान में पेंच लड़ाने को तैयार दिल्ली

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Independence day : स्वतंत्रता दिवस से पहले दिल्ली का आसमान भले ही अभी खाली नजर आ रहा हो, लेकिन लाल कुआं का मशहूर पतंग बाजार रंगों से भर चुका है। बाजार में तिरंगे से लेकर अलग-अलग डिजाइन और आकार की पतंगें लोगों को अपनी ओर खींच रही हैं। 15 अगस्त नजदीक आते ही पतंग खरीदने वालों की भीड़ बढ़ने लगी है और दुकानदारों ने भी ग्राहकों की पसंद के अनुसार अलग-अलग तरह की पतंगें सजा दी हैं। खास बात यह है कि पतंगबाजी का शौक सिर्फ बच्चों तक सीमित नहीं है, बल्कि युवा भी बड़ी संख्या में बाजार पहुंचकर अपनी…

Independence day : स्वतंत्रता दिवस से पहले दिल्ली का आसमान भले ही अभी खाली नजर आ रहा हो, लेकिन लाल कुआं का मशहूर पतंग बाजार रंगों से भर चुका है। बाजार में तिरंगे से लेकर अलग-अलग डिजाइन और आकार की पतंगें लोगों को अपनी ओर खींच रही हैं। 15 अगस्त नजदीक आते ही पतंग खरीदने वालों की भीड़ बढ़ने लगी है और दुकानदारों ने भी ग्राहकों की पसंद के अनुसार अलग-अलग तरह की पतंगें सजा दी हैं। खास बात यह है कि पतंगबाजी का शौक सिर्फ बच्चों तक सीमित नहीं है, बल्कि युवा भी बड़ी संख्या में बाजार पहुंचकर अपनी पसंद की पतंगें खरीद रहे हैं।

लाल कुआं पतंग बाजार के व्यापारियों ने बताया कि दिल्ली में पतंगबाजी का क्रेज आज भी कायम है और 15 अगस्त से करीब 20 दिन पहले बाजार में ग्राहकों की संख्या तेजी से बढ़ने लगती है। इस बार अलग-अलग थीम वाली पतंगों की मांग देखने को मिल रही है। सफेद कलर की प्लेन, ऑपरेशन सिंदूर और नकली नोटों के प्रिंट वाली पतंगें लोगों की पसंद बनी हुई हैं, जबकि बच्चों के बीच चिल कट वाली पतंग का खासा क्रेज है।

इसकी कटिंग सामान्य पतंगों से अलग होती है और पिछले दो साल में यह काफी लोकप्रिय हुई है। बाजार में पतंगों की कई किस्में भी देखने को मिल रही हैं। सादे कागज से बनी एक रंग की पतंग को पारिया कहा जाता है, जबकि चांद जैसी आकृति वाले चमकीले कागज से सजी पतंग को चांददार और ऊपर की तरफ दो गोल आकृतियां बनी होने वाली पतंग को आंखदार कहा जाता है। व्यापारियों के अनुसार, उनके पास एक रुपये से लेकर 5, 10 और 15 रुपये तक की पतंगे उपलब्ध हैं।

कागज से पॉलीथीन तक, हर आकार की पतंगें

पतंग बनाने में इस्तेमाल होने वाली सामग्री के हिसाब से भी ग्राहकों की पसंद अलग है। बाजार में कागज और पॉलीथीन से बनी पतंगें मिल रही हैं। छोटे बच्चों वाले परिवार अक्सर पॉलीथिन की पतंग खरीदते हैं, क्योंकि वह अपेक्षाकृत जल्दी नहीं फटती। वहीं 15 अगस्त नजदीक आने पर कागज की हल्की पतंगों की मांग बढ़ जाती है। युवा खास तौर पर इन्हें पसंद करते हैं, क्योंकि हल्की होने की वजह से यह ज्यादा ऊंचाई तक उड़ सकती हैं। दुकानदारों के अनुसार, बाजार में सबसे बड़ी करीब चार फुट की पतंग उपलब्ध है, जबकि कुछ पतंगें हथेली से भी छोटी हैं। करीब एक महीने पहले से ही यहां पतंगों की बिक्री शुरू हो जाती है और त्योहार करीब आते ही रिटेल दुकानदार भी बड़ी संख्या में पतंग खरीदने पहुंचते हैं।

वहीं, सचिन गुप्ता ने बताया कि बारिश की वजह से कुछ समय पहले ग्राहक कम आ रहे थे, लेकिन जैसे ही 15 अगस्त पास आया है। बाजार में ग्राहकों की भीड़ देखने को मिल रही है। ऐसे में व्यापार ठीक होने की उम्मीद है।वहीं, असलम ने बताया कि इस बार व्यापार थोड़ा मंदा है लेकिन बाजार में बीकानेर की कागज की पतंग की डिमांड भी काफी ज्यादा है। जिसमें मंकी, फैंसी व अन्य कई प्रकार की पतंगे बिक रही हैं।

Sumant Chaudhary