24 घंटे बाद भी धधक रही है दर्द की राख, 21 जिंदगियों का कौन जिम्मेदार?

Summary :

Delhi Malviya Nagar Fire : दक्षिण दिल्ली के मालवीय नगर में हुए भीषण होटल अग्निकांड को 24 घंटे से अधिक समय बीत चुका है, लेकिन इलाके में आज भी दर्द, डर और गुस्से का माहौल बना हुआ है। गुरुवार को घटनास्थल का दृश्य दिल दहला देने वाला था। जिस इमारत में बुधवार सुबह आग की लपटों ने 21 लोगों की जिंदगी छीन ली, वह अब काले धुएं और राख से ढका एक खामोश ढांचा बन चुकी है। उसके आसपास खड़े लोगों की निगाहें बार-बार उसी इमारत पर टिक रही थीं, मानो वह अब भी उनसे कुछ कह रही हो। होटल…

Delhi Malviya Nagar Fire : दक्षिण दिल्ली के मालवीय नगर में हुए भीषण होटल अग्निकांड को 24 घंटे से अधिक समय बीत चुका है, लेकिन इलाके में आज भी दर्द, डर और गुस्से का माहौल बना हुआ है। गुरुवार को घटनास्थल का दृश्य दिल दहला देने वाला था। जिस इमारत में बुधवार सुबह आग की लपटों ने 21 लोगों की जिंदगी छीन ली, वह अब काले धुएं और राख से ढका एक खामोश ढांचा बन चुकी है।

उसके आसपास खड़े लोगों की निगाहें बार-बार उसी इमारत पर टिक रही थीं, मानो वह अब भी उनसे कुछ कह रही हो। होटल के बाहर पुलिस के बैरिकेड लगे हुए हैं। दिल्ली पुलिस, क्राइम ब्रांच और फोरेंसिक विशेषज्ञों की टीमें जांच में जुटी हुई हैं। संकरी गलियों में सन्नाटा पसरा है, लेकिन इस सन्नाटे के पीछे एक दिन पहले की भयावह चीखें अब भी लोगों के कानों में गूंज रही हैं। हवा में जलने की गंध अब भी महसूस की जा सकती है और इलाके के लोगों के चेहरों पर सदमे के निशान साफ दिखाई दे रहे हैं।

होटल से कई मेहमान अपना सामान लेकर निकलते दिखे

हादसे के बाद आसपास के कई होटलों में भी खौफ का माहौल है। जिस होटल में आग लगी थी, उसी नाम से संचालित दूसरे होटल से कई मेहमान अपना सामान लेकर निकलते दिखाई दिए। लोगों का कहना है कि अब उन्हें किसी भी होटल की सुरक्षा व्यवस्था पर भरोसा नहीं रहा। एक युवक ने कहा कि जब इतने बड़े होटल में सुरक्षा इंतजाम नाकाम साबित हो सकते हैं तो बाकी जगहों पर खुद को सुरक्षित कैसे मान लें?” घटनास्थल से कुछ ही दूरी पर किराने की दुकान चलाने वाले एक दुकानदार की आंखें अब भी नम थीं।

उन्होंने बताया, “मैंने अपनी जिंदगी में ऐसा मंजर कभी नहीं देखा। लोग जान बचाने के लिए खिड़कियों से कूद रहे थे। कई लोग आग में झुलस गए थे। रात भर आंख नहीं लगी। जैसे ही कोई आवाज आती है, पूरा दृश्य फिर आंखों के सामने आ जाता है।”

हादसे ने पूरे इलाके को झकझोर कर रख दिया

स्थानीय निवासी कन्हैया ने कहा कि इस हादसे ने सिर्फ मृतकों के परिवारों को ही नहीं, बल्कि पूरे इलाके को झकझोर कर रख दिया है। “मेरी पत्नी पूरी रात नहीं सो पाई। बच्चे लगातार पूछ रहे हैं कि यहां क्या हुआ था। होटल से आती चीखें अब भी कानों में गूंज रही हैं,” उन्होंने भारी आवाज में कहा। इलाके में मौजूद कई लोगों ने प्रशासन और संबंधित विभागों पर भी सवाल उठाए। एक स्थानीय निवासी ने कहा, “अगर होटल में पर्याप्त सुरक्षा इंतजाम नहीं थे तो उसे चलाने की अनुमति कैसे मिली? आखिर इसकी जिम्मेदारी कौन लेगा?” वहीं एक बुजुर्ग ने कहा, “चंद पैसों के लालच में लोगों की जान जोखिम में डाल दी गई। अब जिन परिवारों ने अपने प्रियजनों को खो दिया, उनके दर्द की भरपाई कोई नहीं कर सकता।”

गेस्ट हाउसों के बाहर लगे बोर्ड और पोस्टर भी हटे

घटना के बाद कई होटलों और गेस्ट हाउसों के बाहर लगे बोर्ड और पोस्टर भी हटे हुए दिखाई दिए। स्थानीय लोगों का दावा है कि प्रशासनिक कार्रवाई के डर से कुछ संचालकों ने अपनी पहचान छिपाने की कोशिश शुरू कर दी है। जली हुई इमारत के सामने खड़े लोगों की आंखों में गुस्सा, दुख और बेबसी साफ झलक रही थी। कोई कह रहा था, “बहुत बुरा हुआ” तो कोई उन लोगों को याद कर रहा था, जो इलाज या किसी जरूरी काम से दिल्ली आए थे और कभी अपने घर वापस नहीं लौट सके।

मालवीय नगर की गलियों में गुरुवार को सिर्फ सन्नाटा नहीं था, बल्कि उन 21 जिंदगियों की अधूरी कहानियों का दर्द भी बिखरा पड़ा था, जो आग की लपटों में हमेशा के लिए खत्म हो गईं। अब पूरा इलाका एक ही सवाल पूछ रहा है क्या नियमों की अनदेखी और लापरवाही की कीमत आम लोगों को अपनी जान देकर ही चुकानी पड़ेगी?

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Avinay