चौबीस के चुनाव से पहले ही TMC ने कांग्रेस से बनाई दूरी, ममता ने बनाई नई रणनीति

Summary :

एक तरफ विपक्ष एक होकर मोदी को हराने की तैयारी कर रहे तो दूसरी तरफ विपक्ष की एकजुटता बिखरती नजर आ रही है। एसा हम इसलिए कह रहे हैं क्योंकी तृणमूल कांग्रेस लगातार कांग्रेस से दूरी बनाते हुई नजर आ रही है। कांग्रेस की ये दूरी संसद सत्र के दौरान देखने को मिली है। दरअसल कांग्रेस के नेतृत्व में बुलाई गई विरोधी दलों की बैठक में भी तृणमूल कांग्रेस के सांसद और प्रतिनिधि शामिल नहीं हुए ।

एक तरफ विपक्ष एक होकर मोदी को हराने की तैयारी कर रहे तो दूसरी तरफ विपक्ष की एकजुटता बिखरती नजर आ रही है। एसा हम इसलिए कह रहे हैं क्योंकी
तृणमूल कांग्रेस लगातार कांग्रेस से दूरी बनाते हुई नजर आ रही है। कांग्रेस की ये  दूरी संसद सत्र के दौरान देखने को मिली है। दरअसल कांग्रेस के नेतृत्व में बुलाई गई विरोधी दलों की बैठक में भी तृणमूल कांग्रेस के सांसद और प्रतिनिधि शामिल नहीं हुए ।
17 दलों की बैठक मे शामिल नहीं हुई टीएमसी
मंगलवार को भी संसद भवन में कांग्रेस नेता मल्लिकार्जुन खरगे के कक्ष में विपक्षी दलों के नेताओं की बैठक में 17 दलों ने ही  भाग लिया। लेकिन इसमें भी टीएमसी के सांसद शामिल नहीं थे। दूसरी तरफ टीएमसी सांसदों ने संसद भवन के बाहर गांधी मूर्ति के सामने अदानी के मुद्दे पर प्रदर्शन किया ।  टीएमसी के सांसद एलआईसी के अदानी में निवेश करने के मुद्दे को उठा रहे थे।
 विपक्ष की एकजुटता पर उठ रहे सवाल
आपको बता दें कि बजट सत्र का दूसरा भाग शुरू होने से पहले राज्यसभा के सभापति द्वारा बुलाई गई सर्वदलीय बैठक में तृणमूल शामिल नहीं हुई थी। इसके बाद से ही विपक्ष की एकजुटता पर सवाल उठ रहे है। विपक्ष एकजुटता होने की बात तो कह रहा है  लेकिन एकजुटता हकीकत में नजर नहीं आ रही है।
कांग्रेस और भाजपा के बीच दुर्भाग्यपूर्ण सांठगांठ
इन सबके बीच ममता बनर्जी ने दस दिन पहले सागरदिघी विधानसभा सीट हारने के बाद कांग्रेस और भाजपा के बीच “दुर्भाग्यपूर्ण सांठगांठ” की बात कही थी। इसके साथ ही ममता को अकेले लड़ने’ की बात भी करते सुना गया था। इसके बाद तृणमूल की ओर से इस टिप्पणी पर सफाई देते हुए साफ किया गया कि बंगाल में तृणमूल के किसी अन्य दल से सुलह का सवाल ही नहीं उठता। अगली लोकसभा में तृणमूल न केवल अकेले लड़ेगी। सागरदिघी और मेघालय चुनावों के बाद गैर-कांग्रेसी समान विचारधारा वाले राजनीतिक दल और एकजुट होंगे।
चौबीस के चुनाव से पहले विपक्ष में टूट
वहीं तृणमूल के एक वरिष्ठ सांसद ने कहा था कि दिल्ली में गैर-कांग्रेसी, गैर-भाजपा पार्टियों को साथ लाने के लिए आंदोलन शुरू हो गया है। इसके पहले भी लोकसभा और राज्यसभा में राहुल की टिप्पणी को लेकर कांग्रेस की भाजपा से तीखी नोकझोंक हुई। इसमें भी टीएमसी एक्टिव नजर नहीं आई। तो इस तरह  से ममता बनर्जी पहले ही साफ कर रही है कि उनकी पीर्टी अकेले चुनाव लड़ेगी टीएमसी को कांग्रेस पर भऱोसा नहीं है इसलिए वो कांग्रसे के बीजेसी के साथ सांठगांठ वाली बात कह रही है। अब देखने वाली बात होगी की विपक्षी एकजुटता का मोदी को हराने का लक्ष्य पूरा होता है। य़ा नहीं।

Desk Team