नई दिल्ली : झंडेवालान स्थित वीडियोकॉन टॉवर पर बाहर की तरफ 10वीं मंजिल पर शीशों की सफाई कर रहे दो मजदूर ट्रॉली लिफ्ट समेत नीचे गिर गए। इस हादसे में दोनों मजदूरों की मौके पर ही दर्दनाक मौत हो गई। पुलिस ने मृतकों की पहचान वसंत कुंज निवासी मो. इस्तियाक (23) और राजू शर्मा (22) के रूप में की है। पुलिस ने शवों को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए मोर्चरी में सुरक्षित रखवा दिए हैं। उधर, मृतक के परिजनों व साथ काम करने वालों ने कंपनी व ठेकेदार पर लापरवाही का आरोप लगाया है।
आरोप है कि मजदूरों से बिना सेफ्टी के मौत के मुंह में लटकाकर सफाई का काम कराया जा रहा था। फिलहाल पहाड़गंज थाना पुलिस ने आरोपों के बाद कंपनी के खिलाफ कार्रवाई करते हुए जांच शुरू कर दी है। वहीं वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों का कहना है कि शुरुआती जांच में लापरवाही से मौत की बात सामने आई है। सन् 1996 में बनी 14 मंजिला वीडियोकॉन टॉवर पर बाहर की दीवारों पर खूबसूरती के लिए चारों ओर शीशे लगाए गए हैं। इसकी खूबसूरती बरकरार रखने के लिए बाहर की तरफ से साफ-सफाई और रख-रखाव का जिम्मा एमएस इंटरप्राइजेज नाम की प्राइवेट कंपनी के पास है।
जो नियमित रूप से मजदूरों से इसकी सफाई कराती है। सोमवार को वसंत कुंज निवासी मो. इश्तियाक और राजू शर्मा ट्रॉली लिफ्ट में बैठकर शीशे साफ कर रहे थे। लिफ्ट को लोहे के तारों के सहारे ऊपर से नीचे की और लटकाया गया था। दोपहर करीब तीन बजे दोनों मजदूर शीशे साफ करते हुए 10वीं मंजिल तक पहुंचे ही थे कि लिफ्ट की लोहे की तार टूट गई और दोनों लिफ्ट समेत सीधे नीचे आ रिगे। जोरदार धमाके की आवाज सुनकर लोग मौके पर पहुंचे। सूचना मिलते ही पुलिस भी घटना स्थल पर आ गई। तुरंत दोनों को नजदीकी अस्पताल में भर्ती कराया। जहां डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया।
भयानक था मंजर
चश्मदीद अरविंद ने बताया कि हादसे का मंजर इतना भयानक था कि देखने वालों की भी रूह कांप गई थी। लिफ्ट टूटकर नीचे गिर गई थी, छोटा सा हिस्सा ही ऊपर लटका रह गया था, जहां मजूदर गिरे वहां चारो और खून बिखरा हुआ था। उनकी मौके पर ही मौत हो गई थी।
लगा जैसे कोई बम धमाके हुए
टॉवर में ही काम करने वाले एक व्यक्ति ने बताया कि ट्रॉली लिफ्ट टूटकर जब नीचे गिरी तो बेहद जोरदार धमाका हुआ था। इमारत के शीशे तक हिल गए थे। एक पल को लगा जैसे कोई बम धमाका हुआ है। उस वक्त अगर नीचे और लोग मौजूद होते तो ट्रॉली लिफ्ट की चपेट में आकर उनकी भी जान जा सकती थी।
नहीं थे सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम
परिजनों व अन्य मजदूरों का अरोप है कि अगर सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम होते तो इंतियाज और राजू की मौत नहीं होती। दोनों को सिर्फ लिफ्ट के सहारे नीचे मौत के मुंह में लटका दिया गया था। कोई सेफ्टी बेल्ट तक उन्हें नहीं दी गई थी। अगर उनके पास सेफ्टी बेल्ट होती तो लिफ्ट टूटने के बाद वे बेल्ट के सहारे ऊपर ही लटके रह जाते। तब उन्हें ऊपर खींचकर बचा लिया जाता।


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