Delhi News/ राहुल शर्मा : सत्य निकेतन में इमारत गिरी, 7 लोगों की मौत हुई और अधिकारी समेत 5 कर्मचारी निलंबित कर दिए गए। दिल्ली सरकार से लेकर दिल्ली नगर निगम सभी सख्त कार्रवाई का दावा कर रहे हैं, लेकिन सवाल यह उठता है कि ऐसे मामले में सिस्टम में बैठे लोग कब तक गंभीर बने रहेंगे। कुछ समय बाद यह घटना अतीत बन जाएगी और जांच, कार्रवाई सबकुछ ठंडे बस्ते में चला जाएगा।दिल्ली में बीती 30 मई को दक्षिण जिले के सैदुलाजाब में गिरी इमारत के दौरान भी 6 लोगों की मौत हुई थी, उस समय भी एमसीडी बिल्डिंग डिपार्टमेंट के असिस्टेंट इंजीनियर (बिल्डिंग) और जूनियर इंजीनियर (बिल्डिंग) को सस्पेंड कर दिया गया था। हादसे की मजिस्ट्रेटी जांच में एमसीडी और अन्य संबंधित एजेंसियों को जिम्मेदार पाया गया था।
रिपोर्ट में सामने आया था कि अवैध निर्माण की लगातार शिकायतों के बावजूद निगम अधिकारियों ने समय पर कोई ठोस कदम नहीं उठाया था। उसके बावजूद जारी उदासीनता महज तीन माह बाद सत्य निकेतन में 7 लोगों की जिंदगी लील गई। इसमें भी सख्ती बरतते हुए साउथ जोन के डीसी से लेकर निचले कर्मियों तक पांच लोगों को निलंबित कर दिया गया, लेकिन इनका निलंबन हादसे में अपनों को हमेशा के लिए खो देने वालों के सामने नाकाफी है।
पहले सैदुलाजाब में 6 लोग अब सत्य निकेतन में 7 लोगों की हुई मौत। मगर @MCD_Delhi
में वही ढर्रा चालू है। बिल्डिंग डिपार्टमेंट में प्राइवेट पर्सन रखने का चलन दे रहा भ्रष्टाचार को हवा।@HMOIndia @CMODelhi @praveshwahi#SatyaNiketanNews #SatyaNiketanIncidenthttps://t.co/4kVamZLxSg pic.twitter.com/G4jEOpDeEP— Rahul Sharma 🇮🇳 (@rahuljourno) September 8, 2026
दरअसल एमसीडी में बिल्डिंग विभाग में फैले भ्रष्टाचार को रोक पाना सरकारी तंत्र के बस की बात नहीं है, यही कारण है कि कुछ समय बाद हादसे दोबारा होते हैं और निलंबन के बाद आरोपी अधिकारी या कर्मचारी पुनः नौकरी ज्वाइन कर लेता है, लेकिन पीड़ित परिवार सिर्फ आंसू बहाता रह जाता है।
क्या है बेलदार या प्राइवेट पर्सन का खेल
एमसीडी में बिल्डिंग डिपार्टमेंट में अक्सर वर्क्स विभाग से बेलदार जूनियर इंजीनियर के लिए काम करते हैं। गली-गली, मोहल्ले में बन रही वैध और अवैध, सभी इमारतों और मकानों का इनके पास पूरा लेखा-जोखा होता है। बिल्डिंग डिपार्टमेंट में प्राइवेट पर्सन रखने की परम्परा भी अर्से से चली आ रही है। प्राइवेट पर्सन हो या फिर बिल्डिंग डिपार्टमेंट में दूसरे विभाग से आया बेलदार, ये सभी मकान बनाने वालों से ली गई मोटी रकम की उगाही कर ऊपर तक पहुंचाते हैं।
आलम यह है कि किसी भवन निर्माण के समय यदि इनकी जेब नहीं भरी जाती तो ये मौके पर उसके फोटो लेकर एमसीडी से सबसे पहले ‘कारण बताओ नोटिस’ और आगे चलकर ‘सीलिंग या तोड़फोड़’ का नोटिस तक जारी करवा देते हैं। यह पूरा खेल दिल्ली में किसी से छिपा नहीं रह गया है, मगर भ्रष्टाचार के इस मकड़जाल को अाखिर कौन तोड़ पाएगा। वार्ड में निगम पार्षद, जोन में बैठे डीसी व दूसरे अधिकारी, सभी इस तंत्र से वाकिफ हैं। अहम सवाल यह है कि क्या सत्य निकेतन की घटना के बाद सिस्टम में सभी ईमानदारी से नियमानुसार चल पाएंगे या कुछ समय दोबारा से वही पुराना अवैध को वैध घोषित करने या आंख बंद कर इमारतें खड़ी करने का खेल शुरू हो जाएगा।
सैदुलाजाब कांड के बाद सर्वे नहीं हुआ पूरा
दिल्ली नगर निगम सेंट्रल जोन के पूर्व चेयरमैन एडवोकेट वीरेन्द्र कसाना ने बताया कि 30 मई को महरौली के सैदुलाजाब इलाके में गिरी इमारत में 6 लोगों की मौत हुई थी। उस समय दिल्ली सरकार ने मकानों का सर्वे करवाने की बात कही थी। उन्होंने कहा कि कुल 32 लाख 55 हजार मकानों का सर्वे होना था जिसमें से अभी तक महज 27 लाख 8 हजार भवनों का सर्वे ही हो पाया है। सर्वे में मात्र 19 भवन ही खतरनाक बताए गए और अधिकांश करोलबाग जोन से और एक साउथ जोन से भी था। कसाना ने कहा कि हैरानी की बात यह है कि उस सर्वे के समय भी साउथ जोन बिल्डिंग डिपार्टमेंट को सत्य निकेतन वाली इमारत दिखाई नहीं दी। यदि उस समय ईमानदारी से काम किया गया होता तो शायद यह हादसा टाला जा सकता था।


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