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नोटों के अंबार पर प्रहार

टेबल के चारों तरफ नोटों की गड्डियां ही गड्डियां। नोट गिनने वाली मशीनें भी 6 दिन से हांफने लगी हैं। आयकर अधिकारी दिन रात इस बात का पता लगा रहे हैं कि कांग्रेस के राज्यसभा सांसद धीरज साहू ने कितनी काली कमाई कहां और कैसे छिपा रखी है। यह किसी एक समूह और उससे जुड़ी संस्थाओं के खिलाफ देश में आयकर विभाग द्वारा की गई अब तक कि सबसे अधिक कैश जब्ती है। कांग्रेस सांसद की शराब कंपनी के रांची ओड़िशा के बलांगीर, संबलपुर, टीटलागढ़ के ठिकानों से नोटों से भरे बैग ही मिल रहे हैं। 400 करोड़ रुपये के लगभग नकदी मिलने से यही साबित हो रहा है कि कालेधन पर अंकुश लगाने के लिए कड़े कानून बनाए जाने के बावजूद उस पर पूरी तरह लगाम नहीं लगी है। धीरज साहू कोई पहले नेता नहीं है जिनके यहां से करोड़ों की नकदी मिली। इससे पहले पश्चिम बंगाल में ममता बनर्जी सरकार के मंत्री पार्थ चटर्जी की महिला मित्र के यहां 50 करोड़ रुपये की नकदी अैर कई अचल संपत्तियांे के दस्तावेज मिले थे। आरोपों के अनुसार उन्होंने यह अकूत सम्पत्ति शिक्षकों की भर्ती में धांधली कर के बटोरी थी।
पिछले वर्ष उत्तर प्रदेश के गुटखा व्यापारी के घर से करोड़ों की नकदी मिली थी। इस व्यापारी के बैड और अन्य ठिकानों से नोेट ही नोट मिले थे। लेकिन इस बार मिले नोटों के अंबार से हर कोई हैरान है। काली कमाई करने वाले किस प्रकार भ्रष्टाचार ​निरोधक एजैंसियों की आंखों में धूल झोंकने में समर्थ हैं। इससे साफ है कि आयकर वभाग भी कहीं न कहीं चूक कर बैठता है। सब को मालूम है कि शराब व्यापारियों के यहां भारी मात्रा में नकदी पड़ी होती है। तो छापों की कार्रवाई में इतनी देरी क्यों की गई है। फर भी देर आए दुरुस्त आए आयकर विभाग ने काले धन के नोटों पर करारी चोट कर सांसद महोदय की पोल खोल कर रखी दी है। धीरज साहू ने 2018 में राज्यसभा सांसद बनने के समय जो हल्फनामा दायर किया था। उसमें उन्होंने अपनी सम्पत्ति 34.83 करोड़ बताई थी। उन्होंने 2 करोड़ की चल-अचल सम्पत्ति होने का दावा भी किया था। उन्होंने यह भी दावा किया था कि उन पर कोई आपराधिक केस नहीं है। यह सब जानते हैं कि राजनीतिज्ञ अपने नाम पर ज्यादा कुछ नहीं करते बल्कि उनका सारा निवेश बेनामी या दो नम्बर में होता है। नोटों के अंबार देख कर सवाल तो उठने ही थे कि आखिर इतना धन किस उद्देश्य के लिए जमा किया गया था।
इन छापों पर सियासी संग्राम छिड़ चुका है प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने भी सोशल मीडिया एक्स पर कहा है​ कि जनता से लूटा गया पैसा लुटाना होगा। देशवासी इन नोटों के ढेर को देखें और इन नेताओं के ईमानदारी के भाषणों को सुनें ……. जनता से जो लूटा है उसकी पाई-पाई लौटानी होगी यह मोदी की गारंटी है। भाजपा भी जम कर कांग्रेस पर निशाना साध रही है। हास्यपद बात यह है कि ​सियासी संग्राम के बीच कांग्रेस सांसद धीरज साहू का पुराना पोस्ट वायरल हुआ है। जिसमें वह नोटबंदी की आलोचना करते नजर आ रहे हैं। पोल खुलने के बाद लोग भी उन पर तंज कस रहे हैं और कह रहे हैं कि अब पता चला कि नोटबंदी का विरोध क्यों किया जा रहा था। चारों तरफ से हो रही आलोचना के बाद कांग्रेस ने भी धीरज साहू से पल्ला झाड़ लिया है और गौर करने वाली बात तो यह है कि नोटों के पहाड़ में सारे नोट 500, 200, और 100 के हैं 2000 रुपये के नोट अब चलन से बाहर हो चुके हैैं और इन्हें बदलने की अवधि 8 अक्तूबर तक ही थी। इतने बड़े नोटों का जखीरा और उसमें 2000 के नोटों का नहीं होना कई बातों की ओर इशारा करता है। क्या धीरज साहू की कमाई सिर्फ छोटे नोटों के रूप में थी। क्या उनकी कम्पनियों ने 2000 के सारे नोट 500 और 200 के नोटों में बदल दिए ? किस बैंक ने उनकी मदद की कहीं न कहीं बैंकिंग व्यवस्था में भी छिद्र है।
काला धन कई तरीकों से उत्पन्न होता है। इनमें मुख्यतः दो तरीके आते हैं, आपराधिक गतिविधियां और आय छुपाकर। पहले बात करते हैं आपराधिक गतिविधियों की। इसमें अवैध साधनों-संसाधनों का इस्तेमाल कर जुटाई गई राशि काला धन कहलाती है। इसमें अपहरण, तस्करी, नशीली दवाएं, अवैध खनन, जालसाजी और घोटाले मुख्य रूप से आते हैं। इसके अलावा भ्रष्टाचार जैसे रिश्वतखोरी और चोरी भी काले धन का प्रमुख स्त्रोत हैं। काले धन की उत्पत्ति का दूसरा स्त्रोत है कर बचाने के लिए आय की जानकारी विभाग को नहीं देना। जैसे कि यदि किसी व्यक्ति की वार्षिक आय आयकर के अंतर्गत है तो वह आयकर की राशि को बचाने के लिए अपनी वास्तविक आय के स्थान पर कम आय को दर्शाता है। यह अंतर (वास्तविक आय और घोषित आय के बीच अंतर) काला धन कहलाता है। देश में काले धन के पैदा होने का सबसे बड़ा कारण यही है। ब्लैक मनी रखने वाले व्यक्ति या समूह सरकार की आय में रुकावटें तो पैदा करते ही हैं साथ ही देश सीमित वित्तीय साधनों को अवांछित दिशाओं में मोड़ देते हैं। इसका प्रभाव निर्धन और वंचित रह गए लोगों और सरकार पर पड़ता है। काले धन पर रोक लगाने के लिए मोदी सरकार ने नई व्यवस्थाएं लागू की है। फिर भी आंखों में धूल झोंकने वालों से भ्रष्टाचार निरोधक एजैंसियों को आंखें खोल कर काम करना होगा। निजी क्षेेत्र में निवेश व्यय का भी प्रभावी ढंग से निरीक्षण किया जाना चाहिए। सांसद धीरज साहू को अब पूरा हिसाब-किताब तो अब देना ही पड़ेगा।
आदित्य नारायण चोपड़ा
Adityachopra@punjabkesari.com

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