तख्त पटना साहिब जो कि सिखों के दसवें गुरु गोबिन्द सिंह जी की जन्मस्थली है और इसी स्थान पर गुरु साहिब का बचपन बीता जिसकी गवाही पटना की गलियां आज भी भरती हैं। गुरु साहिब 9 साल की उम्र में पटना से श्री आनंदपुर साहिब के लिए रवाना हुए थे। सिख धर्म में पांच तख्तों को विशेष स्थान दिया गया है जिसमें श्री अकाल तख्त सबसे सवोच्च है। जिसका गठन छठे गुरु हरिगोबिन्द साहिब जी के द्वारा किया गया था। उसके बाद दूसरे नम्बर पर तख्त पटना साहिब आता है। यहां की मर्यादा श्री अकाल तख्त साहिब से हटकर है और यहां पर गुरु ग्रन्थ साहिब के साथ दसम ग्रन्थ का भी प्रकाश किया जाता है। साल 2016 में गुरु गोबिन्द सिंह जी के 350वें प्रकाश पर्व के बाद से संगत का रुझान तख्त पटना साहिब के प्रति बढ़ता ही चला जा रहा है। बिहार के मुख्यमंत्री नितिश कुमार की गुरु साहिब के प्रति पूर्ण आस्था के चलते तख्त साहिब में निरन्तर विकास होता चला जा रहा है। देश के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी डेढ़ साल में 2 बार इस स्थान पर नतमस्तक हो चुके हैं। गृहमंत्री सहित अनेक राज्यों के मुख्यमंत्री से लेकर सभी राजनीतिक पार्टियों के नेता जब भी पटना की धरती पर आते हैं बिना तख्त पटना साहिब नतमस्तक हुए नहीं रहते। यहां एक बात और देखने को मिलती है कि गुरु साहिब के प्रकाश पर्व के मौके पर पूरा सरकारी तंत्र तख्त साहिब प्रबन्धक कमेटी के साथ मिलकर तैयारियों में जुट जाता है। गुरु तेग बहादुर जी के 350वें शहीदी पर्व पर मुख्यमंत्री के द्वारा तख्त कमेटी को जागृति यात्रा निकालने के लिए कहा जिसके बाद कमेटी ने पूरे देश में जागृति यात्रा निकालकर लोगों को गुरु साहिब की शहादत के इतिहास की जानकारी दी गई। हाल ही में मल्टीलेवल कार पार्किंग संगत की सुविधा हेतु बनाने के कार्य की शुरूआत की गई है। संगत की सुविधा हेतु सरकारी भवनों में अस्थाई निवास, 25 बसें लगाई गई जिसका संगत ने भरपूर लाभ उठाया। सरकार द्वारा किए जा रहे प्रयासों के चलते आज समूचा देश इस पावन स्थली के प्रति जागरूक हो चुका है। प्रकाश पर्व पर संगत के सैलाब को देखकर ऐसा प्रतीत हुआ मानो यह पटना नहीं पंजाब हो जहां पर हर तरफ दस्तारधारी सिख ही दिखाई पड़ रहे थे। इस बार गुरु साहिब का प्रकाश पर्व और साहिबजादों की शहादत का दिन एक साथ होने के चलते क्यास लगाए जा रहे थे कि संगत पहले की भान्ति कम हो सकती है मगर संगत पहले से भी कई गुणा अधिक देखी गई।
जरूरतमंद सिखों के लिए मैिडकल और एजुकेशन की व्यवस्था : बढ़ती महंगाई के दौर में मैडीकल और एजुकेशन में बेतहाशा इजाफा होने के चलते आम इन्सान की पकड़ से बाहर होता चला जा रहा है मगर हर इन्सान के लिए यह आवश्यक भी है क्यांेकि हर कोई चाहता है कि उनके बच्चों को बेहतर एजुकेशन मिले और भगवान न करें अगर किसी के परिवार में कोई बीमारी आ जाए तो हर कोई चाहता है कि बेहतर इलाज करवाया जा सके जिसमें कई बार देखने में आता है कि जिन्दगी की पूरी जमा पूंजी लग जाती है। ऐसे में हर साम्रथ्य सिख का फर्ज बनता है कि गुरु महाराज के आदर्शों पर चलते हुए जरूरतमंदों की मदद की जाए। इसी सोच को आगे बढ़ाते हुए गुरु अंगद देव जी के वंशज, मुम्बई निवासी गुरिन्दर सिंह बावा जो कि चीफ खालसा दीवान महाराष्ट्र के चेयरमैन, शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबन्धक कमेटी, तख्त पटना साहिब कमेटी सहित अनेक संस्थाओं से जुड़े हैं। इस कड़ी में उन्होंने जरूरतमंद सिखों के लिए मैडिकल और एजुकेशन की बेहद सुविधाजनक एवं सस्ती सुविधाएं उपलब्ध कराई हैं।
पाकिस्तान की कथनी और करनी में फर्क : पाकिस्तान में अल्पसंख्यक हिन्दू-सिख परिवारों के साथ आए दिन हो रहे शोषण के बावजूद पाकिस्तान सिखों का हमदर्द होने का ढोंग रचता है। सिख समुदाय को खुश करने और अल्पसंख्यक दिवस और पाकिस्तान दिवस के मौके पर पिछले कई सालों से बड़े बडे़ होर्डिंग वाले विज्ञापनों में एक सिख की पुलिस आफिसर की फोटो लगाई जाती है जिसकी असल सच्चाई यह है कि गुलाब सिंह नाम का सिख जो कि पाकिस्तान के पंजाब में बतौर ट्रैफिक पुलिस में कार्यरत था मगर उसे बिना किसी ठोस कारण के 7 साल पहले निलम्बित कर दिया गया और तब से लेकर आज तक वह पुनः बहाली के लिए गुहार लगा रहा है पर उसकी कोई सुनवाई नहीं हुई। असल में इसकी मुख्य वजह ही उसका सिख होना है। हाल ही में उसने पंजाब की मुख्यमंत्री से भी इसकी मांग की है। इसलिए पाकिस्तान को सिखों से हमदर्दी का ढोंग बंद कर देना चाहिए। पाकिस्तान विदेशों में सिखों का इस्तेमाल कर, खालिस्तानी गतिविधियों को बढ़ावा देकर संसार भर में सिखों की छवि को धूमिल करने में कोई कसर नहीं छोड़ रहा।
तख्त हजूर साहिब बोर्ड पुनः स्थापित होना चाहिए : सिखों के पांच तख्तों मंे से एक हजूर साहिब नांदेड़ जहां पिछले समय में सरकार ने बोर्ड को भंगकर प्रशासक लगा दिया था, उस समय हालांकि कई सिख जत्थेबंिदयों के द्वारा इसका खासा विरोध भी हुआ था। जिसके बाद से सिख समाज की निरन्तर मांग उठती आ रही है कि तख्त साहिब का प्रबन्ध सिखों को मिलना चाहिए। उनका यह भी कहना है जिन लोगों के हाथों में सरकार प्रबन्ध की जिम्मेवारी सौंप देती है वह सिख मर्यादा से पूरी तरह अन्जान रहते हैं, इसलिए गुरुघरों खासकर तख्त साहिबान का प्रबन्ध उन्हें ही संभालना चाहिए जिन्हें सिख मर्यादा की पूरी जानकारी हो। संगत की मांग है कि जल्द से जल्द तख्त हजूर साहिब से सरकारी प्रबन्ध हटाकर गुरुद्वारा बोर्ड बहाल किया जाना चाहिए। बीते दिनों माननीय हाईकोर्ट के द्वारा एक आदेश पारित कर सरकारी प्रबन्ध हटाकर पुनः बोर्ड बहाली की बात कही थी मगर सरकार के पुनः कोर्ट में गुहार लगाने के बाद मगर सर्वाेच्च न्यायालय ने सरकार की अपील को 18 दिसंबर को खारिज किया गया। सर्वाेच्च न्यायालय के आदेश में राज्य सरकार को पहले नांदेड़ गुरुद्वारा बोर्ड की बहाली कर उसके बाद गुरुद्वारा बोर्ड के चुनाव कराने का आदेश दिया गया है। सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में मुम्बई हाईकोर्ट द्वारा दिए गए आदेश को सही ठहराते हुए राज्य सरकार को गुरुद्वारा बोर्ड की बहाली करने का निर्देश दिया।
पटना साहिब में श्रद्धालुओं का उमड़ा सैलाब
Summary :
तख्त पटना साहिब जो कि सिखों के दसवें गुरु गोबिन्द सिंह जी की जन्मस्थली है और इसी स्थान पर गुरु साहिब का बचपन बीता जिसकी गवाही पटना की गलियां आज भी भरती हैं। गुरु साहिब 9 साल की उम्र में पटना से श्री आनंदपुर साहिब के लिए रवाना हुए थे। सिख धर्म में पांच तख्तों को विशेष स्थान दिया गया है जिसमें श्री अकाल तख्त सबसे सवोच्च है। जिसका गठन छठे गुरु हरिगोबिन्द साहिब जी के द्वारा किया गया था। उसके बाद दूसरे नम्बर पर तख्त पटना साहिब आता है। यहां की मर्यादा श्री अकाल तख्त साहिब से हटकर है…


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