समय कभी रुकता नहीं। हर बीता वर्ष अपने साथ कुछ यादें, कुछ कड़वे और मीठे अनुभव छोड़ जाता है। हर वर्ष हम बीते पलों को कृतज्ञता के साथ अलविदा कहते हैं और नववर्ष का अभिनंदन करते हैं। नववर्ष हम सब के जीवन में सकारात्मकता, अपनापन और खुशियों की नई बहार लेकर आएं। इन्हीं मंगल कामनाओं के साथ आज के सम्पादकीय की शुरूआत कर रहा हूं। 2025 ने भले ही हमें कई जख्म दिए लेकिन भारत ने सब परिस्थितियों का सामना करते हुए अनेक उपलब्धियां हासिल कीं। नववर्ष का पहला दिन आत्मचिंतन का भी दिन होता है। यह दिन वर्ष की उपलब्धियों के साथ-साथ अपनी कमियों का मूल्यांकन करने का भी समय होता है। यदि व्यक्ति अपने जीवन के आरम्भ से ही लक्ष्य निर्धारित करके चले तो वह लक्ष्य के करीब पहुंच ही जाता है। वर्ष 2025 हमारे लिए काफी चुनौतियों भरा रहा है। इसी वर्ष पहलगाम आतंकी हमला हुआ और भारत ने ऑपरेशन सिंदूर को अंजाम देकर चार दिन में ही दुश्मन पाकिस्तान को घुटने टेकने के लिए मजबूर कर िदया। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने सत्ता सम्भालते ही भारत को टैरिफ वॉर में उलझा दिया। पड़ोसी देश नेपाल और बंगलादेश में स्थितियां बिगड़ीं। बंगलादेश में हिन्दू अल्पसंख्यकों पर हमलों को लेकर भारत आैर बंगलादेश में टकराव काफी बढ़ गया।
नववर्ष हमारे िलए चुनौतियों भरा रहेगा। भारत कूटनीति के अत्यंत निर्णायक और चुनौतिपूर्ण चरण में प्रवेश कर चुका है। सबसे बड़ी परीक्षा तो यह होगी कि भारत किस तरह से अन्तर्राष्ट्रीय व्यवस्था में बदलाव लाते हुए खुद को एक शक्ति केन्द्र के रूप में स्थापित करता है। अर्थव्यवस्था के मोर्चे पर भारत का डंका बज रहा है आैर बीता वर्ष जाते-जाते एक बड़ी खुशखबरी यह देकर गया है कि भारत जापान को पीछे छोड़ते हुए दुनिया की चौथी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बन गया है। भारत अब 4.18 ट्रिलियन डॉलर की जीडीपी वाली अर्थव्यवस्था बन गया है। इस उपलब्धि के साथ ही भारत की नजरें अब जर्मनी को पछाड़ कर तीसरे स्थान पर पहुंचने पर है। उम्मीद जताई जा रही है कि 2030 तक हम तीसरा स्थान हासिल कर लेंगे। इस समय अमेरिका दुनिया की सबसे बड़ी आैर चीन दूसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था है। वित्त वर्ष 2025-26 की दूसरी तिमाही में भारत की रियल जीडीपी ग्रोथ 8.2 प्रतिशत रही है, जो पिछली तिमाहियों के मुकाबले काफी बेहतर है। पहली तिमाही में 7.8 फीसदी और पिछले वित्त वर्ष की चौथी तिमाही में 7.4 प्रतिशत की ग्रोथ दर्ज की गई थी। यह ग्रोथ दिखाती है कि वैश्विक उथल-पुथल के बावजूद भारतीय इकोनॉमी न सिर्फ स्थिर है बल्कि तेजी से आगे बढ़ रही है। भारत पहले से दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्था बनी हुई है।
अर्थव्यवस्था के मोर्च पर मजबूती का श्रेय प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की सरकार को ही जाता है। अमेरिका द्वारा टैरिफ वॉर शुरू करने के बावजूद भारत ने िजस तरह से आपदा में अवसर तलाश किए उससे पूरी दुनिया हैरान है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने नववर्ष से पहले दिए गए संदेश में वर्ष 2025 को सुधारों के वर्ष के रूप में रेखांकित करते हुए कहा कि भारत रिफार्म एक्सप्रैस पर सवार हो गया है और 2047 तक देश को विकसित बनाने के प्रयासों को मजबूती मिलेगी। बीते वर्ष में जबरदस्त सुधार हुए। जिनमें सबसे बड़ा सुुधार जीएसटी में व्यापक बदलाव रहा। मोदी सरकार ने श्रम सुधारों के तहत 29 कानूनों को 4 आधुनिक कोड में बदला। मनरेगा की जगह नया कानून लाया गया। शिक्षा कारोबारी सुगमता और परमाणु ऊर्जा के क्षेत्र में व्यापक सुधार किए गए। नववर्ष में बड़े सुधार जारी रहने की उम्मीद है। देखना यह है कि इन सुधारों का लाभ आम आदमी को कितना मिलता है।
भारत अब ताकतवर देश है और दुनिया उसकी आवाज सुनती है। भारत की चुनौती यह है कि वह अमेरिका के आगे झुके बिना कैसे आगे बढ़ता है। अमेरिका और पाकिस्तान के बढ़ते संबंधों के बीच अपनी सुरक्षा चिंताओं से कैसे निपटता है। इसमें कोई संदेह नहीं कि ब्रिटेन, यूरोपीय संघ और हिन्द प्रशांत देेेेशों के साथ मुक्त व्यापार समझौते केवल आर्थिक नहीं बल्कि रणनीतिक आावश्यकता बन गए हैं। आर्थिक अनिश्चितता और पड़ोसी देशों की अस्थिरता भारत की कूटनीतिक क्षमता का इम्तिहान लेंगे। नेपाल आैर बंगलादेश में चुनाव होने वाले हैं। दोनों देशों की स्थिति का आंकलन बड़ी गम्भीरता से करना होगा।
राजनीतिक मोर्चे पर मोदी सरकार के लिए कहीं कोई मुश्किल नजर नहीं आ रही। देशभर में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के प्रति लोगों की दीवानगी अभी तक बनी हुई है। देश में सामाजिक विडम्बनाएं आज भी दिखाई दे रही हैं। पेड़ अपनी जड़ों को खुद नहीं काटता, पतंग अपनी डोर को खुद नहीं काटती लेकिन मनुष्य आज आधुनिकता की दौड़ में अपनी जड़ें और अपनी डोर काटता दिखाई दे रहा है। एक तरफ देशभर में भगवा ध्वज फहर रहा है तो दूसरी तरफ हम पश्चिमी सभ्यता का अनुकरण करते हुए अपनी संस्कृति की जड़ों और परम्पराओं की डोर काट रहे हैं। भारत को विविधताओं से भरी सांस्कृतिक छवियों वाले एक देश के रूप में देखा जाता है। जहां अलग-अलग धर्मों के लोग आपसी सद्भाव के साथ रहते हैं और एक-दूसरे के त्यौहारों में शामिल होते आए हैं। मगर हाल ही में हुई कुछ घटनाओं ने दूसरे धर्म के लोगों को निशाना बनाया और बड़े पैमाने पर तोड़फोड़ की गई उससे द्वेष का माहौल बन गया आैर सौहार्द का वातारण भंग हुआ। सद्भाव के माहौल में नफरत घोलने के प्रयास किए गए। किसी भी पर्व पर धार्मिक समूहों के खिलाफ हिंसा करना या तोड़फोड़ करना वास्तव में भारत की धर्मनिरपेक्ष छवि को नुक्सान पहुंचाना है। अगर इस तरह की प्रवृत्तियों को रोका नहीं गया तो विदेशों में रह रहे भारतीयों की सुरक्षा के लिए खतरा पैदा हो जाएगा, बल्कि आपसी सद्भाव का माहौल भी बिगड़ने की आशंका पैदा हो जाएगी। अन्तर्राष्ट्रीय स्तर पर हमें गम्भीर प्रतिक्रिया देखने को मिल सकती है। सौहार्द और सद्भाव की परम्परा को बचाए रखने के लिए सरकार और समाज को कदम उठाने की जरूरत है। विश्व के कई भागों में हिंसा, युद्ध, अशांति और अस्थिरता का दौर चल रहा है। ऐसे में हमें निराशा के दौर से निकल कर नववर्ष में प्रवेश करते हुए हम सभी के मन में शुभ की कामना है। हमें अपने कर्त्तव्य का निर्वाह करते हुए वर्ष नव, हर्ष नव, जीवन उत्कर्ष नव इसी क्रम में हमें समस्याओं और चुनौतियों का ध्यान रखना चाहिए। भेदभाव, घृणा, हिंसा, अपराध समाज के िलए चुनौती बने हुए हैं। हमें सम्भलना भी है और गतिशील भी होना है। हमें एक-दूरे का हाथ थाम स्वस्थ, समृद्ध और सार्थक होना है। आईए एकजुट होकर समृद्ध भारत के निर्माण का संकल्प लें तो देश को आगे बढ़ने से कोई शक्ति नहीं राेक सकती। आप सबको पंजाब केसरी की तरफ से नववर्ष की शुभकामनाएं।
नववर्ष अभिनंदन
Summary :
समय कभी रुकता नहीं। हर बीता वर्ष अपने साथ कुछ यादें, कुछ कड़वे और मीठे अनुभव छोड़ जाता है। हर वर्ष हम बीते पलों को कृतज्ञता के साथ अलविदा कहते हैं और नववर्ष का अभिनंदन करते हैं। नववर्ष हम सब के जीवन में सकारात्मकता, अपनापन और खुशियों की नई बहार लेकर आएं। इन्हीं मंगल कामनाओं के साथ आज के सम्पादकीय की शुरूआत कर रहा हूं। 2025 ने भले ही हमें कई जख्म दिए लेकिन भारत ने सब परिस्थितियों का सामना करते हुए अनेक उपलब्धियां हासिल कीं। नववर्ष का पहला दिन आत्मचिंतन का भी दिन होता है। यह दिन वर्ष की…



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