भारत सरकार लंबे समय से अमेरिका और कनाडा से लॉरेंस बिश्नोई गैंग के खिलाफ कार्रवाई और प्रत्यर्पण की मांग कर रही थी लेकिन दोनों देशों की सरकार भारत सरकार की मांग की अनदेखी करती रही हैं। लेकिन जब अमेरिकी जांच एजेंसियों को इस बात की भनक लगी कि यह गिरोह एक अंतर्राष्ट्रीय संगठित आपराधिक नेटवर्क में बदल चुका है। इन एजेंसियों के अनुसार, यह गिरोह अमेरिका और कनाडा की धरती पर हत्या, भारी रंगदारी, नशीली दवाओं की तस्करी और नागरिकों को डराने-धमकाने जैसे गंभीर अपराधों को अंजाम दे रहा था, तब जाकर इन देशों ने इस गिरोह के खिलाफ बड़ा कदम उठाया है। अमेरिका और कनाडा के रुख में हुए इस बदलाव के बाद अमेरिका, कनाडा और यूरोपीय एजेंसियों ने एक साझा अन्तर्राष्ट्रीय अभियान चलाया है, जिसे ‘ऑपरेशन हार्ड बॉल’ नाम दिया गया है।
लॉरेंस बिश्नोई का नाम वर्षों से भारत के कुछ सबसे बड़े गैंगवार मामलों से जुड़ा रहा है। गुजरात की साबरमती केंद्रीय जेल में 2015 से बंद होने के बावजूद, भारतीय एजेंसियों ने उन पर जबरन वसूली और लक्षित हत्याओं में शामिल एक अन्तर्राष्ट्रीय आपराधिक नेटवर्क चलाने का आरोप लगाया है। अब, संयुक्त राज्य अमेरिका ने बिश्नोई नेटवर्क को ऑपरेशन हार्ड बॉल के केंद्र में रखा है, जो अन्तर्राष्ट्रीय संगठित अपराध पर एक बड़ी कार्रवाई है। गुप्तचर अधिकारियों, मुखबिरों और फर्जी जबरन वसूली सौदों का उपयोग करते हुए जांचकर्ताओं ने एक ऐसा मामला बनाया जिसके परिणामस्वरूप अमेरिका, कनाडा और यूरोप भर में 37 लोगों के खिलाफ आरोप लगाए गए और 24 व्यक्तियों को गिरफ्तार किया गया। दुनियाभर में सत्ताएं बनाने व सरकार गिराने के खेल में अमेरिका किस हद तक जाता है। उसे पूरी दुनिया में सत्ता की शतरंज खेलने में ‘डीप स्टेट’ के इस्तेमाल का जनक माना जाता है। सवाल है कि भारतीय संसद व मुंबई पर हुए भीषण आतंकवादी हमलों में शामिल पाक आतंकवादियों व मास्टर माइंडों पर क्या ऐसी कार्रवाई हुई है? जबकि कई मास्टरमाइंड अमेरिका में रह रहे थे? क्या ऐसी कार्रवाई पाक सरकार समर्थित लश्कर-ए-तैयबा के आतंकवादियों के खिलाफ हुई, जब पहलगाम की बैसरन घाटी में बेकसूर 26 भारतीय पर्यटकों की हत्या उनका धर्म पूछकर की गई थी? ऑपरेशन हार्ड बॉल से पता चलता है कि संगठित अपराध में किस तरह बदलाव आया है। जांचकर्ताओं का आरोप है कि कथित आपराधिक नेटवर्क अब एन्क्रिप्टेड ऐप्स, विश्वसनीय सहयोगियों और अन्तर्राष्ट्रीय संपर्कों के माध्यम से महाद्वीपों में काम कर सकते हैं। भारत के लिए, इसने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि संगठित अपराध गिरोह अपने कथित नेताओं के जेल में होने के बावजूद भी कैसे काम करना जारी रखते हैं।
अमेरिका की यह ताबड़तोड़ कार्रवाई कनाडा सरकार की उस घोषणा के तुरंत बाद आई है, जिसमें कहा गया था कि कनाडा के निज्जर हत्याकांड में भारत की कोई भूमिका नहीं थी। उल्लेखनीय है कि बहुचर्चित निज्जर हत्याकांड को लेकर पिछली जस्टिन ट्रूडो सरकार ने भारत सरकार के एक अधिकारी पर संलिप्तता के आरोप लगाए थे। जिसके चलते भारत व कनाडा के रिश्ते सबसे निचले स्तर तक जा पहुंचे थे लेकिन नई सरकार ने ट्रूडो की थ्योरी को नकार दिया था। जिसके बाद ही अमेरिका की यह तल्ख प्रतिक्रिया सामने आई है। कनाडा पुलिस के सूत्रों के अनुसार अमेरिका लारेंस बिश्नोई के प्रत्यारोपण की मांग करेगा। बहरहाल, अमेरिकी एजेंसियों द्वारा चलाए गए ‘हॉर्ड बॉल ऑपरेशन’ में जिन 24 लोगों की गिरफ्तारियां हुई हैं, उन पर भारत से जुड़े संगठित अपराधी गुटों से संबंध होने का आरोप लगाया है। लॉरेंस और गोल्डी बराड़ को कई मामलों में आरोपी बनाया गया है, जिसमें साल 2023 में खालिस्तान समर्थक हरदीप सिंह निज्जर की हत्या की साजिश में शामिल होना भी है। अधिकारियों का आरोप है कि पिछले कुछ वर्षों में उसका आपराधिक नेटवर्क भारत से बाहर भी फैल गया और उसने कनाडा, अमेरिका और अन्य देशों में भी संबंध विकसित कर लिए।
अमेरिकी अभियोग में उनके करीबी सहयोगी गोल्डी बराड़ का भी नाम है, जिनके बारे में माना जाता है कि वह कनाडा में रहते हैं और लंबे समय से गिरोह के विदेशों में प्रमुख संचालकों में से एक माने जाते रहे हैं। इस जांच का सबसे चौंकाने वाला पहलू यह है कि अमेरिकी अधिकारियों ने इस मामले को किस तरह से गढ़ा। अदालती दस्तावेजों के अनुसार, जांच की एक कड़ी जुलाई 2023 में शुरू हुई जब कथित कनाडाई ड्रग तस्कर रविंदर सिंह ढांडा ने अनजाने में अमेरिकी कानून प्रवर्तन एजेंसियों के साथ काम कर रहे एक गोपनीय मुखबिर से संपर्क किया। मुखबिर ने धीरे-धीरे आपराधिक नेटवर्क के सदस्यों का विश्वास हासिल कर लिया और उन बैठकों और बातचीत में भाग लिया जिनसे जांचकर्ताओं को यह समझने में मदद मिली कि समूह कैसे काम करते हैं। बाद में इसी रणनीति का इस्तेमाल बिश्नोई नेटवर्क के खिलाफ किया गया। जनवरी 2025 में जांचकर्ताओं ने जबरन वसूली का एक फर्जी परिदृश्य तैयार किया।
सुकराज सिंह कांग नामक एक कथित गिरोह के सदस्य ने कथित तौर पर 100,000 डॉलर से 200,000 डॉलर के बीच के कथित ऋण की वसूली में मदद करने पर सहमति जताई थी। उसने कथित तौर पर अपनी सेवाओं के बदले 16,000 डॉलर की फीस की मांग की लेकिन इसमें एक पेंच था। जिस व्यक्ति ने पैसे बकाया होने का दावा किया था, वह वास्तव में एक गुप्त मुखबिर था जिसे अदालती दस्तावेजों में सीआई-1 के नाम से जाना जाता था। आरोपी देनदार एक गुप्त कानून प्रवर्तन अधिकारी था जिसकी पहचान यूसी-1 के रूप में की गई थी।
अभियोजकों के अनुसार, गिरोह के कथित सदस्यों ने तब गुप्तचर अधिकारी से संपर्क किया और कथित तौर पर उसे जान से मारने की धमकी दी, यदि पैसे का भुगतान नहीं किया गया। यह बातचीत महीनों तक चली और इससे जांचकर्ताओं को नेटवर्क के तरीकों, संचार चैनलों और पदानुक्रम के बारे में बहुमूल्य सबूत मिले। गुप्तचर अधिकारियों और मुखबिरों द्वारा जुटाए गए सबूतों के आधार पर अंततः संघीय अभियोग लगाए गए। यह तथ्य किसी से छिपा नहीं है कि अमेरिका की नीतियां अमेरिका से शुरू होकर अमेरिका पर ही खत्म हो जाती हैं। ऐसे में भारतीय गैंगस्टरों पर की जा रही ताबड़तोड़ कार्रवाई को लेकर भी सवाल उठाये जा रहे हैं। निस्संदेह, गैंगवार पर अंकुश लगना चाहिए लेकिन सवाल इस कार्रवाई की टाइमिंग को लेकर है।
अमेरिका का ऑपरेशन हार्ड बॉल
Summary :
भारत सरकार लंबे समय से अमेरिका और कनाडा से लॉरेंस बिश्नोई गैंग के खिलाफ कार्रवाई और प्रत्यर्पण की मांग कर रही थी लेकिन दोनों देशों की सरकार भारत सरकार की मांग की अनदेखी करती रही हैं। लेकिन जब अमेरिकी जांच एजेंसियों को इस बात की भनक लगी कि यह गिरोह एक अंतर्राष्ट्रीय संगठित आपराधिक नेटवर्क में बदल चुका है। इन एजेंसियों के अनुसार, यह गिरोह अमेरिका और कनाडा की धरती पर हत्या, भारी रंगदारी, नशीली दवाओं की तस्करी और नागरिकों को डराने-धमकाने जैसे गंभीर अपराधों को अंजाम दे रहा था, तब जाकर इन देशों ने इस गिरोह के खिलाफ बड़ा…


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