बवाल : संसद के अंदर और बाहर

Summary :

प्रधानमंत्री को कैमरे का नहीं, अपने दिल का एंगल बदलना चाहिए- प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी का तंज। प्रियंका गांधी का यह बयान उन इंस्टाग्राम वीडियो के संदर्भ में था जो प्रदर्शन कर रहे छात्रों से बातचीत के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के सोशल मीडिया पर व्यापक रूप से साझा किए गए थे। उन्होंने कहा कि जेन ज़ी का विश्वास “अलग-अलग कैमरा एंगल से बनाए गए वीडियो” के माध्यम से नहीं जीता जा सकता। गौरतलब है कि उन वीडियो में प्रधानमंत्री एक से अधिक बार कैमरे का एंगल ठीक करते हुए दिखाई दिए थे। प्रियंका गांधी ने…

प्रधानमंत्री को कैमरे का नहीं, अपने दिल का एंगल बदलना चाहिए- प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी का तंज। प्रियंका गांधी का यह बयान उन इंस्टाग्राम वीडियो के संदर्भ में था जो प्रदर्शन कर रहे छात्रों से बातचीत के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के सोशल मीडिया पर व्यापक रूप से साझा किए गए थे। उन्होंने कहा कि जेन ज़ी का विश्वास “अलग-अलग कैमरा एंगल से बनाए गए वीडियो” के माध्यम से नहीं जीता जा सकता। गौरतलब है कि उन वीडियो में प्रधानमंत्री एक से अधिक बार कैमरे का एंगल ठीक करते हुए दिखाई दिए थे।

प्रियंका गांधी ने इस दौरान पुलिस द्वारा पैलेट गन के इस्तेमाल को लेकर भी प्रधानमंत्री और केंद्रीय गृहमंत्री दोनों से सवाल किए। उन्होंने कहा-पैलेट गन के इस्तेमाल का आदेश किसने दिया? क्या यह आदेश प्रधानमंत्री ने दिया था या गृहमंत्री ने? इसका जवाब उन्हें देना चाहिए। यहीं तक सीमित न रहते हुए उन्होंने आईआईटी के निदेशक वी. कामकोटि पर भी निशाना साधा और उन्हें “गौमूत्र विशेषज्ञ” कहकर संबोधित किया। हाल ही में परीक्षा सुधारों के लिए गठित टास्क फोर्स में उनकी नियुक्ति का उल्लेख करते हुए गांधी ने लोकसभा में परीक्षा प्रश्नपत्र लीक पर चर्चा के दौरान कहा-इस नई समिति में एक पूर्व आईबी प्रमुख हैं, एक आईटी कंपनी के मालिक हैं और एक गौमूत्र विशेषज्ञ हैं। यह टिप्पणी उन्होंने अपनी सहज मुस्कान के साथ की जिससे सदन का माहौल कुछ हल्का हो गया।

प्रियंका गांधी की इस मुस्कान पर भाजपा सांसद अनुराग ठाकुर ने भी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा-जिस तरह वह मासूम चेहरा बनाती हैं, लोगों को गुमराह करती हैं, हल्की मुस्कान बिखेरती हैं और यहां तक कि अध्यक्ष महोदय से भी मुस्कुराने के लिए कहती हैं, वह यह सब गंभीर विषयों पर बोलते हुए करती हैं। वह अपनी ही सरकार के पिछले कार्यकाल की गलतियों और विफलताओं पर पर्दा डालने की कोशिश करती हैं। हालांकि, अपनी यह टिप्पणी करते समय अनुराग ठाकुर स्वयं मुस्कुराते नहीं दिखे।

प्रियंका गांधी का यह हमला वी. कामकोटि के उस पुराने बयान के बाद सामने आया जिसमें उन्होंने दावा किया था कि गौमूत्र में औषधीय गुण होते हैं। कामकोटि ने कहा था, “गौमूत्र के एंटी-फंगल, एंटी-बैक्टीरियल और एंटी-इन्फ्लेमेटरी गुणों को वैज्ञानिक रूप से प्रमाणित किया जा चुका है। अमेरिका की प्रतिष्ठित वैज्ञानिक पत्रिकाओं में भी इससे संबंधित शोध प्रकाशित हुए हैं।” प्रियंका गांधी ने यहीं रुकना उचित नहीं समझा। उन्होंने पूर्व केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान पर भी तीखा हमला बोला और संसद में उनके इस्तीफे के बाद किए गए सम्मान समारोह पर सवाल उठाए।

धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने प्रह्लाद जोशी को नया शिक्षा मंत्री नियुक्त किया था। राहुल गांधी ने इस फैसले पर भी सवाल उठाए। राहुल गांधी ने प्रह्लाद जोशी को ‘सबसे घृणित किस्म का व्यक्ति’ बताते हुए आरोप लगाया कि वह बलात्कार के आरोपियों का बचाव करते रहे हैं। सरकार पर तीखा प्रहार करते हुए राहुल गांधी ने कहा-ये युवा शिक्षा व्यवस्था को लेकर आंदोलन कर रहे थे। इतनी बड़ी संख्या में छात्राएं सड़कों पर थीं। उन्होंने कहा-उनकी कैबिनेट में इतने लोग हैं। वे किसी को भी चुन सकते थे लेकिन उन्होंने ऐसे व्यक्ति को चुना जो बलात्कारियों का बचाव करता है। यह वास्तव में हैरान करने वाला है।

राहुल गांधी का यह आरोप वर्ष 2022 में प्रह्लाद जोशी द्वारा बिलकिस बानो सामूहिक दुष्कर्म मामले के 11 दोषियों को गुजरात सरकार द्वारा दी गई समयपूर्व रिहाई के समर्थन में दिए गए बयान से जुड़ा था। उस समय जोशी ने कहा था कि दोषियों की रिहाई कानून और राज्य की क्षमादान नीति के अनुरूप की गई है। बाद में सर्वोच्च न्यायालय ने इस रिहाई पर रोक लगाते हुए सभी दोषियों को दोबारा जेल भेजने का आदेश दिया। इसी तरह प्रियंका गांधी ने भी प्रह्लाद जोशी पर उन्हीं आरोपों को लेकर हमला बोला। इस दौरान दोनों के बीच तीखी नोकझोंक देखने को मिली। आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए प्रह्लाद जोशी ने प्रियंका गांधी से अपने बयान के समर्थन में प्रमाण प्रस्तुत करने की मांग की।

उन्होंने कहा कि कोई भी सांसद ‘कुछ भी कहकर नहीं बच सकता।’ जोशी ने न केवल उनसे सार्वजनिक माफ़ी की मांग की, बल्कि उन्हें सदन से निष्कासित किए जाने की भी मांग उठाई। चूंकि प्रियंका गांधी ने ये आरोप लोकसभा के भीतर लगाए थे, जबकि राहुल गांधी की टिप्पणी सदन के बाहर की गई थी, इसलिए जोशी ने कार्रवाई की मांग विशेष रूप से प्रियंका गांधी के खिलाफ की। वहीं, संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने उन पर ‘चरित्र हनन’ करने का आरोप लगाया।
उधर, परीक्षा प्रश्नपत्र लीक मामले पर संसद में राहुल गांधी का भाषण भी विवाद और हंगामे से अछूता नहीं रहा।

राहुल गांधी ने आरोप लगाया कि परीक्षा अनियमितताओं के विरोध में प्रदर्शन कर रहे छात्रों पर पैलेट गन चलाने का आदेश केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने दिया था। एनडीए के नेताओं ने इस आरोप पर कड़ी आपत्ति जताते हुए राहुल गांधी से माफ़ी की मांग की और उनके बयान को सरकार के खिलाफ निराधार आरोप बताया। दरअसल, राहुल गांधी का पूरा भाषण अपनी विषयवस्तु से अधिक विवाद और तीखे राजनीतिक आरोपों के कारण चर्चा में रहा। भाषण की शुरुआत में ही उन्होंने हालिया परीक्षा प्रश्नपत्र लीक विरोध-प्रदर्शनों के संदर्भ में सरकार पर निशाना साधते हुए “इडियट” शब्द का इस्तेमाल किया, जिस पर सत्ता पक्ष ने कड़ी आपत्ति दर्ज कराई।

राहुल गांधी ने अपनी परिचित शैली में एक प्रसंग सुनाते हुए कहा कि एक 18 वर्षीय युवक ने उन्हें बताया कि ‘छात्र’ वे होते हैं जो ज्ञान की खोज करते हैं और दूसरों की बात सुनने के लिए तैयार रहते हैं। इसके विपरीत एक दूसरा वर्ग ऐसा है जो मानता है कि उसे सब कुछ पता है, वह किसी की बात सुनना नहीं चाहता और स्वयं को सर्वज्ञ समझता है। राहुल गांधी ने कहा, ‘एक और वर्ग है’ जो छात्र नहीं है। उन्हें लगता है कि वे सब कुछ जानते हैं। वे स्वयं को भगवान समझते हैं। वे अहंकारी हैं और किसी की बात नहीं सुनते।

इसी क्रम में राहुल गांधी ने एक ऐसे शब्द का प्रयोग किया जिसे सत्ता पक्ष ने असंसदीय करार दिया। सत्ता पक्ष के सांसदों ने कहा कि राहुल गांधी छात्रों का उदाहरण देकर वास्तव में स्वयं ही उस शब्द का इस्तेमाल कर रहे हैं। विवाद यहीं नहीं थमा। अपने भाषण के दौरान राहुल गांधी ने एक बार फिर अमित शाह पर छात्रों पर हमले का आदेश देने का आरोप लगाया। वे लगातार सरकार को कठघरे में खड़ा कर रहे हैं। विशेष रूप से राहुल गांधी प्रधानमंत्री और उनके मंत्रियों पर निरंतर और आक्रामक हमले करके सत्तापक्ष के लिए असहज स्थिति पैदा कर रहे हैं।

इस दृष्टि से देखें तो वे लोकसभा में विपक्ष के नेता के रूप में अपनी जिम्मेदारी निभाते प्रतीत होते हैं। उनकी कार्यशैली भाजपा की दिवंगत नेता सुषमा स्वराज के उस कथन की याद दिलाती है जो उन्होंने वर्ष 2012 में, जब भाजपा प्रमुख विपक्षी दल थी, कहा था- ‘संसद को चलने न देना भी लोकतंत्र का एक स्वरूप है।’ उस समय उन्होंने यह भी कहा था कि संसद चलाना सरकार की जिम्मेदारी है, विपक्ष की नहीं। उनका तर्क था कि सरकार को विपक्ष को विश्वास में लेकर सहमति बनाने का प्रयास करना चाहिए, न कि अपनी शर्तें थोपनी चाहिए।

समय ने अब मानो पूरा चक्र पूरा कर लिया है। आज राहुल गांधी के नेतृत्व में कांग्रेस उसी विचार को शब्दों से नहीं, बल्कि अपने राजनीतिक आचरण से सामने रखती दिखाई देती है। विपक्ष सरकार को लगातार घेर रहा है और यह संदेश दे रहा है कि सदन को सुचारु रूप से चलाने की जिम्मेदारी अंततः सरकार की ही है। इस दृष्टि से प्रियंका गांधी और राहुल गांधी की आलोचना करना आसान नहीं है। वे वही राजनीतिक रणनीति अपनाते दिखाई देते हैं, जिसकी वकालत कभी सुषमा स्वराज ने विपक्ष में रहते हुए की थी।

हालांकि, एक प्रश्न अवश्य उठता है। क्या लगातार हंगामे और व्यवधान के कारण बहस के बहुमूल्य घंटे नष्ट होने से विपक्ष उस मूल जिम्मेदारी से दूर नहीं हो रहा, जिसके तहत उसे सरकार को तथ्यों, नीतियों और ठोस मुद्दों पर कठघरे में खड़ा करना चाहिए? क्या इससे सरकार को विपक्ष की अनुपस्थिति में विधेयक पारित कराने, पर्याप्त चर्चा के बिना कानून बनाने या प्रस्तावित विधेयकों की कमियों पर गंभीर बहस से बच निकलने का अवसर नहीं मिल जाता? निस्संदेह, शोर-शराबा, विरोध और व्यवधान एक जीवंत लोकतंत्र का हिस्सा हैं। लेकिन यदि संसद का कामकाज लगातार ठप्प हो जाए और सदन अपनी मूल भूमिका निभाने से वंचित रह जाए, तो कहीं ऐसा न हो कि व्यापक उद्देश्य ही पीछे छूट जाए और ध्यान केवल तात्कालिक राजनीतिक टकराव पर केंद्रित रह जाए।

Team Desk