पाकिस्तानी मुस्लिमों द्वारा सिख महिलाओं का धर्म परिवर्तन

हिन्दू-सिखों का धर्म परिवर्तन भले ही वह जबरन करवाया गया हो या फिर किसी भी तरह के लोभ लालच देकर हो एक बड़ा मुद्दा बन चुका है और खासकर पंजाब में इसका प्रभाव सबसे अधिक देखने को मिल रहा है जहां पर ईसाई मिशनरियों के द्वारा गरीब वर्ग के लोगों को अपना शिकार बनाया जा रहा है। इस पर देश के गृह मंत्री भी चिन्तित हैं और अब तो सुप्रीम कोर्ट भी इस पर सख्त रुख अपनाता दिख रहा है। मगर वहीं विदेशों में पाकिस्तानी मुस्लिमों के द्वारा ग्रूमिंग गैंग के तहत सिख महिलाओं को मुस्लिम बनाने के लिए ‘‘कौर टू खान’’ मुहिम चलाए जाने की बात सामने आ रही है जो बेहद चिन्ता का विषय है। इसके लिए यह भी जानकारी मिल रही है कि 10 हजार पौंड तक उन महिलाओं को दिए जा रहे हैं जिसके लालच में आकर सिख परिवारों की बच्चियां जो पढ़ने के लिए विदेश गई हैं और उन्हंे नौकरी नहीं मिल रही है वह इनके जाल में फंसकर अपना धर्म परिवर्तन करवाती दिख रही हैं। वैसे तो पिछले दो दशकों में यूनाइटेड किंगडम में बच्चों और युवतियों के शोषण से जुड़े कई गंभीर मामले सामने आते रहते हैं मगर हाल ही में सोशल मी​िडया पर एक पोस्ट वायरल हो रही है जिसने सिख समुदाय को बेहद चिन्तित कर दिया है।
इतिहास इस बात का गवाह है कि सिख महिलाओं ने कभी धर्म परिवर्तन नहीं किया भले ही उन्हें कई प्रकार के कष्ट झेलने पड़े, यहां तक कि धर्म परिवर्तन ना करने के चलते उन्हें मौत के घाट उतार दिया गया, उनके सामने उनके बच्चों को बेरहमी से शहीद किया गया पर वह अपने धर्म में पक्के रही। मगर शायद लगता है कि समय के साथ-साथ आज परिस्थितियां बदली हुई हैं जिसके चलते थोड़े से पैसों के लालच में सिख महिलाएं अपना धर्म छोड़ने में जरा भी देर नहीं लगाती। आज एक बार फिर से मुस्लिम समुदाय के लोगों द्वारा एक गहरी साजिश के तहत सिख परिवारों की लड़कियों को निशाना बनाया जा रहा है। हाल ही में एक मामला पाकिस्तान गुरुद्वारों के लिए जाने वाले जत्थे में देखा गया जिसमें सरबजीत कौर की महिला ने पहले जत्थे से अलग होकर पाकिस्तान के एक मुस्लिम लड़के से निकाह करके धर्म बदला और अब वहां से सिखों के खिलाफ जहर उगल रही हैं। सिख बु़िद्धजीवियों और नेताओं को इसके लिए आगे आकर सिख परिवारों की बच्चियों में जागरुकता लाने की आवश्यकता है क्यांेकि जब तक सिख परिवारों की बच्चियां इसके प्रति जागरुक नहीं होंगी ऐसी घटनाएं सामने आती रहेंगी। पंजाब में सबसे ज्यादा प्रचलन सिख परिवारों की लड़कियों का विदेश जाने का रहता है इसलिए वहां जागरुकता अभियान चलाने की अधिक आवश्यकता है। आजकल यह भी देखने में आ रहा है कि कुछ सिखों के द्वारा मुस्लिम समुदाय से मित्रता बढ़ाने का शौक पैदा हो रहा है उन्हें भी इस विषय पर गंभीरता दिखाते हुए मुस्लिम समुदाय के जो लोग ग्रूमिंग गैंग के रुप में कार्यरत हैं उन पर शिकंजा लगवाने के लिए दबाव बनाना चाहिए। वहीं यूके की सरकार को भी जबरन धर्म परिवर्तन या फिर लालच में फंसाकर धर्म परिवर्तन करवाने वालों के खिलाफ सख्त कार्यवाई करनी चाहिए।
“खालिस्तान जनमत संग्रह” आयोजकों के संगठित अपराध से संबंध
हाल के वर्षों में तथाकथित “खालिस्तान जनमत संग्रह” का मुद्दा अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा का विषय बना हुआ है। इस अभियान को मुख्य रूप से सिख फार जस्टिस नामक संगठन द्वारा चलाया जा रहा है, जिनका मकसद केवल सिख प्रवासी समुदाय से पैसा और संसाधन निकालने मात्र है।
हालांकि भारत सरकार द्वारा पहले ही प्रतिबंधित घोषित किया जा चुका है। लेकिन इस पूरे प्रकरण का सबसे चिंताजनक पहलू यह है कि इसके आयोजकों और समर्थकों के कथित तौर पर संगठित अपराध से जुड़े होने के आरोप लगातार सामने आते रहे हैं। यह भी देखा जाता है कि आयोजकों के संगठित अपराध से गहरे संबंध के प्रमाण भी कई बार मिल चुके हैं। दिसंबर 2025 में, कैलिफ़ोर्निया में सिख फार जस्टिस के खालिस्तान जनमत संग्रह के आयोजक जसपाल सिंह को एक हाई स्कूल के बाहर स्टिंग ऑपरेशन में 14 साल से कम उम्र के बच्चे के साथ अश्लील हरकतें करते हुए पकड़ा गया और पूछताछ के दौरान, उसने आरोपों को स्वीकार किया। ऐसी घटनाएँ दिखाती हैं कि ‘‘खालिस्तानी समूह’’ रिको एक्ट के अंतर्गत आते हैं, जो अमेरिका के उन संगठित आपराधिक गिरोहों को निशाना बनाता है जो अपने एजेंडे को आगे बढ़ाने के लिए बार-बार अवैध गतिविधियों में शामिल होते हैं। “जनमत संग्रह” के नाम पर प्रवासी समुदाय का शोषण करते हुए गंभीर अपराध करना, नेताओं को संघीय अभियोजन के दायरे में लाता है। कई सुरक्षा एजेंसियों और खुफिया रिपोर्टों में यह संकेत मिले हैं कि इस प्रकार के जनमत संग्रह के पीछे केवल राजनीतिक विचारधारा नहीं, बल्कि अवैध गतिविधियों का एक नेटवर्क भी सक्रिय है। इनमें मनी लॉन्ड्रिंग, ड्रग्स तस्करी, और हथियारों की आपूर्ति जैसे गंभीर अपराध शामिल बताए जाते हैं। इस तरह के नेटवर्क अक्सर अलगाववादी आंदोलनों को आर्थिक और लॉजिस्टिक समर्थन प्रदान करते हैं जिन्हें रोकने के लिए हर देश की सरकारों को सख्ती से पेश आना होगा। ‘‘खालिस्तान जनमत संग्रह” का आयोजन मुख्य रूप से कनाडा, ब्रिटेन, और ऑस्ट्रेलिया जैसे देशों में किया जाता है।
इन देशों में सक्रिय कुछ तत्वों पर आरोप है कि वे स्थानीय कानूनों का लाभ उठाकर भारत-विरोधी गतिविधियों को बढ़ावा दे रहे हैं। कई बार यह भी देखा गया है कि ऐसे कार्यक्रमों के माध्यम से युवाओं को भड़काने और गलत सूचना फैलाने का प्रयास किया जाता है। भारत जैसे विविधता वाले देश के लिए इस प्रकार की गतिविधियाँ आंतरिक सुरक्षा के लिए गंभीर चुनौती बन सकती हैं।
मोदी सरकार द्वारा सिखों के पांच तख्तों को जोड़ने हेतु रेल सेवा
सिख धर्म के पांच तख्त साहिबान हैं जिनमें सिरमोर श्री अकाल तख्त साहिब है जिसकी स्थापना छठे गुरु हरिगोबिन्द साहिब के द्वारा की गई थी, उसके बाद तख्त पटना साहिब जो कि गुरु गोबिन्द सिंह जी की जन्मस्थली है। इसी प्रकार तख्त सचखण्ड हजूर साहिब नांदेड़, तख्त केशगढ़ साहिब आनंदपुर साहिब और तख्त साबो की तलवंडी बठिण्डा में सुशोभित है। हर सिख की इच्छा रहती है कि वह पांच तख्त साहिबान के दर्शन अपने जीवनकाल में अवश्य करे मगर सीधी रेल सेवा ना होने के चलते कई सिख दर्शनों से वंचित रह जाते हैं।
देश को आजाद हुए आज 79 साल होने को हैं मगर आज तक किसी भी रेल मंत्री के द्वारा इस ओर ध्यान आकर्षित ही नहीं किया गया या यह कहा जाए कि किसी की सोच ही नहीं थी। मगर पंजाब के युवा नेता रवनीत सिंह बिट्टू को जब से रेल मंत्रालय में बतौर रेल राज्यमंत्री का कार्यभार मिला उनकी पूरी कोशिश रही कि किसी भी तरह से सिख धर्म के पांच तख्त साहिबान को आपस में रेल सेवा से जोड़ा जाए और इस कार्य के लिए देश के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी से लेकर समूचे मं​ित्रमण्डल का उन्हें सहयोग मिल रहा है जिसके चलते अब यह माना जा रहा है कि आने वाले समय में निश्चित तौर पर पांच तख्त साहिबान रेल सेवा के माध्यम से जुड़ सकेंगे। तख्त पटना साहिब कमेटी के अध्यक्ष जगजोत सिंह सोही की मानें तो रवनीत सिंह बिट्टू के प्रयास सराहनीय हंै, उनकी पूरी कोशिश रहती है कि तख्त पटना साहिब आने वाले श्रद्धालुओं के लिए कुछ ऐसा किया जाए कि उन्हें किसी तरह की परेशानी ना हो। इसी के चलते पटना साहिब स्टेशन पर तकरीबन सभी ट्रेनों का ठहराव दिया जा रहा है, स्टेशन को अत्याधुनिक बनाने और उसके सौंदर्यकरण का कार्य किया जा रहा है। कई नई ट्रेन विभिन्न दिशाओं से चलाई जा रही हैं।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *


Make Punjab Kesari Your Trusted News Source

पंजाब केसरी एक हिंदी भाषा का समाचार पत्र है जो भारत में पंजाब, हरियाणा, राजस्थान, हिमाचल प्रदेश और दिल्ली के कई केंद्रों से प्रकाशित होता है।