फैशन जगत में सांवली यु​वती की धूम

Summary :

भारत में गोरा रंग एक गहरा सामाजिक मुद्दा है, जिसे अक्सर सुंदरता, सफलता और उच्च सामाजिक स्थिति से जोड़ा जाता है। औपनिवेशिक विरासत और ऐतिहासिक पूर्वग्रहों के कारण भारतीय समाज में गोरी त्वचा को पसंद किया जाता है जबकि काले रंग को अक्सर नकारात्मक रूप से देखा जाता है। यह पसंद सिर्फ व्यक्तिगत नहीं बल्कि एक व्यापक सांस्कृतिक रूढ़िवादी सोच का हिस्सा है। रंग सुंदरता का प्रतीक है। विवाहों में गोरी त्वचा को अत्यधिक प्राथमिकता दी जाती है और इसके लिए कई उत्पाद और प्रथाएं मौजूद हैं। हर कोई गोरी दुल्हन चाहता है। इतना ही नहीं शादीशुदा जोड़ें बच्चों का…

भारत में गोरा रंग एक गहरा सामाजिक मुद्दा है, जिसे अक्सर सुंदरता, सफलता और उच्च सामाजिक स्थिति से जोड़ा जाता है। औपनिवेशिक विरासत और ऐतिहासिक पूर्वग्रहों के कारण भारतीय समाज में गोरी त्वचा को पसंद किया जाता है जबकि काले रंग को अक्सर नकारात्मक रूप से देखा जाता है। यह पसंद सिर्फ व्यक्तिगत नहीं बल्कि एक व्यापक सांस्कृतिक रूढ़िवादी सोच का हिस्सा है। रंग सुंदरता का प्रतीक है। विवाहों में गोरी त्वचा को अत्यधिक प्राथमिकता दी जाती है और इसके लिए कई उत्पाद और प्रथाएं मौजूद हैं। हर कोई गोरी दुल्हन चाहता है। इतना ही नहीं शादीशुदा जोड़ें बच्चों का रंग भी गोरा ही चाहते हैं। औपनिवेशिक शासन (ब्रिटिश काल) से भी पहले से मौजूद है, जो आर्यों और द्रविड़ों के समय से चली आ रही है, जहां गोरे रंग को कुलीन माना जाता था। विस्तृत शृंखला है लेकिन पंजाब, हिमाचल प्रदेश और हरियाणा जैसे उत्तर-पश्चिमी राज्यों में गोरी त्वचा के लोग अधिक आम हैं। भारतीय मीडिया, फिल्मों और गानों में अक्सर गोरी त्वचा को “दीवाना” या आकर्षक बताया जाता है। जो इस सोच को और मजबूत करता है। हालांकि, अब युवा पीढ़ी में इस सोच को बदलने की कोशिश हो रही है। लोग रंग के बजाय व्यक्तित्व और गुणों को महत्व दे रहे हैं लेकिन ‘गोरापन’ का आकर्षण अभी भी बना हुआ है। मानसिकता के खिलाफ जागरूकता बढ़ रही है। कई लोग और विज्ञापन अब “रंगभेद” के खिलाफ आवाज उठा रहे हैं और गोरी त्वचा को ही एकमात्र सुंदरता का पैमाना मानने से इन्कार कर रहे हैं। दुनियाभर में सांवले रंग के लोग भी शीर्ष ऊंचाइयों को छू रहे हैं। चमड़ी के रंग का टैलेंट से कोई संबंध नहीं है। अगर आप में प्रतिभा है तो आप दुनिया में अपना नाम रोशन कर सकते हैं। आज समाज का कोई भी क्षेत्र हो चाहे उद्योगजगत हो, व्यापार हो, स्टार्टअप हो, शिक्षा का क्षेत्र हो सांवले रंग के लोग अपनी प्रतिभा का ​सिक्का जमा रहे हैं। यह खुशी की बात है कि फैशन की दुनिया में भी मानसिकता काफी हद तक बदल चुकी है। भविता मांडवा भारत की दूसरी ऐसी महिला हैं जिन्हें ब्रिटिश वोग मैगजीन में जगह मिली है। भविता मांडवा की यह उपलब्धि इतिहास रचने की भांति हैं। इसकी वजह यह है कि भविता मांडवा दूसरी ऐसी भारतीय हैं, जिन्होंने भारतीय सौंदर्य यानी डस्की स्किन टोन के साथ यह अवसर प्राप्त किया है। ये वो लड़की है जिसने फैशन इंडस्ट्री में ब्यूटी स्टैंडर्ड्स को फिर से डिफाइन करने का काम किया है। उनसे पहले प्रियंका चोपड़ा ने यह इतिहास बनाया था और प्रियंका चोपड़ा भी भारत के डस्की टोन की मल्लिका हैं। भविता मांडवा एक तेलुगू परिवार में जन्मी युवती हैं। 25 साल की 5 फुट 9 इंच लंबी इस माॅडल का बचपन हैदराबाद में गुजरा है। उन्होंने हैदराबाद के जवाहरलाल नेहरू प्रौद्योगिकी विश्वविश्वविद्यालय से आर्किटेक्चर में ग्रेजुएशन किया है। उसके बाद उन्होंने न्यूयार्क में आगे की पढ़ाई की है। उसी दौरान भविता की पहचान डिजाइनर मैथ्यू ब्लेजी से हुई और भविता को 2025 के स्प्रिंग/समर शो में विशेष माॅडल के रूप में रैंप वाॅक करने का मौका मिला। इसके बाद भविता मंडावा मेटियर्स डीआर्ट 2026 शनेल फैशन शो को ओपन करने वाली माॅडल बनीं।
भविता ने अपने इंटरव्यू में यह कहा है कि शैनेल फैशन शो की ओपनिंग मेरे लिए बहुत ही खास थी। पश्चिम के देशों में मेरी इस उपलब्धि ने इस आइडिया को जन्म दिया कि क्या भारतीय महिलाओं को ट्रेडिशनल रूप में सुंदर माना जा सकता है? भारत में रंगभेद हावी है इससे इन्कार नहीं किया जा सकता और सुंदरता का पहला मापदंड ही यही है कि लड़की को गोरी होना चाहिए। वैसी दुनिया में भविता मांडवा की एचीवमेंट बहुत ही मायने रखती है। वोग की पत्रिका पर भविता मांडवा से पहले भी कई डस्की स्किन वाली लड़कियों ने जगह बनाई है लेकिन उनकी संख्या बहुत सीमित है, जिनमें प्रियंका चोपड़ा भी एक हैं। उन्होंने कहा, “सांवली लड़कियां खुद को देखा हुआ महसूस करती हैं,” यह जोर देते हुए कि उनकी सफलता सिर्फ व्यक्तिगत नहीं बल्कि सामूहिक है। अपनी भारतीय पहचान और प्राकृतिक विशेषताओं को अपनाकर, वह एक ऐसे उद्योग में समावेशिता की दिशा में एक व्यापक बदलाव का प्रतिनिधित्व करती हैं जिसने अक्सर विविध आवाजों को हाशिए पर रखा है। जहां चोपड़ा ने बॉलीवुड और हॉलीवुड की चकाचौंध को कवर पर पेश किया, वहीं मंडावा एक नई पीढ़ी का प्रतिनिधित्व करती हैं जो शैक्षणिक उपलब्धि, डिजाइन में नवाचार और रैंप पर प्रभुत्व का संगम है। अपनी बुद्धिमत्ता, कलात्मकता और रैंप पर दमदार उपस्थिति के अनूठे मेल के साथ वह अंतर्राष्ट्रीय फैशन जगत में एक अहम नाम बनने के लिए तैयार हैं। उद्योग जगत के जानकार उन्हें मैथ्यू ब्लेज़ी जैसे डिज़ाइनरों के लिए प्रेरणास्रोत मानते हैं और कई क्षेत्रों में एक साथ काम करने की उनकी क्षमता उन्हें अपने साथियों से अलग करती है। भू-राजनीतिक तनाव के कारण, ब्रांड्स अब केवल लागत कम करने के बजाय लचीली और अनुकूलन आपूर्ति शृंखलाओं को प्राथमिकता दे रहे हैं, ताकि वैश्विक झटकों का सामना किया जा सके। वैश्विक फैशन में अब केवल पश्चिमी मानकों का अनुकरण नहीं किया जा रहा है, बल्कि भारतीय जैसे घरेलू परिधान और औपचारिक उपदेश तंत्र को महत्व मिल रहा है।
भविता मांडवा भारतीय मॉडल युवतियों के लिए आदर्श बन सकती है। भारत में भी गोरी त्वचा के प्रति यह जुनून धीरे-धीरे बदल रहा है लेकिन अभी भी यह समाज में एक मजबूत धारणा के रूप में मौजूद है।

Aakash Chopra