रेखा सरकार का दिल से आभार

Summary :

राष्ट्र के प्रति समर्पित रहना और देश के लिए सदा कुछ करने को तत्पर रहना ये काम जो करते हैं वो एक अलग ही जज्बा रखते हैं। उनके योगदान को याद करते हुए जब सरकारें उन्हें सम्मान देती हैं तो सही मायनों में ये गौरव के पल होते हैं। इन गौरवपूर्ण पलों को आप इतिहास भी कह सकते हैं। आजादी की लड़ाई से लेकर आज के दौर तक अगर पत्रकारिता को देखा जाए तो अनेक हस्तियों ने अपना अमूल्य योगदान दिया है। इस कड़ी में अभी दो दिन पहले ही दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने एक महत्वपूर्ण फैसले के…

राष्ट्र के प्रति समर्पित रहना और देश के लिए सदा कुछ करने को तत्पर रहना ये काम जो करते हैं वो एक अलग ही जज्बा रखते हैं। उनके योगदान को याद करते हुए जब सरकारें उन्हें सम्मान देती हैं तो सही मायनों में ये गौरव के पल होते हैं। इन गौरवपूर्ण पलों को आप इतिहास भी कह सकते हैं। आजादी की लड़ाई से लेकर आज के दौर तक अगर पत्रकारिता को देखा जाए तो अनेक हस्तियों ने अपना अमूल्य योगदान दिया है। इस कड़ी में अभी दो दिन पहले ही दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने एक महत्वपूर्ण फैसले के तहत पश्चिमी दिल्ली के रिंग रोड स्थित व्यस्त चौराहों में से एक ब्रिटानिया चौक (जो सिर्फ ब्रिटेनिया फैक्ट्री के नजदीक होने पर नाम था) को दैनिक पंजाब केसरी के संपादक स्व. श्री अश्विनी चोपड़ा ‘मिन्ना’ के नाम पर समर्पित कर दिया। यह पंजाब केसरी परिवार के लिए गौरवपूर्ण पल के साथ-साथ भावुक क्षण भी था कि जब यह समारोह चल रहा था तो उस समय मैं इतनी भावुक हो गई थी कि श्री अश्विनी मिन्ना के साथ पूरा जीवन एक फिल्म की तरह स्मृतियों में आंखों से गुजरने लगा।
एक ऐसा व्यक्तित्व जो कालेज के दिनों के बाद से ही बैट और गेंद के दम पर क्रिकेट की दुनिया में अलग पहचान बनाता हुआ आगे बढ़ रहा था कि तभी ऐसा हादसा हुआ कि इमरजेंसी के बाद कलम थाम ली, परिवार ने ट्रैक्टर के साथ अखबार चलाई और लाला जगत नारायण जी की 1981 में शहादत के बाद अश्विनी चोपड़ा जी ने कलम थाम ली। इसी कड़ी में जब वह निर्भीक कलम के दम पर हर तरफ अपना लोहा मनवा रहे थे तभी उनके पिता श्री रमेश चन्द्र जी भी 1984 में आतंकवादियों द्वारा शहीद कर दिए गए। इसके बाद सिर्फ कलम ही उनका जीवन था, राष्ट्र के लिए, राष्ट्र के सम्मान के लिए सब कुछ सच लिखना और सच के सिवा कुछ न लिखना इस उद्देश्य को लेकर एक उभरता क्रिकेटर देश का टॉप सम्पादक बन चुका था। ऐसे में मैं रेखा गुप्ता सरकार के प्रति आभार व्य​क्त करती हूं जिसने एक चौक का नाम अश्विनी जी के नाम पर कर दिया तो सचमुच यह किसी के लिए प्रेरणादायी बन जाता है। रेखा गुप्ता सरकार और उनकी पूरी कैबिनेट इस व्यापक सोच के लिए बधाई की पात्र है। साथ उपराज्यपाल सरदार तरणजीत सिंह संधू का तहे दिल से धन्यवाद, ​जिन्होंने इसका उद्घाटन रेखा गुप्ता के साथ ​किया।
दरअसल आज के समय में पत्रकारिता कलम के दौर से डिजिटल तक जा पहुंची है। मैंने अपने जीवन में अश्विनी जी को सदा सकारात्मक सोच के साथ काम करते हुए पाया। वह कहते थे कि पत्रकार लोकतंत्र का वास्तव में चौथा स्तम्भ होते हैं। इसलिए मैं केवल सच और बिना किसी डर के लिखता हूं, उनकी यह बात मुझे आज भी याद ​है कि किस प्रकार फोन पर बार-बार आने वाली धमकियों की परवाह नहीं करते थे। अक्सर मुझे कहा करते थे कि जो मेरी आलोचना करते हैं मैं उन्हें भी प्रमुखता से अखबार में छापता हूं। यह बात सरकारें और विपक्षी पार्टियां अच्छी तरह से समझती हैं। अगर मैं उनको कुछ बोलने के लिए मना करती थी तो स्टेज पर से बोल देते थे कि किरण ने मुझे यह बोलने पर मना किया है, पर मैं बोलूंगा, उनकी सच्चाई, सफाई, निर्भीक पत्रकारिता के साथ उन्हें आज भी उनके संसदीय क्षेत्र में लोग याद करते हैं, मुझे बुलाते हैं, परन्तु अभी जिन गलियों में, गांवों में मैंने अश्विनी जी के साथ काम किया वहां जाने पर पांव कांपते हैं।
मुख्यमंत्री श्रीमती रेखा गुप्ता से कई बार बातचीत होती थी जिसका सार यह होता था कि जनता और शासन के बीच संवाद के सेतु का काम करने वाले पत्रकारों, सम्पादक के नाम पर सार्वजनिक स्थलों के नाम होने चाहिए। मुझे इस बात की खुशी है कि रेखा गुप्ता जी ने इस महत्वपूर्ण तथ्य को समझा और निभाया। जो ​कुछ मिन्ना जी मुझ से विशेषकर पत्रकारिता के बारे में जो बात करते उसका हूबहू उदाहरण हमारे अखबार में दिखाई भी देता है। मुझे इस बात की खुशी है कि पत्रकारिता के मामले में जब मैं सम्पादक की भूमिका निभा रहे आदित्य नारायण, अर्जुन और आकाश से बात करती हूं तो उनका भी दृष्टिकोण स्पष्ट होता है कि जनहित के लिए हम हमेशा सच्चाई की राह पर ही चलकर काम करते रहेंगे। मेेरा मानना है कि पंजाब केसरी के प्रति दिल्ली सरकार के इस सम्मान से लोकतांत्रिक संस्कृति ही मजबूत होगी।
दो दिन पहले जब यह समारोह हुआ तो अनेक बड़ी हस्तियां और क्षेत्र के लोगों का हुजूम वहां उमड़ रहा था यह सच्चे पत्रकार के प्रति सच्चा सम्मान था। ऐसे सम्मान सचमुच समाज के लिए बहुत ही प्रेरणादायक होते हैं। अनेक लोग मुझसे बातचीत करते हुए पत्रकारिता की राह पर चलने के लिए टिप्स भी मांगते हैं, हमारी कोशिश आज भी यही है कि पत्रकारिता के प्रति नैतिकता जरूर निभाई जाए। रेखा गुप्ता सरकार का यह सम्मान अन्य राज्यों में एक अच्छा संदेश देगा। मुझे याद है कि सन् 1994 में जब दिल्ली में श्री मदन लाल खुराना के नेतृत्व में भाजपा की सरकार थी तो हमारे कार्यालय के पास ही शहीद शिरोमणि लाला जगत नारायण और अमर शहीद रमेश चन्द्र जी के नाम पर मार्ग और चौक के नाम रखे गए थे। यह सचमुच एक सम्मान की परम्परा थी। इस चौक पर हमने अश्विनी जी की फोटो लगाकर पेन की नींव जो कलम की तरह है उसे विशेष रूप से बनाया है और उसे हमारे आफिस के प्रसिद्ध ग्राफिक डिजाइनर उपेन्द्र ने डिजाइन किया है।
इस दृष्टिकोण से रेखा गुप्ता सरकार सम्पादकों के योगदान को समझती हैं और फिर सम्मान भी करती हैं। हालांकि इस कड़ी में पत्रकारिता के पुराने दिग्गज गणेश शंकर विद्यार्थी और कुलदीप नैय्यर के नाम पर सभागारों के नाम भी हैं लेकिन मिन्ना जी के नाम पर यह सम्मान पंजाब केसरी के नाम करते हुए दिल्ली सरकार ने एक उदाहरणीय काम किया है जिस पर हमें नाज है। पंजाब केसरी परिवार भी यह संकल्प लेता है कि हम भी पत्रकारिता के तमाम मूल्यों की रक्षा करते हुए नैतिक कर्त्तव्य निभाएंगे, सच की राह पर चलेंगे और निर्भीक अंदाज के साथ बिना ​किसी पक्षपात के पत्रकारिता का धर्म निभाएंगे।
आखिर में मैं फिर से रेखा सरकार का तहे दिल से धन्यवाद करती हूं और विशेषकर सीएम रेखा गुप्ता जी का, जिन्होंने पल-पल की खबर रखी और मंत्री प्रवेश वर्मा ने अपनी पूरी पी.डब्ल्यू.डी. टीम को लगाया हुआ था। मुझसे स्थानीय पार्षद और विधायक ने वायदा ​किया है कि वह चौक की मैंटेनेंस जिम्मेदारी से निभाएंगे। अगर ऐसे ही रेखा सरकार काम करती रही और उनकी टीम मैंटेनेंस और सफाई रखेगी तो दिल्ली निश्चय ही साफ-सुथरी बन जाएगी।

Kiran Chopra