परिन्दों की मौत से खौफ में इंसान

Summary :

अभी हम कोरोना वायरस के संक्रमण से उबरे भी नहीं हैं कि बर्ड फ्लू की दस्तक ने लोगों में खौफ पैदा कर दिया है।

अभी हम कोरोना वायरस के संक्रमण से उबरे भी नहीं हैं कि बर्ड फ्लू की दस्तक ने लोगों में खौफ पैदा कर दिया है। बर्ड फ्लू का फैलना कोई नया नहीं है, लेकिन चिंता की वजह यह है कि यह वायरस पक्षियों के साथ जानवरों और मनुष्यों को संक्रमित कर सकता है।
बर्ड फ्लू का पहला मामला 1997 में सामने आया था और तब से इससे संक्रमित होने वाले 60 फीसदी लोगों की जान जा चुकी है। लेकिन यह वायरस इंसानी फ्लू से अलग मनुष्य से दूसरे मनुष्य में आसानी से नहीं फैलता है। वैज्ञानिकों का मानना है कि बर्ड फ्लू या एवियन इंफलूएजा एक वायरल इन्फेेक्शन है, जो पक्षियों से पक्षियों में फैलता है।
यह ज्यादातर पक्षियों में फैलता है और जानलेवा साबित होता है। एच 5 एन 1 या एच 7 तरह के जितने भी बर्ड इन फ्लूएंजा होते हैं, वे प्राकृतिक रूप से पैदा होते हैं। पर्यावरण की वजह से जिन पक्षियों में रोग प्रतिरोधक क्षमता घट जाती है, उनमें यह वायरस पनप सकता है।
शुरूआती तौर पर राजस्थान के झालावाड़ इलाके में बड़ी संख्या में कौवों और प्रवासी पक्षियों के मरने की खबरें आई थी, जिनकी जांच में वायरस की पुष्टि हुई। उसके बाद तो केरल, हिमाचल, मध्य प्रदेश, हरियाणा, गुजरात में मुर्गियों, बत्तखों तथा अन्य पक्षियों के मरने की खबरें आने लगीं। यह वायरस कैसे फैलना शुरू हुआ, इस संबंध में साफ तौर पर नहीं कहा जा सकता। सर्दियों के दिनों में बड़ी संख्या में बाहर से प्रवासी पक्षी आते हैं और कहा जा रहा है कि वायरस बाहर से आए हुए कौवों के जरिये फैला है।
जापान में भी कोराेना महामारी के बीच बर्ड फ्लू का प्रकोप छाया हुआ है, जिसके चलते वहां अब तक 23 लाख से ज्यादा मुर्गियों और बत्तखों को मारा जा चुका है। जापान में बर्ड फ्लू 8 राज्यों में फैला हुआ है। अब तक 23 लाख मुर्गियों को मारे जाने से 2010 का रिकार्ड भी टूट गया है।
2010 में बर्ड फ्लू के कारण 18.3 लाख पक्षियों को मारा गया था। यह घातक फ्लू यूरोप में भी तेजी से फैल रहा है। केरल में बर्ड फ्लू को आपदा घोषित कर दिया गया और अन्य राज्यों में भी मुर्गियों, बत्तखों और कौवों को मारने का सिलसिला शुरू हो चुका है। दो लाख से ज्यादा पक्षी मर चुके हैं और अब पता नहीं कितने पक्षी और मारे जाएंगे। कोरोना का संकट झेल रहे देश के लिए एक और खतरे की घंटी बज रही है।
देश पहले ही आर्थिक चुनौतियां झेल रहा है, लॉकडाउन के चलते पहले से ही बेरोजगारी फैली हुई है। उद्योग धंधे अभी भी सामान्य नहीं हुए हैं। लोग अभी सम्भल ही नहीं पा रहे कि नए वायरस का हमला हो गया है। सबसे बड़ी चिंता तो पोल्ट्री उद्योग की है। पोल्ट्री उद्योग बंद किए जा रहे हैं।
देशभर में मुर्गा मंडियों में लाखों रुपए का व्यापार होता है। उनके ठप्प होने का खतरा पैदा हो गया है। मुर्गों और अंडों की बिक्री प्रभावित होने लगी है क्योंकि बर्ड फ्लू की खबरें आने के बाद लोगों ने चिकन और अंडे खाना बंद करने लगे हैं। जो लोग मुर्गे पालन पोषण करते  हैं, उनको भी नुक्सान होना  तय है। मुर्गों का दाम गिरने से उनका तो खर्च ही नहीं निकल पाएगा।
राज्य सरकारों और स्थानीय प्रशासन लगातार सलाह दे रहा है कि मुर्गी, बत्तख, मछली और इनसे जुड़े उत्पादों मसलन अंडे और मांस के सेवन से परहेज करें, मरे हुए पक्षियों को छुएं नहीं। हर जगह प्रशासन संक्रमित इलाकों में मरे पक्षियों का सुरक्षित तरीके से निस्तारण कर रहा है।
हरियाणा में तो मुर्गियों में आरडी की बीमारी के लक्षण नजर आ रहे हैं। इस बीमारी से मुर्गियों का एक पैर आगे आैर एक पीछे की तरफ चला जाता है। मुर्गियों की गर्दन अकड़ जाती है। ऐसा होने पर कुछ देर बाद मुर्गियां मरने लगती हैं। लेकिन अब इसकी वैक्सीन भी आ चुकी है।
मुर्गियों को दवाई भी दी जाती है और मुर्गियों को दस से पन्द्रह दिन तक मोल्डिंग पर रखा जाता है। बर्ड फ्लू का वायरस भी नाक, कान और मुंह से सांस के जरिये मनुष्य में फैलता है। इस संक्रमण के होने पर नाक बहने, सांस लेने में दिक्कत, कफ बनने और गले में सूजन और पेट दर्द की शिकायत रहती है।
अच्छी बात तो यह है कि संक्रमण होने पर उपचार के लिए जरूरी दवाएं उपलब्ध हैं। कोरोना महामारी के बीच बर्ड फ्लू पर काबू पाने के लिए सतर्कता की जरूरत सामान्य वर्षों से कहीं ज्यादा है। कोराेना वायरस की तरह एच-5 एन-I का वायरस भी 1996 में चीन में पाया गया था।
इससे एक हंस संक्रमित हुआ था। यही वायरस इंसानों में 1997 में हांगकांग में पाया गया था। 2013 में चीन में इंसानों से इंसानों को बर्ड फ्लू होने का पहला मामला सामने आया था। अगर इंसान को बर्ड फ्लू हो जाए तो उसके इलाज के लिए कई तरीके मौजूद हैं, लेकिन इसके बचाव के लिए सबसे अच्छा तरीका प्रभावित इलाकों से दूर रहना और साफ-सफाई का विशेष ध्यान रखना ही है।
सबसे पहले कोरोना भी केरल में आया था और अब बर्ड फ्लू प्रकोप फैला हुआ है। कोरोना की तरह बर्ड फ्लू से भी डरना जरूरी है। ऐसा लगता है परमात्मा हम सबकी परीक्षा ले रहा है। अगर कोरोना की वैक्सीन आ गई तो परिन्दों की मौत ने हमें नई चिंता में डाल ​दिया है। प्रकृति अपना खेल खेलती है और मानव अपना। प्रकृति से जितनी छेड़छाड़ मानव ने की है, उतनी किसी और ने नहीं की और प्रकृति समय-समय पर अपना हिसाब बराबर कर लेती है।
-आदित्य नारायण चोपड़ा

Aditya Chopra

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