भारत-ब्राजील : विन विन डील

Summary :

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के टैरिफ को वहां की सुप्रीम कोर्ट द्वारा गैरकानूनी करार ​दिए जाने और उसके बाद ट्रंप द्वारा 10 प्रतिशत की बजाय 15 प्रतिशत ग्लोबल टैरिफ लगाए जाने से पैदा हुई व्यापार अनि​ि​श्चतता के बीच भारत और ब्राजील ने ट्रेड डील पर हस्ताक्षर कर दिए हैं। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और ब्राजील के राष्ट्रपति लूला डी सिल्वा में गर्मजोशी में हुई बातचीत के बाद दोनों देशों में क्रिटीकल मिनरल्स और रेचर अर्थ एलिमैंट्स, व्यापार निवेश, रक्षा, ऊर्जा प्रौद्योगिकी तथा बहुपक्षीय मंचों पर सहयोग बढ़ाने संबंधी समझौतों पर हस्ताक्षर हुए। ब्राजील के राष्ट्रपति ए.आई. समिट में भाग लेने भारत…

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के टैरिफ को वहां की सुप्रीम कोर्ट द्वारा गैरकानूनी करार ​दिए जाने और उसके बाद ट्रंप द्वारा 10 प्रतिशत की बजाय 15 प्रतिशत ग्लोबल टैरिफ लगाए जाने से पैदा हुई व्यापार अनि​ि​श्चतता के बीच भारत और ब्राजील ने ट्रेड डील पर हस्ताक्षर कर दिए हैं। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और ब्राजील के राष्ट्रपति लूला डी सिल्वा में गर्मजोशी में हुई बातचीत के बाद दोनों देशों में क्रिटीकल मिनरल्स और रेचर अर्थ एलिमैंट्स, व्यापार निवेश, रक्षा, ऊर्जा प्रौद्योगिकी तथा बहुपक्षीय मंचों पर सहयोग बढ़ाने संबंधी समझौतों पर हस्ताक्षर हुए। ब्राजील के राष्ट्रपति ए.आई. समिट में भाग लेने भारत आए हुए थे। इन समझौतों से एक दिन पहले भारत-अमेरिका के नेतृत्व वाले समूह पैक्स सिलिका में भी शामिल हुआ। जो सेमीकंडक्टर और रेयर अर्थ की सप्लाई को सुनिश्चित करने का लक्ष्य पूरा करेगा। भारत अमेरिका से ट्रेड वार्ता के परिणामों की परवाह न करते हुए अपने लिए मार्ग प्रशस्त कर ​रहा है। केन्द्र सरकार लगातार भारत के लिए नए बाजार तलाश करने में सफल रही है ताकि अमेरिकी टैरिफ के दुष्प्रभावों का सामना किया जा सके। भारत और ब्राजील में क्रिटिकल मिनरल्स और रेयर अर्थ एलिमैंट्स समझौता रणनीतिक गेम चेंजर के तौर पर देखा जा सकता है। दुनिया तेजी से इलैक्ट्रिक व्हीकल, ग्रीन एनर्जी और आर्टिफिशियल इंटैलीजैंस की ओर बढ़ रही है। इन सभी सैर्क्ट्स की रीढ़ है लीथियम और रेयर अर्थ। ली​थियम और दुर्लभ खनिजों की सप्लाई पर चीन का दबदबा है। यह सझौता सिर्फ व्यापारिक डील नहीं बल्कि सप्लाई चेन की नई भू-राजनीतिक का संकेत है। समुंदर पार से आने वाले संसाधन भारत की औद्योगिकी और तकनीकी प्रगति को नई गति दे सकते हैं। भारत चीन के वर्चस्व को खत्म करने के लिए आगे बढ़ रहा है। यह दोनों देशों के लिए विन विन डील की तरह है। भारत ब्राजील डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर के लिए सैंटर स्थापित करने के लिए पहले ही काम कर रहा है। दोनों देशों ने 2030 तक अपने द्विपक्षीय व्यापार को 20 अरब डालर के पूर्व लक्ष्य से बढ़ाकर 30 अरब डॉलर करने पर सहमति जताई है। भारतीय कम्पनियां ब्राजील में निवेश के अवसर तलाश सकती हैं। वहीं ब्राजील भारत के बड़े बाजार और तकनीकी सहयोग से लाभ उठाना चाहता है। दोनों कच्चे माल के निर्यातक बनने के बजाय वेल्यू एडीशन और मैन्यु​फैक्चरिंग में साझेदारी पर जोर दे रहे हैं। लूला डी सिल्वा 260 व्यावसायियों के साथ भारत पहुंचे हैं। इससे साफ है कि यह दौरा कूटनीतिक ही नहीं बल्कि आर्थिक दृष्टि से भी
अहम है।
भारत और ब्राजील ब्रिक्स समूह के संस्थापक देश हैं। इस समूह में रूस, चीन और साउथ अफ्रीका भी शामिल हैं। वर्ष 2024 में इस समूह का विस्तार हुआ और इसमें मिस्र, इथोपिया, ईरान, सऊदी अरब और यूएई शामिल हुए। ब्रिक्स को चीन के दबदबे वाला समूह माना जाता है। चीन, रूस और ईरान खुलकर पश्चिम विरोधी बातें करते हैं। दूसरी तरफ सऊदी अरब, यूएई और मिस्र पश्चिम और चीन के बीच संतुलन बनाकर रखते हैं। सभी ब्रिक्स देशों में भारत एकमात्र ऐसा देश है जो पश्चिम से रणनीतिक साझेदारी मजबूत कर रहा है और चीन से तनावपूर्ण संबंधों के चलते भी संतुलन बनाए हुए हैं। महत्वपूर्ण मुद्दों पर भारत और ब्राजील के​ विचार समान हैं। दोनों ही विकासशील देश एक जीवंत लोकतंत्र होने के नाते बहुध्रुवीय विश्व का समर्थन करते हैं। ब्राजील के राष्ट्रपति अमेरिका की मनमानी का कड़ा विरोध करते आए हैं। सबसे पहले ब्रिक्स मुद्रा का सुझाव भी उन्होंने ही ​िदया था। ब्रिक्स द्वारा अपनी मुद्रा चलाये जाने के प्रस्ताव मात्र से ही ट्रंप परेशान हो उठे थे। उन्हें लगता था कि अगर ऐसी कोई नई मुद्रा आ गई तो डॉलर का महत्व कम हो सकता है। हालांकि ब्रिक्स मुद्रा का प्रस्ताव आगे नहीं बढ़ पाया। दोनों देश ऐसी विश्व व्यवस्था चाहते हैं कि एक या दो महाशक्तियों के नियंत्रण में न हो, बल्कि उभरती हुई अर्थव्यवस्थाओं को समान महत्व मिले। भारत की ही तरह ब्राजील भी अंतर्राष्ट्रीय मामलों में किसी एक गुट के साथ बंधने की बजाए राष्ट्रपति हितों को प्राथमिकता देता है। दोनों देश ब्रिक्स के अलावा जी-20, जी-4 जैसे मंचों पर मिलकर संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में सुधार के लिए आवाज बुलंद करते रहे हैं।
दोनों देश पुराने इतिहास के आधार पर स्वयं में कई आर्थिक, राजनीतिक, सांस्कृतिक और सामाजिक ढांचे से जुड़े हुए हैं। ल​ेटिन अमेरिका और कैरेबियन क्षेत्र में ब्राजील भारत के लिए सबसे महत्वपूर्ण व्यापारिक साझेदारी में से एक है। भारतीय उद्यमियों ने ब्राजील के आईटी औषधि, विज्ञान, ऊर्जा, कृषि, खनन और इंजीनियरिंग क्षेत्र में निवेश किया हुआ है। ब्राजील के उद्यमियों ने भी भारत के ऑटोमोबाइल, ऊर्जा और जैव रसायन में निवेश किया हुआ है। भारत और ब्राजील में रक्षा सहयोग के लिए वर्ष 2003 में हस्ताक्षर किए गये थे। उसके बाद से ही दोनों देशों के रक्षा संंबंधों का विस्तार होता गया। ब्राजील में भारत की संस्कृति, धर्म, कला और दर्शन को लेकर काफी रुचि है। पूरे ब्राजील में योग सिखाने वाले कई संगठन हैं। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और लूला डी सिल्वा के बीच व्यक्तिगत संबंध बहुत अच्छे हैं। दोनों की मैत्री बहुपक्षवाद और शांति के समर्थक हैं। ब्राजील के राष्ट्रपति द्वारा पहलगाम में आतंकी हमले की निंदा करना अपने आप में महत्वपूर्ण है। पिछले वर्ष जब प्रधानमंत्री मोदी ब्राजील गए थे तो उन्हें ब्राजील का सर्वोच्च नागरिक सम्मान दिया गया था। दोनों देश अब नेचुरल पार्टनर हैं। इसी वर्ष वह ब्रिक्स की अध्यक्षता भारत को सौंपेगा। आने वाले वर्षों में दोनों संबंधों को नई ऊंचाई देंगे। दोनों देश ग्लोबल साऊथ को मबजूत बनाएंगे ताकि दुनिया की दो महाशक्तियों के बीच किसी नए शीत युद्ध जैसी स्थि​ित न पैदा हो।

Aditya Chopra

Aditya Chopra is well known for his phenomenal viral articles.