यह बात जगजाहिर है कि 2014 में देश इंडिया से भारत बन चुका है, जिसकी एक ही विचारधारा, एक ही संस्कृति, एक ही भाषा और बहुत कुछ एक ही है। इस भारत के नेता गांधी, नेहरू आजाद नहीं हैं, बल्कि हेडगेवार, गोलवारकर, वीर सावरकर, श्यामा प्रसाद मुखर्जी और दीनदयाल उपाध्याय हैं, क्योंकि यह एक हिंदू राष्ट्र है, जो सेक्युलर है, धर्म से नहीं, बल्कि संस्कृति से। पिछली सरकारों की तुलना में धर्म निरपेक्षता का सही तथ्य इस सरकार में है, क्योंकि हिंदुत्व की विशेष बात यह है कि इसमें सभी आस्थाओं का पहले से बेहतर संरक्षण और नेतृत्व है। आजादी के बाद से ही भारत सांस्कृतिक सेक्युलर राष्ट्र बन चुका है। आज के भारत में हर भारतीय हिंदू है, धार्मिक अथवा सामाजिक रूप से नहीं, बल्कि संस्कृति रूप से, क्योंकि उसका डीएनए एक है, भले ही धर्म कोई भी हो।
इसमें धर्मनिरपेक्षता का अर्थ तुष्टिकरण नहीं बल्कि संतुष्टिकरण है। मुस्लिमों को आरक्षण का झुनझुना बजाते बजाते उनके हाथों में भीख का प्याला थमा दिया गया। हाल ही में अभी बिहार का, जो कि भारत का दूसरा सबसे बड़ा प्रांत है, चुनाव संपन्न हुआ, जिसके नतीजे में साफ नजर आया कि भाजपा या एनडीए ने वोटरों के मन-मस्तिष्क पर जबरदस्त वर्चस्व बना लिया है, जिन में एक अच्छी-खासी संख्या मुस्लिमों की है। 90 के दशक में जो मंडल, मंदिर की राजनीति चलाई गई, इसका प्रभाव यह हुआ कि कांग्रेस धराशायी हो गई और सेक्युलर राजनीति का तीया-पांचा हो गया। अब उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, राजस्थान और गुजरात के पश्चात जो ताबड़तोड़ विजय श्री भाजपा को बिहार में प्राप्त हुई है, उस से निश्चय ही भाजपा और संघ का मनोबल बढ़ा है।
नेहरू, इंदिरा के समय का वोट बिखर गया और मुस्लिम वोट बैंक, दलित आदि जो सेक्युलर सरकारें आती थीं उनका तोड़ भाजपा और संघ ने मिलकर ऐसा करा कि हिंदुत्व का दौर-दौरा हो गया और बिहार के बाद अब बंगाल में भी भाजपा के झंडे गाड़ने की बात पक्की दिखाई दे रही है। यदि यह कहा जाए कि अब भाजपा का जादू भारत के वोटर के सिर चढ़ कर बोल रहा है तो अतिशयोक्ति न होगी। पिछले कई वर्ष से विपक्ष एक पटल पर आने की नाकाम कोशिश में लगा है। भाजपा और संघ ने बिहार के सटीक चुनाव में विपक्ष और वामपंथी के साथ ऐसा खेला किया है कि उसके गुब्बारे की फूंक निकल चुकी है। यदि यह तीसरा मोर्चा स्वयं को सियासी बाजार में बचाए रखना चाहता है तो उसे बड़ा कठिन परिश्रम करना होगा।
प्रधानमंत्री भारतीय जनता को इस बात का विश्वास दिला चुके हैं कि भारत में अब हिंदुओं का राज शताब्दियों तक दबे-कुचले रहने के बाद आया है। यह बात भाजपा वोटर के मस्तिष्क में बैठ चुकी है कि अब तक हिंदुओं को अंग्रेजों और अल्पसंख्यकों द्वारा क्लासरूम की पिछली सीटों पर बिठाया जाता था, मगर अब उनका समय आया है। जहां तक हिंदू वोट को एक मत बनाने की कला में मोदी जी दक्ष हैं, वहां इस बात में भी दम है कि कांग्रेस ने हिंदू विचारधारा को हाशिए पर रखा। चूंकि एक सामान्य हिंदू अपनी जड़ों से जुड़ा है, उस के अंदर जो आत्मविश्वास मोदी जी ने जगाया है, वह कांग्रेस और विपक्ष अपनी छह दशकों की सरकारों में नहीं कर पाई। कोई अजब नहीं कि आने वाले चुनावों में भाजपा का डंका न बजे। कांग्रेस ऑक्सीजन पर है और वामपंथ एक हवा-हवाई हो गया है। वैसे भी विश्व में अब दाएं बाजू की राजनीति का वर्चस्व है। जनता देख रही है कि किस प्रकार से मोदी जी, ट्रंप, पुतिन, किंग सलमान आदि को सहजता से शीशे में उतार रहे हैं।
आज गठबंधन का जनाजा इसलिए निकला क्योंकि अब न नरेंद्र मोदी की टक्कर का कोई नेता किसी दल में है और न ही चुनाव जीतने कर लिए जमीन पर वह कुशलता, जो पन्ना प्रकोष्ठ या पन्ना इंचार्ज की अमित शाह जैसी प्लानिंग बनाने वाला। राहुल गांधी, अखिलेश यादव, तेजस्वी यादव, केजरीवाल, ममता, माया आदि सभी मोदी जी के आगे फीके पड़ गए हैं। हजरत निजामुद्दीन औलिया और अमीर खुसरो को पीला अथवा भगवा रंग बड़ा पसंद था। हम देख रहे हैं कि हर चुनाव के बाद भगवा चादर का अर्ज बढ़ता चला जा रहा है, बावजूद इसके कि सभी राजनीतिक पार्टियां, जिस में मुस्लिम भी शामिल हैं, एड़ी- चोटी का जोर लगा चुके हैं भाजपा को पराजित करने में, मगर टांए-टांए फिस। मोदी ने यह पकड़ जोर-जबरदस्ती कर या गैर कानूनी तरीके से नहीं, अपितु जानता के दिलों पर राज कर ईमानदारी से बनाई है।
आज उत्तर प्रदेश की लगभग 20 प्रतिशत, असम की 30 प्रतिशत और बिहार की लगभग 28 प्रतिशत मुस्लिम आबादी भी भाजपा का भगवा रथ नहीं रोक सकी। बंगाल का हिंदू और कुछ हद तक मुस्लिम वोटर अब ममता दीदी के छलावों से निजात पाना चाहते हैं। आज जो मुस्लिम शोर मचा रहे हैं कि भाजपा उन्हें टिकट नहीं देती, अपने दिल में झांक कर देखें कि क्या चुनाव के समय वे पूरा जोर इस बात पर नहीं लगाते कि भाजपा के विरुद्ध जो भी जीतने की पोजीशन में हो, उसे ही जीतना है। मगर वे मुंह की खाते हैं और इससे होता यह है कि भाजपा आराम से जीत जाती है। फिर शिकायत कैसी। टिकट दे भी दिया तो तीर मार लेंगे। जब कहा जाता है कि टिकट जीतने वाले को ही दिया जाता है तो बातें सुनने को मिलती हैं। डॉ. मोहन भागवत का भी यही कहना है कि भारत हिंदू संस्कृति, अस्मिता और हिंदुत्व का राष्ट्र है, जिसका अर्थ है कि ऐसा राष्ट्र, जहां सभी धर्मों को बराबरी से सम्मान प्राप्त है और सभी की पूजा पद्धतियां सम्माननीय हैं। धर्म एक ही होता है, जिसे आप किसी भी नाम से पुकार सकते हैं, सनातन धर्म, इस्लाम, ईसाई धर्म, सिख आदि। हिंदुत्व संस्कृति धर्म नहीं बल्कि संस्कृति का आधार है। मुस्लिमों के लिए टकराव ठीक नहीं। जैसे 80 प्रतिशत हिंदू ठंडे मिजाज के हैं, ऐसे ही 20 प्रतिशत मुस्लिम भी शांति प्रिय हैं।





















