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फिर शर्मसार हुआ भारत

विदेश से भारत घूमने आई स्पेन की महिला के साथ गैंगरेप की घटना ने एक बार फिर भारत को शर्मसार किया है। महिला अपने पति के साथ झारखंड के दुमका पहुंची थी कि हैवानियत की हदें पार करते हुए 8-10 लोगों ने उसके साथ दरिन्दगी की। पीड़ित महिला अपने पति के साथ बाइक चलाते हुए दुमका अस्पताल पहुंची और खुद पुलिस को सूचित किया। यद्यपि पुलिस ने इस संबंध में 4 लोगों को गिरफ्तार कर​ लिया है लेकिन दुष्कर्म मामले ने भारत की छवि अन्तर्राष्ट्रीय पटल पर खराब की है जो देश के लिए दुर्भाग्यपूर्ण है। भारत में विदेशी पर्यटक महिलाओं से दुष्कर्म की घटनाएं काेई नई नहीं हैं। भारत की छवि दुनियाभर में रेप कैपिटल की बन चुकी है और अब विदेश में रहने वाले लोग भारत को महिलाओं के लिए सुरक्षित नहीं मानते। भारतीय संस्कृति में अतिथि देवो भवः यानि अतिथि को देव का दर्जा दिया गया है। अगर विदेशी महिला पर्यटकों से दुष्कर्म की घटनाएं होती रहीं तो इससे विदेशी पर्यटकों का भारत आना कम हो जाएगा और पर्यटन उद्योग को काफी नुक्सान होगा।
नैशनल क्राइम रिकार्ड ब्यूरो की 2023-24 की ​रिपोर्ट बताती है कि देश में बलात्कार के मामलों में इजाफा हुआ है। उदाहरण के लिए राजधानी दिल्ली को ही लेते हैं। ताजा आंकड़े दिल्ली को भारत के 19 बड़े शहरों में से सबसे असुरक्षित बता रहे हैं। निर्भया के साथ 16 दिसम्बर, 2012 को गुजरी वो खौफनाक रात आज भी इस तारीख के नाम से सिहरन पैदा करती है। सिर्फ 16 दिसम्बर ही क्यों? बेटियों के साथ रेप के बाद निर्भय हत्याओं का अंतहीन सिलसिला पहले की तरह जारी है। विदेशी पर्यटक महिलाएं तो साहसी हैं जो न्याय के लिए लड़ना जानती हैं। गोवा में 2008 में स्कॉरलैट रेप और किलिंग की घटना के बाद उसके परिजनों ने दो​िषयों को दंडित कराने के लिए भारत आकर कानून का सहारा लिया। कई मामलों में दो​िषयों को सजाएं भी हुई हैं। रेप मामलों में जमीनी हकीकत सरकारी आंकड़ों से अलग होती है क्योंकि हालात ऐसे हैं कि रेप के बाद परिजन अगर एफआईआर दर्ज कराना भी चाहते हैं तो उन्हें धमकियां दी जाती हैं। गांव आैर छोटे शहरों के मामलों को लोकलाज की वजह से छुपाया जाता है। केस दर्ज ही नहीं होता। जब मामलों का ऑफिशियल कोई रिकार्ड ही नहीं तो हम कैसे कह सकते हैं कि अन्य देेेेशों की तुलना में भारत में लड़कियां और महिलाएं सुरक्षित हैं। बेशक 8 मार्च को भारत में भी​ विश्व महिला दिवस मनाया जाएगा। लम्बे-चौड़े भाषण दिए जाएंगे। महिलाओं के सशक्तिकरण का ढिंढोरा पीटा जाएगा। जब रोजाना हैवानियत की हदें लांघी जाएंगी और महिलाओं की अस्मिता का जनाजा निकाला जाएगा तो ऐसे ​दिवस मनाने की कोई सार्थकता नहीं होगी।
आज बाबुल की गलियां ही नरक बन गई हैं। अपने रक्षक ही भक्षक बन गए हैं। बहू-बेटियां घर में ही असुरक्षित हैं, समय- समय पर ऐसे घिनौने कर्म होते हैं कि कायनात कांप उठती है कि आदमी इतने नीच काम क्यों कर रहा है। महिलाएं कहीं भी महफूज नहीं हैं। महिलाओं पर बढ़ते अत्याचार रुकने का नाम नहीं ले रहे हैं। देश में प्रतिदिन घटित हो रही वारदातों से महिलाओं की सुरक्षा पर प्रश्नचिन्ह लगता जा रहा है कि महिलाएं कहीं भी सुरक्षित नहीं हैं। इन वारदातों से हर भारतीय उद्वेलित है। सुरक्षा के दावों की पोल खुल गई है। महिलाओं की सुरक्षा के लिए पुख्ता इतंजाम करने होंगे तभी इन पर रोक लग सकती है। जघन्य व दिल दहला देने वाली दुष्कर्म की घटनाओं से जनमानस खौफजदा है। आखिर कब तक बेटियां दरिंदगी का शिकार होती रहेंगी। ऐसी वारदातें बहुत ही चिंतनीय हैं। बेखौफ दरिंदें अराजकता फैला रहे हैं। दरिंदों की दरिंदगी की वारदातें कब रुकेंगी, अपराध की तारीख बदल जाती है मगर तस्वीर नहीं बदलती।
कानून को धत्ता बताकर दरिंदे दरिंदगी का तांडव कर रहे हैं। ऐसे दुष्कर्म सामाजिक मूल्यों का पतन दर्शाते हैं कि समाज में विकृत मानसिकता के लोगों का बोलबाला होता जा रहा है। इन मामलों से इन्सानियत तार-तार हो रही है। समाज को ऐसे अापराधिक प्रवृ​ित के लोगों की पहचान करनी होगी। यदि अब भी समाज के लोगों ने इन दरिंदों को सबक नहीं सिखाया तो फिर से कोई और लड़कियां व महिलाएं दरिदों की दरिंदगी का शिकार होती रहेंगी। अब समाज को जागना होगा, दरिंदों का खात्मा करना होगा। कानून के रखवालों को भी समाज में घटित इन हादसों पर गहराई से चिंतन करना चाहिए ताकि भविष्य में ऐसे प्रकरणों पर विराम लग सके। ऐसे लोगों को समाज से बहिष्कृत करना चाहिए। अगर यह प्रवृति बढ़ गई तो हालात बेकाबू हो जाएंगे। पुलिस को भी अपने कर्त्तव्य का निर्वाह करना होगा ताकि पुलिस की छवि बरकरार रहे और समाज में ऐसे हादसे रुक सके। केंद्र सरकार को भी इन हादसों को बिना समय गंवाए रोकने के लिए कारगर कदम उठाने चाहिए ताकि देश में ऐसी वारदातों की पुनरावृति न हो सके। इनका नामोनिशन मिटाना होगा तभी बहू-बेटियां बेखौफ होकर घूम सकती हैं। हालातों को देखते हुए सरकार को प्राथमिक स्कूलों से लेकर कालेज स्तर तक की लड़कियों को आत्म रक्षा के गुर सिखाने होंगे ताकि दुरिंदों को सबक मिल सके। रेप कानूनों को व्यावहारिक रूप से लागू करना होगा तभी ऐसे अपराधों पर रोक लगेगी।

आदित्य नारायण चोपड़ा
Adityachopra@punjabkesari.com

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