पिछला सप्ताह खासतौर पर दो देशों, पाकिस्तान और ओमान के लिए परेशानी का सबब लेकर आया है। कारण यह है कि अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प की भृकुटी तनी हुई है और उन्होंने दोनों के लिए कुछ खास शर्तें रख दी हैं। मैं इसे दूसरी दृष्टि से देखता हूं, यदि मुजरा करने जाओगे तो कमर लचकेगी ही, और कमर सहलाने की जरूरत पड़ेगी। मगर जहांपनाह कमर सहलाना नहीं जानते, वो जिनको नचाते हैं उनका नाच आम दरबार में देखना पसंद करते हैं, अब नाचोगे नहीं तो वो गुस्सा होंगे ही।
कुछ लोग बेवजह कहते हैं कि ट्रम्प से जिसकी दोस्ती होती है, उसी के लिए वे परेशानी खड़ी कर देते हैं। इस मामले में मेरा नजरिया बिल्कुल अलग है, अरे भाई, क्या इस बात में कोई संदेह है कि अमेरिका दुनिया का महाबली है? शंका नहीं है ना ! तो उस लिहाज से ट्रम्प को जहांपनाह मानना ही पड़ेगा और लोग जहांपनाह की नहीं सुनेंगे तो किसकी सुनेंगे? और जहां तक ट्रम्प के तेवर का सवाल है तो वाकई वे जहांपनाह ही तो हैं। वे जब रूस और चीन की परवाह नहीं करते तो पाकिस्तान और ओमान की क्या करेंगे? लेकिन ये दोनों देश भी क्या करेें? इनके सामने शर्त ही ऐसी रख दी गई है कि इन्हें पसीना आ गया है।
खासकर पाकिस्तानी प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ और फील्ड मार्शल का चोला ओढ़े आसिम मुनीर का हलक सूख रहा है, पल्ले नहीं पड़ रहा है कि जहांपनाह की सुनें या फिर अपनी कौम की सुनें? पाकिस्तान की पूरी सत्ता सांसत में है। हुआ यह है कि ट्रम्प ने न केवल अरब देशों बल्कि पाकिस्तान से भी कहा है कि सभी देश अब्राहम अकॉर्ड पर हस्ताक्षर करें, अब यहां समझिए कि अब्राहम अकॉर्ड है क्या? 2020 में अमेरिका की मध्यस्थता में हुए एक समझौते के तहत संयुक्त अरब अमीरात ने इजराइल को एक संप्रभु राष्ट्र के रूप में मान्यता दी। बाद में मोरक्को और सूडान ने भी मान्यता दे दी, 1979 में मिस्र और 1994 में जॉर्डन की ओर से इस्राइल को मान्यता देने के बाद, यह पहला मौका था जब किसी अरब देश ने इस्राइल को मान्यता दी।
पाकिस्तान ने अभी तक इस्राइल को मान्यता नहीं दी है क्योंकि पाकिस्तान फिलिस्तीन का समर्थन करता है और इस्राइल को अवैध मानता है। पाकिस्तान के सभी हुक्मरान समय-समय पर इस्राइल के खिलाफ जहर बोते रहे हैं। यह फसल जब लहलहा रही है तब जहांपनाह ने कह दिया है कि इस्राइल को पाकिस्तान मान्यता दे। अब शरीफ और मुनीर काटो तो खून नहीं वाली स्थिति में हैं। धीरे से कह रहे हैं कि यह संभव ही नहीं है मगर डर सता रहा है कि ट्रम्प नाराज न हो जाएं।
अब वे तो जहांपनाह हैं, उन्हें नाफरमानी बिल्कुल बर्दाश्त नहीं है, और खास कर अपनी गोद में खेलने वाला बच्चा शैतानी करे तो कैसे बर्दाश्त करेंगे? क्या इसी दिन के लिए भर-भर कर चॉकलेट खिलाए थे? इसी दिन के लिए इतना दुलार किया था कि तुम नाफरमानी करो। पाकिस्तान को नमक का हक अदा करना चाहिए। उसे न केवल वर्तमान बल्कि भूतकाल में भी झांक कर देखना चाहिए कि महाबली ने उसकी कितनी मदद की है। नमक का हक अदा नहीं करना गुनाह है और इस गुनाह की सजा जहांपनाह जरूर देंगे। अब जरा ओमान की हालत देख लेते हैं, अमेरिका और ओमान के रिश्तों की मिठास की कहानी 1790 से शुरु होती है। इस्राइल तो 1948 में बना है, लेकिन ओमान ने उसे मान्यता नहीं दी है।
मगर जहांपनाह के गुस्से का कारण कुछ और है, मामला यह है कि ओमान और ईरान के बीच यह बातचीत चल रही थी कि दोनों मिलकर होर्मुज स्ट्रेट से गुजरने वाले जहाजों से सेवा शुल्क कैसे लें। इसकी खबर जहांपनाह को लग गई, बर्दाश्त करने की बात ही नहीं थी। आखिर इस ओमान को भी तो बहुत दुलार और प्यार दिया है। बच्चों की तरह पाला है और वही भीतरघात कर रहा है? इसी बीच किसी दरबारी ने यह भी बता दिया होगा कि ओमान के विदेश मंत्री सैय्यद बद्र बिन हमद अलबुसैदी ने एक लेख के माध्यम से चेतावनी दी थी कि युद्ध जारी रखकर अमेरिका अपनी साख को नुकसान पहुंचा रहा है, और अपनी ही विदेश नीति पर नियंत्रण खो चुका है।
सोशल मीडिया पर अलबुसैदी ने साफ कहा था कि अमेरिका के लिए ईरान कोई खतरा नहीं है। ऐसी स्थिति में जहांपनाह की नाराजगी मुझे ठीक लगती है, उन्होंने कहा है कि ओमान को बाकियों की तरह व्यवहार करना होगा, नहीं तो हमें उन्हें तबाह कर देना पड़ेगा। अब तो बस यही गुनगुनाने को जी चाहता है…अब तो अल्ला जाने क्या होगा!
और अंत में…
बशीर साहब को कभी भुला न पाएंगे
मैं पिछले सप्ताह लोकमत वर्ल्ड इकोनॉमिक कॉन्क्लेव के नए आयोजन स्थल की तलाश में विदेश यात्रा पर था। स्विट्जरलैंड में एक नदी किनारे घूमते हुए बशीर बद्र का एक नगमा याद आ गया… हम भी दरिया हैं, हमें अपना हुनर मालूम है, जिस तरफ भी चल पड़ेंगे, रास्ता हो जाएगा। तब क्या मालूम था कि हिंदुस्तान पहुंचते ही उनके बिखरने की खबर मिलेगी, उन्हें पढ़ते हुए और सुनते हुए हर बार लगा कि उनकी ग़ज़लों में प्यार है तो जुदाई, उम्मीद और जिंदगी का हर फलसफा है। बशीर बद्र साहब ग़ज़ल की दुनिया में मखमली एहसास रहे हैं तो सच को इस तरह सामने रखा कि दिल पिघल जाए… लोग टूट जाते हैं एक घर बनाने में, तुम तरस नहीं खाते बस्तियां जलाने में, बशीर साहब ने शायरी और ग़ज़ल की दुनिया को बेपनाह इज्जत बख्शी। उन्होंने लिखा…
उजाले अपनी यादों के हमारे
साथ रहने दो, न जाने किस गली
में जिंदगी की शाम हो जाए।
आपकी यादों का उजाला हमेशा हमारे साथ रहेगा, खुदा हाफिज बशीर साहब !


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