जनवरी का महीना अपने चरम पर है। कड़ाके की ठंड, कोहरे से ढकी सुबह और रजाई में दुबके रहने का आलस लेकिन इन सबके बीच एक शाम ऐसी आती है, जो ठंड को भी पसीने ला देती है। वह शाम है- 13 जनवरी। ढोल की थाप, जलती हुई लकडिय़ों की ऊंची लपटें, हवा में उड़ती रेवड़ी-मूंगफली की खुशबू और चारों तरफ नाचते-गाते लोग। जी हां, हम बात कर रहे हैं उत्तर भारत के सबसे जोश भरे त्यौहार लोहड़ी की। इस साल 13 जनवरी को देश भर में लोहड़ी मनाई जाएगी।
लोहड़ी सिर्फ पंजाबियों का त्यौहार ही नहीं अपितु समस्त भारतवासियों का पर्व है। नयी फसल कटने की खुशियां मनाने के साथ-साथ सुख समृद्घि का प्रतीक है। पुराने समय में लोहड़ी पर्व को मनाने के लिए बड़े-बुजुर्ग विराट यज्ञ करके सुगंधित हवन सामग्री, औषधियुक्त खाद्य पदार्थ तिल, जौ, सूखे-मेवों से आहुतियां डालते थे तथा बच्चों, युवाओं बेटियों को माता-पिता, वरिष्ठïजनों की सेवा, आज्ञा पालन के संस्कार देते थे।
यह बात मुगल बादशाह अकबर के समय की है। उस दौर में पंजाब में एक विद्रोही योद्धा था, जिसका नाम था ‘राय अब्दुल्ला खान भट्टी, जिसे लोग प्यार से ‘दुल्ला भट्टी कहते थे। वह अमीरों को लूटता था और उस धन को गरीबों में बांट देता था। वह उस समय का ‘रॉबिन हुड था। उस दौर में कुछ अमीर सौदागर और मुगल सिपाही हिंदू लड़कियों को जबरदस्ती अगवा करके गुलाम बाजारों में बेचने के लिए ले जाते थे। एक बार दुल्ला भट्टी को पता चला कि दो गरीब अनाथ ब्राह्मïण लड़कियां- ‘सुंदरी और ‘मुंदरी को कुछ दुष्ट लोग अगवा करने वाले हैं।
दुल्ला भट्टी ने उन जालिमों से लड़ाई की और दोनों बहनों को सुरक्षित बचाया। लेकिन सिर्फ बचाना काफी नहीं था। उनकी शादी करवाना भी जरूरी था ताकि वे सुरक्षित रहें। दुल्ला भट्टी ने जंगल में ही आग जलाई (वही लोहड़ी की आग का प्रतीक है)। चूंकि वहां कन्यादान के लिए कुछ नहीं था, तो दुल्ला भट्टी ने शक्कर (गुड़) देकर उनकी झोली भरी और खुद पिता बनकर उन दोनों की शादी करवाई।
उस दिन पंजाब ने जाना कि धर्म और जाति से ऊपर उठकर ‘इंसानियत क्या होती है। लोहड़ी का त्यौहार असल में ‘बेटियों की सुरक्षा और सम्मान का प्रतीक है। जब हम आग जलाते हैं, तो हम उस दुल्ला भट्टी की वीरता को नमन करते हैं जिसने परायी बेटियों को अपनी बेटी मानकर उनका घर बसाया था। केसरी क्लब में भी सदस्य हवन-यज्ञ करके प्रदूषण दूर भगाते हैं वहीं बड़ों की सेवा करने वाले बच्चों का सम्मान करते हैं। द्य




















