मामू की ‘पावरी हो रही है’

Summary :

सोशल मीडिया पर पाकिस्तानी लड़की के धूम मचा रहे मीम पावरी हो रही है, हर किसी की जुबां पर है। लोग इसकी कॉपी कर रहे हैं। मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान भी ‘पावरी हो रही है’ मीम की जमात में शामिल हो गए हैं।

सोशल मीडिया पर पाकिस्तानी लड़की के धूम मचा रहे मीम पावरी हो रही है, हर किसी की जुबां पर है। लोग इसकी कॉपी कर रहे हैं। मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान भी ‘पावरी हो रही है’ मीम की जमात में शामिल हो गए हैं। लेकिन इस मीम का इस्तेमाल उन्होंने लोगों के प्लाटों पर जबरन कब्जा कर उन्हें अपनी ही जमीन से वंचित करने वाले भूमाफियाओं को सख्त चेतावनी देने के लिए किया। इंदौर के कार्यक्रम में बैठे नेताओं और सरकारी अफसरों की ओर इशारा करते हुए कहा, ‘‘यह मैं हूं, यह मेरी सरकार है, यह मेरी प्रशासनिक टीम है और आप देखो कि भूमाफिया भाग रहे हैं। इतना ही नहीं उन्होंने राज्य की सियासत में बयानबाजी में मुुहावरे की तरह इस्तेमाल होने वाले वाक्य ‘टाइगर अभी जिंदा है’ का हवाला भी दिया। उन्होंने अपने अंदाज में कहा-मैंने पहले ही कह दिया था कि टाइगर अभी जिंदा है और अब यह टाइगर भू-माफिया, चिटफंड कम्पनियों के दलालों, नशे के कारोबारियों और माओ बेटियों-बहनों की जिन्दगी को बदतर बनाने वालों के शिकार पर निकला है।’’ मुख्यमंत्री शहर के उन लोगों को सम्बोधित कर रहे थे जो अपनी जमीनों पर भू-माफिया के जबरिया कब्जे से दशकों से पीड़ित थे। प्रशासन ने भू-माफिया के खिलाफ अभियान छेड़कर इन लोगों को जमीन का हक वापिस दलाने का सिलसिला शुरू किया है।
सफल राजनीतिज्ञ वही होता है जो जनता से सीधा संवाद स्थापित कर लेता है, जनता के लिए हर समय उपलब्ध रहता है। यद्यपि राजनीतिज्ञ जनता से जुड़ने के लिए सूचना प्रौद्योगिकी का इस्तेमाल कर रहे हैं लेकिन मध्य प्रदेश में मामू के उपनाम से लोकप्रिय शिवराज चौहान ने मीम का इस्तेमाल कर भूमाफिया को चेतावनी दी है तो यह एक अनूठी पहल है। पाकिस्तानी युवती दनानीर मुबीन अपने मीम के जरिये लोकप्रिय हो चुकी है। कई बार एक मीम बहुत कुछ कह देता है जो लम्बे-चौड़े भाषण नहीं कह पाते। मीम युवाओं की पसंद है। यदि मुख्यमंत्री शिवराज ​चौहान जनता तक अपना संदेश पहुंचाने के लिए इसका इस्तेमाल किया तो इसे एक सफल प्रयोग ही माना जाएगा। ‘टाइगर अभी जिंदा है’ कह कर वह जनता को आश्वस्त करते हैं कि वे असामाजिक तत्वों, भ्रष्टा​चारियों को छोड़ेंगे नहीं।
भारत के नक्शे पर मध्य प्रदेश बिल्कुल बीचोंबीच आता है। यही कारण है कि राज्य को भारत का दिल कहा जाता है। पिछले विधानसभा चुनावों में 15 वर्षों से सत्ता पर काबिज भाजपा को हार का सामना करना पड़ा था, लेकिन परिस्थितियों ने करवट ली कि कांग्रेस के मुख्यमंत्री कमलनाथ को इस्तीफा देना पड़ा और भाजपा ने 15 महीने बाद चौथी बार मुख्यमंत्री पद का ताज शिवराज चौहान के सिर पर सजा दिया। इस तरह वे राज्य के सबसे लम्बे समय तक सेवा करने वाले मुख्यमंत्री बन चुके हैं।
यद्यपि 2018 के विधानसभा चुनाव में भाजपा पराजित जरूर हुई लेकिन शिवराज चौहान की लोकप्रियता में कोई कमी नहीं आई। मामा का दरबार सत्ता से बेदखल होने के बाद भी सजता रहा। मामा अपने चिरपरिचित अंदाज से घर से बाहर आते और जनता के बीच बैठ जाते। फिर शुरू होता शिकायतों का सिलसिला। मामा तुरंत मोबाइल निकाल कर अधिकारियों को लाइन पर लेने और लोगों के रुके हुए काम करने को बोलते। शिवराज चौहान की यही छवि जनता के भीतर घुसी हुई है। यही कारण है कि भाजपा हाईकमान उन्हें पूरी तवज्जो देता है। राजनीति की बिसात पर किसे कैसे पटखनी देनी है, शिवराज चौहान को इसमें भी महारत हासिल है। विधानसभा चुनावों के 15 महीने बाद चौथी बार सत्ता सम्भालना उनके राजनीतिक कौशल का ही परिणाम है।
राजनीतिक विश्लेषक भी मानते हैं कि शिवराज की विनम्र छवि उनकी राजनीतिक पूंजी है। कभी वे जनता के साथ बैठकर भजन-कीर्तन करने लगते हैं। उनका गांव जैत नर्मदा नदी के तट पर है। चौहान जब भी गांव आते हैं तो नहाने के लिए कपड़े खोल नर्मदा में छलांग लगा देते हैं और तैरते हुए नदी के दूसरे छोर पर चले जाते हैं। राजनीतिक क्षेत्रों में इस बात पर चर्चा होती है कि उनमें ऐसा क्या है कि हारते ही नहीं। उनका व्यक्तित्व ऐसा है कि बिना कोई विवाद खड़े किए, बिना छवि को कट्टर बनाए वो सब कुछ कर जाते हैं। शिवराज चौहान अगर राजनीति में लम्बी पारी खेल रहे हैं तो इसका श्रेय उनके शासनकाल की उपलब्धियों को जाता है। मध्य प्रदेश को पहले देशभर में सबसे ज्यादा दाल की खेती के लिए जाना जाता था, परन्तु अब यहां गेहूं का उत्पादन हो रहा हैं। अब भारत के कुल गेहूं उत्पादन में मध्य प्रदेश का हिस्सा 17 फीसदी है। आधारभूत ढांचे में निवेश हुआ है, जिसमें सिंचाई सबसे अहम है। शिवराज चौहान ने अपने पहले कार्यकाल में गेहूं के एमएसपी पर सौ रुपए बोनस देना शुरू किया था। उन्होंने साथ ही मार्केट में भी काफी सुधार किया। इसके अलावा उनकी सरकार बुजुर्गों को मुफ्त तीर्थयात्रा कराती है, मुख्यमंत्री सामूहिक शादियां कराते हैं। इसके अलावा भी जब कल्याण की कई नीतियां, योजनाएं जारी हैं। सबसे महत्वपूर्ण है कि शिवराज चौहान जमीनी स्तर पर जनता के साथ जुड़े हुए हैं। उनका राजनीतिक दर्शन स्पष्ट है कि जनता सरकार से डरे तो समझिये निरंकुशता है। सरकार जनता से डरे तो लोकतंत्र है, आजादी है। वे भारतीय राजनीति के उदारवादी चेहरे हैं और अल्पसंख्यकों को भी उनसे कोई डर नहीं लगता। उनका अपना ही अंदाज है तभी तो उनकी ‘पावरी हो रही है।’
आदित्य नारायण चोपड़ा
Adityachopra@punjabkesari.com

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