प्रदूषण पर महा-एक्शन

Summary :

दिल्ली एनसीआर में सर्दियों के दौरान बढ़ने वाले वायु प्रदूषण को नियंत्रित करने के लिए नए प्रतिबंध लागू कर दिए गए हैं। विंटर पाल्यूशन एक्शन प्लान के तहत यह पाबंदियां 31 जनवरी 2027 तक लागू रहेंगी। अब दिल्ली के बाहर रजिस्ट्र बीएस-6 से कम मानक वाली गाडि़यां राजधानी में नहीं आ सकेंगी। सरकारी और प्राइवेट कंपनियों के ऑफिस में आधे कर्मचारी घर से काम करेंगे, सार्वजनिक पार्किंग की फीस भी दोगुनी कर दी गई है। हालांकि दिल्ली की हवा में पिछले 8 साल के मुकाबले सुधार दर्ज किया गया है। अक्तूबर में औसत एक्यूआई 166 रहा जो 2018 के बाद…

दिल्ली एनसीआर में सर्दियों के दौरान बढ़ने वाले वायु प्रदूषण को नियंत्रित करने के लिए नए प्रतिबंध लागू कर दिए गए हैं। विंटर पाल्यूशन एक्शन प्लान के तहत यह पाबंदियां 31 जनवरी 2027 तक लागू रहेंगी। अब दिल्ली के बाहर रजिस्ट्र बीएस-6 से कम मानक वाली गाडि़यां राजधानी में नहीं आ सकेंगी। सरकारी और प्राइवेट कंपनियों के ऑफिस में आधे कर्मचारी घर से काम करेंगे, सार्वजनिक पार्किंग की फीस भी दोगुनी कर दी गई है। हालांकि दिल्ली की हवा में पिछले 8 साल के मुकाबले सुधार दर्ज किया गया है।

अक्तूबर में औसत एक्यूआई 166 रहा जो 2018 के बाद इस महीने में सबसे कम है। दिल्ली सरकार ने प्रदूषण पर सतर्कता बरतते हुए महा-एक्शन तो शुरु कर दिया है ले​किन तीन महीने तक चलने वाली पाबंदियों से जनजीवन तो प्रभावित होगा ही ब​ल्कि इससे जरूरी सामान की सप्लाई भी प्रभावित हो सकती है। दिल्ली से बाहर पंजीकृत पुरानी पैट्रोल और डीजल गाड़ियों की एंट्री पर रोक लगाए जाने से ट्रांसपोर्टेशन का खर्चा भी बढ़ सकता है। पिछले सालों के उलट टूरिस्ट परमिट वाली बसों को भी इस बार पाबंदियों से छूट नहीं है।

तीन महीने टूरिस्ट सीजन के होते हैं। इन पाबंदियों से ट्रेवल कंपनियां परेशान हैं। दिल्ली आने जाने वाली बसों की संख्या कम होने से टिकटों की कीमतों में 15 फीसदी की बढ़ोतरी हो सकती है। जल्दी खराब होने वाले सामान की आवाजाही में रुकावट आ सकती है। जिसका एक बड़ा हिस्सा देशभर से सड़क के रास्ते दिल्ली पहुंचता है। दिल्ली में स​ब्जियां उत्तर प्रदेश, पंजाब और हरियाणा से और प्याज इत्यादि महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश और राजस्थान से आते हैं। दूध की सप्लाई हरियाणा, पंजाब, उत्तर प्रदेश और राजस्थान से होती है।

इन सामानों की सप्लाई में रुकावट आ सकती है और इन रोजमर्रा की चीजों के दाम बढ़ सकते हैं। एक्शन प्लान के तहत निर्माण कार्यों पर पाबंदी लगा दी गई है। जिससे राेज कमा कर खाने वाले श्रमिक वर्ग के सामने बेरोजगारी का संकट खड़ा हो सकता है। प्रदूषण बड़ी चुनौती है। वायु प्रदूषण अब केवल महानगरों और शहरों की समस्या नहीं है, गांवों की हवा भी उतनी ही जहरीली होती जा रही है। मुंबई में भी समुद्री हवाओं का प्राकृतिक सुरक्षा कवच कमजोर पड़ चुका है।

शीतकालीन प्रदूषण को नियंत्रित करने के लिए उठाए गए कदम सराहनीय प्रयास हैं लेकिन धान की पराली जलाने, हवा की गति में अचानक गिरावट, दीपावली पर पटाखों और आतिशबाजी चलाने की संभावना को देखते हुए यह कहना जल्दबाजी होगा कि यह प्रयास कितने कारगर होंगे। दिल्ली के नागरिकों को आने वाली सर्दियों में स्वच्छ हवा मिले, यह सुनिश्चित करने में ये केवल कुछ चुनौतियां हैं। कारगर होने के लिए प्रवर्तन का दायरा कहीं अधिक व्यापक होना चाहिए, जो दिल्ली सरकार के अधिकार क्षेत्र से परे है। दिल्ली विशाल राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र का हिस्सा है, जिसमें हरियाणा, उत्तर प्रदेश और राजस्थान के जिले शामिल हैं।

इन राज्यों के अधिकांश शहर भारत में शहरी प्रदूषण का मुख्य स्रोत हैं। दिल्ली की शीतकालीन प्रदूषण नियंत्रण कार्य योजना के प्रभावी होने के लिए, इन क्षेत्रों के प्रशासनों को पारस्परिक योजनाएं लागू करनी होंगी। पुराने वाहनों और निर्माण पर मानक प्रतिबंध पिछली सर्दियों में ज्यादा असरदार साबित नहीं हुए हैं और योजना में तालमेल का कोई प्रमाण नहीं है। केंद्रीय आवास और शहरी मामलों के मंत्रालय के अधीन राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र योजना बोर्ड प्रदूषण नियंत्रण योजनाओं के समन्वय में उपयोगी भूमिका निभा सकता है। लेकिन इससे भी समस्या का आंशिक समाधान ही होगा।

एक्यूआई रैंकिंग के नवीनतम आंकड़ों से पता चलता है कि दिल्ली दुनिया के 20 सबसे प्रदूषित शहरों में शामिल 13 भारतीय शहरों में से एक नहीं है। इनमें बुलंदशहर, पाली, मथुरा, मुजफ्फरनगर, रोहतक, कोटा, हापुड़, बीकानेर, बरेली और हिसार शामिल हैं। अन्य में मुंबई, अगरतला और बुरहानपुर (मध्य प्रदेश) उत्तरी गंगा क्षेत्र से बाहर हैं। इनमें से कई प्रदूषण फैलाने वाले शहर पराली जलाने वाले क्षेत्रों के निकट स्थित हैं। रबी फसल के मौसम से पहले किसान अपने खेतों को साफ करने के लिए आग लगाते हैं, उससे निकलने वाले घने धुएं से कोई भी उत्तरी शहर अछूता नहीं है।

जन स्वास्थ्य संकट को देखते हुए प्रदूषण पर नियंत्रण जरूरी है। प्रदूषण का असर सबके स्वास्थ्य पर पड़ता है। दिल्ली में तो नवजात शिशु के फेफड़े भी गुलाबी की बजाय काले दिखाई देते हैं। मानव ने जितना प्रकृति से खिलवाड़ किया है उसका खामियाजा उसे भुगतना पड़ रहा है। उसके लिए खुली हवा में सांस लेना भी मुश्किल हो रहा है। प्राकृतिक असंतुलन न हो इस के लिए मनुष्य को प्रकृति के साथ रहना सीखना होगा। प्रदूषण को कम करने के लिए जन-जन की भागीदारी निभानी होगी।

Aditya Chopra

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