गुलाम कश्मीर में पाक-जुल्म

Summary :

भारत का स्पष्ट मत रहा है कि पाकिस्तान अपने कब्जे वाले कश्मीर में चुनाव कराने का पाखंड करके भारत के इस हिस्से पर अपने अवैध कब्जे को कथित वैध दिखाने के लिए दुनिया की आंखों में धूल झोंकने का प्रयास करता रहता है। यह अपने कब्जे वाले कश्मीर के हिस्से को आजाद कश्मीर कह कर जम्मू-कश्मीर की जनता को ही मूर्ख बनाता रहता है और इसकी एक एेसी एसेम्बली के चुनाव कराता है जिसका विरोध इस हिस्से में रहने वाली जनता ही करती है। मगर इस बार तो पाकिस्तान ने सारी हदें पार कर डाली हैं क्योंकि चुनावों का विरोध…

भारत का स्पष्ट मत रहा है कि पाकिस्तान अपने कब्जे वाले कश्मीर में चुनाव कराने का पाखंड करके भारत के इस हिस्से पर अपने अवैध कब्जे को कथित वैध दिखाने के लिए दुनिया की आंखों में धूल झोंकने का प्रयास करता रहता है। यह अपने कब्जे वाले कश्मीर के हिस्से को आजाद कश्मीर कह कर जम्मू-कश्मीर की जनता को ही मूर्ख बनाता रहता है और इसकी एक एेसी एसेम्बली के चुनाव कराता है जिसका विरोध इस हिस्से में रहने वाली जनता ही करती है। मगर इस बार तो पाकिस्तान ने सारी हदें पार कर डाली हैं क्योंकि चुनावों का विरोध करने वाले कश्मीरी लोगों को इसकी फौज गोलियाें से भून रही है। पाकिस्तान के कब्जे में कश्मीर वादी का एक-तिहाई हिस्सा है जिसे केवल गुलाम कश्मीर ही कहा जा सकता है क्योंकि यहां के लोगों के सभी मौलिक नागरिक अधिकार पाकिस्तान के हुक्मरानों ने छीन रखे हैं। दिखाने के लिए हर पांच साल बाद यहां चुनाव करा दिये जाते हैं जिनमें पाकिस्तान अपनी मनमर्जी के शासक बैठा देता है। इसकी मुख्य वजह यह है कि 53 सदस्यीय एसेम्बली में 12 सीटें एेसे कश्मीरियों के लिए आरक्षित रखी गई हैं जो गुलाम कश्मीर से पलायन करके पाकिस्तान के दूसरे इलाकों में जाकर बस गये हैं। यहां के लोग इसी प्रावधान का पुरजोर तरीके से विरोध कर रहे हैं। इसके अलावा आठ सीटें महिलाओं, तकनीकी विशेषज्ञों व मुस्लिम मुल्लाओं के लिए आरक्षित हैं।
इस प्रकार कुल 53 सीटों में से 20 सीटें आरक्षित होने के बाद केवल 33 सीटें आम लोगों के लिए बचती हैं जिनमें पाकिस्तान की विभिन्न राजनीतिक पार्टियां हिस्सा लेती हैं। इन सीटों का चुनाव भी चरणबद्ध तरीके से कराया जाता है। विगत सोमवार को यहां पहले चरण में 13 सीटों का चुनाव हुआ जिनमें 9 सीटों पर पाकिस्तान की सत्ता पर काबिज मुस्लिम लीग (एन) व शेष चार पर पीपुल्स पार्टी ने कब्जा कर लिया। इस देश में इन्हीं दोनों पार्टियों की इस्लामाबाद में सरकार है। इन चुनावों की घोषणा होने से पहले से ही कब्जे वाले कश्मीर के लोगों की नागरिक संस्था संयुक्त अवामी एक्शन कमेटी मौलिक अधिकारों जैसे पानी, बिजली, रोटी व रोजगार के लिए आन्दोलनरत है। इस आन्दोलन को आम लोगों का पूरा समर्थन प्राप्त है मगर पाकिस्तानी फौज उन्हें गोलियों से भून रही है। विगत सोमवार को 13 सीटों के लिए हुए चुनाव को इस कमेटी ने छलावा बताया और सड़कों पर भारी प्रदर्शन किया जिस पर फौज ने गोलियां चलाईं और 20 नागरिकों को हलाक कर डाला और बड़ी संख्या में जख्मी किया।
अवामी एक्शन कमेटी अपना आन्दोलन पिछले लम्बे अरसे से चला रही है और उसने गुलाम कश्मीर के ग्रामीण इलाके से अपने अभियान को शुरू करके राजधानी मुजफ्फराबाद तक पहुंचने का कौल दिया है जिसमें लाखों लोग जुड़ रहे हैं। यह लाॅन्ग मार्च इलाके के मीरपुर शहर से होते हुए रावलकोट तक पहुंच चुका है। मगर पाकिस्तान की सरकार ने अवामी एक्शन कमेटी पर ही प्रतिबन्ध लगा दिया है। इसके बावजूद लोग उसके आह्वान पर आन्दोलन में हिस्सा ले रहे हैं और लाॅन्ग मार्च से जुड़ रहे हैं। पिछले दिनों जब यह लाॅन्ग मार्च मीरपुर पहुंचा था तो तब भी फौज ने इस पर गोलियां चलाई थीं जिसमें गैर सरकारी सूत्रों के अनुसार कम से कम 100 लोग मारे गये थे। मगर सरकारी सूत्र अभी तक मारे गये कुल नागरिकों की संख्या 34 ही बता रहे हैं। इससे इतना तो सिद्ध होता ही है कि पाकिस्तान के हुक्मरान नागरिकों पर गोलियां चलवा रहे हैं और उनके शान्तिपूर्ण प्रदर्शन पर जुल्म ढहा रहे हैं। जिस पर भारत का दुखी होना व चिन्ता प्रकट करना स्वाभाविक है क्योंकि पूरा जम्मू-कश्मीर वैधानिक रूप से भारतीय संघ का हिस्सा है।
26 अक्तूबर, 1947 को जम्मू-कश्मीर रियासत का विलय भारतीय संघ में उसी प्रकार हुआ था जिस प्रकार भारत की अन्य देशी रियासतों का। मगर पाकिस्तान की फौजों ने इस तारीख से पहले कश्मीर पर हमला कर दिया था और कश्मीर घाटी के एक-तिहाई हिस्से को अपने कब्जे में ले लिया था। अतः जम्मू-कश्मीर में पाकिस्तान की हैसियत एक आक्रमणकारी की है अतः इसके कब्जे से अपने इलाके को मुक्त कराना भारत का जायज हक है। यही वजह है कि भारत के रक्षा मन्त्री श्री राजनाथ सिंह ने दो दिन पहले ही यह कहा था कि पाकिस्तान से अगर भारत बातचीत करेगा तो वह केवल उसके कब्जे वाले कश्मीर को छुड़ाने के लिए ही करेगा। भारत का यह दावा पूरे जम्मू-कश्मीर के लोगों की हिमायत पर भी टिका हुआ है क्योंकि भारत ने अपनी जम्मू-कश्मीर एसेम्बली में 24 स्थान गुलाम कश्मीर के लोगों के लिए शुरू से ही खाली रखे हुए हैं। इसलिए गुलाम कश्मीर में आजकल जो कुछ भी घटित हो रहा है उसका गंभीरता के साथ भारत का विदेश मन्त्रालय संज्ञान ले रहा है और अपनी सधी हुई प्रतिक्रिया व्यक्त कर रहा है। इस सन्दर्भ विदेश मन्त्रालय के प्रवक्ता श्री रणधीर जायसवाल का यह कहना बहुत मायने रखता है कि पाकिस्तान अपने कब्जे के कश्मीरी इलाके में मानवीय अधिकारों का दमन कर रहा है और चुनावों का ढोंग रच रहा है। पाकिस्तान इस इलाके का आर्थिक शोषण शुरू से ही करता आ रहा है और साथ ही शासकीय दमन भी कर रहा है जिसकी वजह से यहां के लोग अब अपने अधिकारों के लिए सड़कों पर निकल पड़े हैं। राष्ट्रसंघ के मंच पर भी भारत इसकी आवाज उठा चुका है। अतः अब अन्तर्राष्ट्रीय मानवाधिकार संगठनों को भी जागना चाहिए।

Aditya Chopra

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