राहुल, खड़गे और वासवराज

Summary :

भारतीय राजनीति में आजकल जो दौर चल रहा है उसे हम जन आकांक्षाओं का विस्फोट भी कह सकते हैं क्योंकि विभिन्न राज​नीतिक दल जनता के मुद्दों को अपना-अपना कथानक बना कर आम लोगों की अपेक्षाओं पर खरा उतरने का प्रयास करते दिखाई दे रहे हैं। मगर इसका सकारात्मक पक्ष यह है कि राजनीति सिद्धान्त और नीतिपरक होने की तरफ जाती दिखाई पड़ रही है। बेशक यह प्रतिद्वंद्विता मुख्य रूप से विपक्षी पार्टी कांग्रेस व भाजपा के बीच ही होता दिखाई पड़ रहा है मगर इस सन्दर्भ में सबसे महत्वपूर्ण यह होगा कि पिछली सदी में स्वतन्त्र भारत का इतिहास लिखने…

भारतीय राजनीति में आजकल जो दौर चल रहा है उसे हम जन आकांक्षाओं का विस्फोट भी कह सकते हैं क्योंकि विभिन्न राज​नीतिक दल जनता के मुद्दों को अपना-अपना कथानक बना कर आम लोगों की अपेक्षाओं पर खरा उतरने का प्रयास करते दिखाई दे रहे हैं। मगर इसका सकारात्मक पक्ष यह है कि राजनीति सिद्धान्त और नीतिपरक होने की तरफ जाती दिखाई पड़ रही है।

बेशक यह प्रतिद्वंद्विता मुख्य रूप से विपक्षी पार्टी कांग्रेस व भाजपा के बीच ही होता दिखाई पड़ रहा है मगर इस सन्दर्भ में सबसे महत्वपूर्ण यह होगा कि पिछली सदी में स्वतन्त्र भारत का इतिहास लिखने वाली पार्टी कांग्रेस किस हद तक श्री राहुल गांधी के नेतृत्व में भारत की राजनीति में अपने गौरवपूर्ण इतिहास की विरासत के साथ आम लोगों की आवाज को अपनी आवाज बनाती है और उसके जवाब में भारतीय जनता पार्टी किस तरह प्रधानमन्त्री श्री नरेन्द्र मोदी की अगुवाई में जनापेक्षाओं पर खरा उतरने का प्रयास करती है। आज की दो खबरें ऐसी हैं जिन्हें हम इस दौर की अन्तर्विरोधी कथाएं मान सकते हैं।

पहली तो यह कि उत्तराखंड के हल्द्वानी शहर में पुलिस द्वारा श्री राहुल गांधी के खिलाफ एफ.आई.आर. दर्ज इसलिए की गई है कि उन्होंने शहर के रामलीला मैदान में उनकी पार्टी के अध्यक्ष श्री मल्लिकार्जुन खड़गे द्वारा एक जनसभा को सम्बोधित करने के बाद मैदान का शुद्धिकरण कुछ हिन्दू कट्टरपंथी लोगों द्वारा करने की प्रक्रिया को दलित विरोधी व सामाजिक छुआछूत का प्रदर्शन करने वाला बताया था तथा इस मामले में सीधे प्रधानमन्त्री से अपील करते हुए कहा कि वह राज्य सरकार को एफ.आई.आर. दर्ज करने के लिए कहें क्योंकि यह मामला दलितों के साथ आपराधिक छुआछूत करने वाला है क्योंकि श्री खड़गे अनुसूचित जाति से आते हैं।

श्री खड़गे ने हल्द्वानी में विगत 8 अगस्त को एक जनसभा को सम्बोधित किया था जबकि रामलीला मैदान की शुद्धिकरण हवन आदि 11 अगस्त को किया गया। श्री राहुल गांधी के खिलाफ हवन में शामिल एक 26 वर्षीय वाल्मीकि युवक अमित कुमार द्वारा शिकायत दर्ज कराई गई जिसके बाद पुलिस ने उन पर एफ.आई.आर. दर्ज कर दी। बीते कल को ही श्री गांधी ने दिल्ली में एक प्रेस कान्फ्रेंस करके हल्द्वानी का मामला उठाया था और कल ही हल्द्वानी पुलिस ने उनके खिलाफ एफ.आई.आर. दर्ज कर ली। आम लोगों के नजरिये से यदि घटनाक्रम को देखें तो यह विपरीत कार्रवाई लगती है। मगर दूसरी खबर कर्नाटक से है जहां कांग्रेस पार्टी की सरकार है।

इस सरकार के एक मन्त्री श्री वासवराज राया रेड्डी ने इस्लाम धर्म को महान बताते हुए कहा कि उनकी इच्छा ‘हज’ करने की है मगर वह इस यात्रा को बिना हिन्दू से मुसलमान बने नहीं कर सकते हैं। उन्होंने इस्लाम को वैज्ञानिक धर्म बताते हुए इसकी काफी प्रशंसा की। कांग्रेस पार्टी स्वयं को धर्मनिरपेक्ष बताते हुए राष्ट्रपिता महात्मा गांधी के सिद्धान्तों पर चलने वाली पार्टी बताती है। बेशक गांधी जी ने एक बार 1920 में ‘यंग इंडिया’ में लेख लिख कर कहा था कि इस्लाम शान्ति का मजहब है और दूसरी बार ‘हरिजन’ में 1945 के करीब सम्पादकीय लिख कर भी इसकी पुष्टि की थी। गांधी जी का यह विमर्श मुस्लिम लीग के साम्प्रदायिकता के जहर को झाड़ने का था जिससे भारत के दो टुकड़े न हो सकें।

मगर श्री राया रेड्डी तो परोक्ष रूप से धर्म परिवर्तन की वकालत कर रहे हैं जिसे भाजपा के नेताओं ने पकड़ लिया है और उनकी घोर निन्दा करनी शुरू कर दी है तथा कांग्रेस को उदारवादी मुस्लिम लीग कहने से भी परहेज नहीं किया है लेकिन हल्द्वानी शुद्धिकरण कांड का सच यह भी है कि श्री मल्लिकार्जुन खड़गे ने ही अपने साथ किये जा रहे भेदभाव के मामले को 13 अगस्त के दिन राज्यसभा में उठाया था और सरकार से यथोचित कार्रवाई करने की मांग की थी। श्री खड़गे राज्यसभा में विपक्ष के नेता भी हैं।

इस सदन के सभापति उप राष्ट्रपति श्री सी.पी. राधाकृष्णन ने उन्हें यह कहते हुए मामला उठाने की इजाजत दी थी कि यह अत्यन्त महत्व का विषय है। श्री खड़गे द्वारा हल्द्वानी का मामला उठाये जाने के बाद सदन के नेता व स्वास्थ्य मन्त्री श्री जगत प्रसाद नड्डा ने वक्तव्य दिया था और स्पष्ट किया था कि उनकी पार्टी भाजपा छुआछूत के खिलाफ है अतः भाजपा ऐसी किसी भी गतिवि​धि का समर्थन नहीं करती है। सरकार पूरे मामले की जांच करायेगी तथा दोषियों को कानून के मुताबिक सख्त सजा दी जायेगी। उन्होंने कहा था की मैं इस घटना की घोर निन्दा करता हूं। सभापति श्री सी.पी. राधाकृष्णन ने भी घोर भर्त्सना की थी।

इसलिए आम जनता हैरत में है कि हल्द्वानी शुद्धिकरण का मामला जनता के बीच उठाने वाले श्री राहुल गांधी के खिलाफ ही एफ.आई.आर. दर्ज कर ली गई है। सवाल यह है कि क्या किसी दलित समाज के व्यक्ति की हवन में उपस्थिति से शुद्धिकरण कृत्य का उद्देश्य बदल जायेगा क्योंकि देखना यह होगा कि ऐसे धार्मिक अनुष्ठान का मन्तव्य क्या हो सकता था। श्री खड़गे ऐसे दलित नेता हैं जिन्होंने बचपन से ही अपने मजदूर पिता के साये में कड़ा संघर्ष किया और युवा होने पर खुद को राजनीति के माध्यम से देश सेवा में लगा दिया।

सवाल यह नहीं है कि फिलहाल वह देश के बहुत बड़े नेता हैं, बल्कि असली सवाल यह है कि चूंकि उनका जन्म एक अनुसूचित परिवार में हुआ अतः उनके साथ छुआछूत की सड़ी- गली मानसिकता रहेगी? इसी प्रकार कर्नाटक के मन्त्री श्री राया रेड्डी का इस्लाम धर्म के बारे में महिमामंडन सर्वधर्म समभाव के विरुद्ध है। मन्त्री पद उन्होंने उस संविधान की कसम उठाकर ग्रहण किया है जो किसी भी धर्म के स्थान पर नागरिकों के मानवीय धर्म की वकालत करता है। इसलिए बात व्यक्तिगत इच्छाओं की नहीं बल्कि संविधान प्रदत्त प्रावधानों की होनी चाहिए जिसमें किसी भी धर्म का उल्लेख नहीं है क्योंकि वह इसे नागरिकों का निजी मामला मानता है और हर धर्मावलम्बी को एक नजर से देखता है।

अतः राजनीतिक आख्यान भी सिद्धान्त परक होने चाहिए। ऐसी घटनाएं राजनीति को इस तरफ ही ले जाने की क्षमता रखती हैं। सिद्धान्त की राजनीति वोट बैंक की राजनीति से ऊपर की होती है क्योंकि भारत में दलित समाज हर राज्य में है परन्तु किसी जगह भी उनकी जनसंख्या बहुमत में नहीं है। अतः सैद्धान्तिक स्वरूप में ऐसी घटनाओं को संविधान के दायरे में ही रख कर देखा जायेगा जिससे मतदाताओं की जागरूकता प्रशस्त होगी।

Aditya Chopra

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