भारत में बढ़ता धार्मिक पर्यटन

Summary :

भारत तीर्थ यात्राओं का देश माना जाता है। यहां तक कि इसकी भौगोलिक सीमाएं तय करने में भी भारतीय उपमहाद्वीप में बसे हिन्दू तीर्थ स्थलों का विशेष योगदान माना जाता है। हिन्दू धर्म के अलावा भारत सिख, जैन व बौद्ध धर्मों का भी जन्मस्थल है अतः इन धर्मों से जुड़े तीर्थ स्थलों की भी भारत के निर्माण में विशेष भूमिका है। इनके अलावा इस देश में मुस्लिम व इसाई समुदाय के लोग भी अच्ची खासी संख्या में रहते हैं अतः इन धर्मों के अनुयायियों के भी कुछ तीर्थ स्थलों का इस देश में निर्माण व विकास हुआ है, परन्तु जहां…

भारत तीर्थ यात्राओं का देश माना जाता है। यहां तक कि इसकी भौगोलिक सीमाएं तय करने में भी भारतीय उपमहाद्वीप में बसे हिन्दू तीर्थ स्थलों का विशेष योगदान माना जाता है। हिन्दू धर्म के अलावा भारत सिख, जैन व बौद्ध धर्मों का भी जन्मस्थल है अतः इन धर्मों से जुड़े तीर्थ स्थलों की भी भारत के निर्माण में विशेष भूमिका है। इनके अलावा इस देश में मुस्लिम व इसाई समुदाय के लोग भी अच्ची खासी संख्या में रहते हैं अतः इन धर्मों के अनुयायियों के भी कुछ तीर्थ स्थलों का इस देश में निर्माण व विकास हुआ है, परन्तु जहां तक हिन्दू धर्म स्थलों का प्रश्न है तो पूरे विश्व में भारतीय उपमहाद्वीप ही एक मात्र एेसा क्षेत्र है जहां इस धर्म के तीर्थस्थल भारत के हर प्रदेश व अंचल तक में भरे पड़े हैं। इन तीर्थ स्थलों पर प्रत्येक वर्ष विशिष्ट धार्मिक अवसरों पर हिन्दू तीर्थ यात्रा करके पुण्य लाभ कमाते हैं। पिछले एक दशक से भारत में धार्मिक पर्यटन के क्षेत्र में जबर्दस्त इजाफा हुआ है और इन स्थलों पर हर वर्ष लगातार भीड़ बढ़ती जा रही है। क्या इसका कारण यह है कि भारत के लोग ज्यादा धार्मिक हो गये हैं? इसका उत्तर हमें आसानी से इस पहेली में मिल सकता है कि पहले हिन्दू तीर्थ स्थलों के सर्वांगीण विकास की तरफ सरकारों का ध्यान नहीं था और इनमें सामुदायिक सुविधाओं की व्यापक कमी पाई जाती थी, मगर पिछले दो दशकों से इस तरफ सरकारों के साथ ही बाजार की वाणिज्यिक शक्तियों ने भी ध्यान देना शुरू किया और धार्मिक पर्यटन को व्यापारिक गतिवि​िधयों को बढ़ाने वाला जरिया भी माना। इस क्षेत्र में रोजगार सृजन की संभावनाओं की तलाश की गई, परन्तु यह सारा कार्य सरकार के सहयोग से ही संभव हो सकता था। अतः केन्द्र की सरकार ने धार्मिक पर्यटन को बढ़ावा देने की ठोस नीति बनानी शुरू की और इसके संस्कृति व पर्यटन मन्त्रालय ने इस तरफ कारगर पहल की, मगर इससे भी जरूरी काम यह था कि हिन्दू धार्मिक स्थलों का प्रबन्धन सुधरे। इस तरफ 90 के दशक में उत्तर भारत के जम्मू-कश्मीर में स्थित माता वैष्णो देवी तीर्थ यात्रा को सुगम व सुविधाजनक बनाने के लिए ट्रस्ट की स्थापना की गई, जिसमें सरकार व नागरिकों की भागीदारी तय करके यह सुनिश्चित किया गया कि इस क्षेत्र में आने वाले तीर्थ यात्रियों की यात्रा कम से कम कष्टकारक हो और मन्दिर की व्यवस्था भी पारदर्शी बनी रहे। यह कार्य स्वर्गीय जगमोहन के जम्मू-कश्मीर का राज्यपाल रहते हुआ। उत्तर भारत में सरकार की इस पहल का बहुत सकारात्मक असर हुआ और प्रतिवर्ष वैष्णो देवी यात्रियों की संख्या में गुणात्मक वृद्धि होने लगी, हालांकि दक्षिण के राज्यों के तीर्थ स्थलों व प्रसिद्ध मन्दिरों के प्रबन्धन में वहां की राज्य सरकारों की भागीदारी पहले से ही चली आ रही थी, मगर उत्तर भारत में स्व. जगमोहन ने यह सफल प्रयोग किया था। मोदी सरकार के केन्द्र में आने के बाद सबसे महत्वपूर्ण काम यह किया गया कि धार्मिक स्थलों को रोजगार पैदा करने वाले क्षेत्र के रूप में विकसित करने की योजना बनाई गई और तीर्थ स्थलों पर सामुदायिक व वाणिज्यिक सेवाएं सुधारने के प्रयास किये गये। संस्कृति व पर्यटन मन्त्रालय ने सभी प्रसिद्ध तीर्थ स्थलों व मन्दिरों के विकास के लिए योजनाओं का खाका खींचना शुरू किया और सम्बन्धित राज्य सरकारों से भी अपेक्षित सहयोग मांगा। केन्द्र ने हिन्दू, बौद्ध, सिख व जैन धर्मों की तीर्थों को जोड़ने वाले सर्किलों का विकास करना शुरू किया और इनके सभी प्रमुख तीर्थ स्थानों को सड़क व रेल मार्ग से जोड़ने पर बल दिया। उत्तर प्रदेश के बनारस में तो भगवान विश्वनाथ के प्रसिद्ध मन्दिर परिसर का नवोचार किया गया और यहां विश्वनाथ कारीडोर बनाया गया जिससे इस तीर्थ स्थल पर पहुंचने वाले यात्रियों को भगवान के दर्शन व पूजा-अर्चना करने में सुविधा हो सके। इसी प्रकार की योजना उत्तर प्रदेश की योगी आदित्यनाथ सरकार श्रीवृन्दावन में भी लाने जा रही है और यहां के जगत प्रसिद्ध बांके बिहारी मन्दिर का आधुनिक कारीडोर बनाने की तरफ आगे बढ़ रही है उत्तर प्रदेश में धार्मिक स्थलों के आधुनिकी करण व विकास पर सबसे ज्यादा काम हुआ है। यहां के अयोध्या में भगवान श्रीराम की जन्म स्थली पर बना मन्दिर विश्व विख्यात हो चुका है और यहां आने वाले धार्मिक यात्रियों की भीड़ छंटने का नाम ही नहीं ले रही है। सरकार ने अयोध्या में न केवल श्रीराम मन्दिर बनाया बल्कि पूरे अयोध्या नगर का भी कायाकल्प किया। यहां सड़क यातायात को सुगम बनाने के साथ ही हवाई अड्डे का निर्माण भी किया गया, हालांकि अयोध्या में विवादित बाबरी ढांचे के अलावा सैकड़ों मन्दिर पहले से ही थे, मगर तीर्थ यात्रियों की संख्या यहां सीमित रहती थी। राम जन्म स्थान पर मन्दिर बन जाने के बाद अब अयोध्या धार्मिक पर्यटन के मानचित्र पर नम्बर एक बनने की तरफ अग्रसरित हो रहा है। इसी प्रकार धार्मिक पर्यटन के अन्य इलाकों में भी बढ़ने से उन स्थानों का चहुंमुखी विकास होता है और वहां रोजगार की संभावनाएं बढ़ती है। 2014 के लोकसभा चुनावों के प्रचार के दौरान श्री नरेन्द्र मोदी ने धार्मिक पर्यटन को बढ़ाने पर जोर देने का वादा भी किया था। आज भारत के कुल घरेलू पर्यटन उद्योग में धार्मिक पर्यटन का हिस्सा 60 प्रतिशत है और इसमें हर वर्ष 10 से लेकर 12 प्रतिशत की वृद्धि हो रही है। वास्तविकता यह है कि यह वृद्धि केवल हिन्दू तीर्थ स्थलों के पर्यटन में ही नहीं हो रही है, बल्कि इसाई व मुस्लिम तीर्थ यात्रियों की संख्या भी उनके धार्मिक स्थलों पर बढ़ रही है। इससे यह भी आभास होता है कि भारत के औसत आदमी की आमदनी अब इतनी होने लगी है कि वह अपने बीवी-बच्चों के साथ साल में एक बार धार्मिक तीर्थ यात्रा पर जा सके। बेशक कहा जा सकता है कि भारत में प्रति व्यक्ति आय में अपेक्षित वृद्धि नहीं हुई है, मगर यह भी हकीकत है कि भारत में प्रति व्यक्ति खर्च करने की आदत में बढ़ौत्तरी हुई है जो बिना आय बढे़ संभव नहीं है। मध्य प्रदेश की उज्जैन नगरी में जब महाकाल कारीडोर का निर्माण हुआ तो कुछ लोगों ने इसकी आलोचना की थी मगर कारीडोर बनने के बाद उज्जैन में यात्रियों की संख्या में वृद्धि हुई है और नगर में व्यापारिक गतिविधियां बढ़ी है। दरअसल अब भारत के लोग पर्यटन को अपने जीवन का अहम हिस्सा मानने की तरफ आगे बढ़ रहे हैं। जाहिर है कि धार्मिक पर्यटन कम आय वर्ग के लोगों द्वारा ही ज्यादा होता है अतः उनकी आय का एक हिस्सा इस क्षेत्र में भी खर्च होता है मगर इससे स्थानीय स्तर रोजगार बढ़ता है और वहां के लोगों की आय में वृद्धि भी होती है। साथ ही व्यापारिक गतिविधियां भी बढ़ती हैं। धार्मिक पर्यटन भारत के सन्दर्भ में पहले जहां कष्टकारी माना जाता था वहीं अब यह सुविधागम्य होता जा रहा है अतः इसके बढ़ने की संभावनाएं जारी रहेंगी। यही वजह रही कि जब उत्तर भारत में आजकल कड़ाके की ठंड पड़ रही है तो मथुरा वृन्दावन में यात्रियों का सैलाब उमड़ पड़ा है।

Team Desk