पश्चिम बंगाल में अपने चुनाव प्रचार अभियान के समापन के दौरान जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा था कि वह 04 मई के बाद राज्य में भारतीय जनता पार्टी के मुख्यमंत्री के शपथ ग्रहण समारोह में शामिल होने के लिए फिर लौटेंगे, तब अनेक लोगों ने इसे महज़ एक कल्पनात्मक दावा माना था। कुछ अन्य लोगों ने इसे ‘बड़ी-बड़ी और खोखली बातें’ कहकर खारिज कर दिया था, ठीक वैसे ही जैसे 2024 के लोकसभा चुनावों के दौरान भारतीय जनता पार्टी के प्रचार अभियान में स्वयं प्रधानमंत्री सहित ‘इस बार चार सौ पार’ का नारा दिया गया था। उस समय ऐसा माहौल बना दिया गया था कि लोगों को सचमुच विश्वास होने लगा था कि भारतीय जनता पार्टी लोकसभा में तीन सौ से अधिक सीटों का आंकड़ा पार कर जाएगी। अनेक चुनाव विश्लेषकों और जनमत सर्वेक्षण करने वाली संस्थाओं ने भी इसी प्रकार के अनुमान व्यक्त किए थे लेकिन परिणाम घोषित होने पर तस्वीर बिल्कुल अलग निकली और भगवा दल साधारण बहुमत हासिल करने में भी असफल रहा।
इसी प्रकार, इस बार जब श्री मोदी ने उस राज्य में भारतीय जनता पार्टी की सरकार बनने की बात कही, जिस पर एक दशक से अधिक समय तक अब निवर्तमान मुख्यमंत्री ममता बनर्जी का शासन रहा, तब भी कई लोगों ने इसे चुनावी बयानबाज़ी मानकर नज़रअंदाज़ कर दिया। हालांकि, परिणाम घोषित होते ही स्थिति स्पष्ट हो गई, नतीजों ने जहां श्री मोदी के दावे को सही साबित किया, वहीं उनके आलोचकों को गलत सिद्ध कर दिया। यह सर्वविदित था कि पश्चिम बंगाल भारतीय जनता पार्टी के लिए प्रतिष्ठा की लड़ाई बन चुका था और वहां जीत हासिल करना मानो जीवन-मरण का प्रश्न बन गया था।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी मतदाताओं को अपने पक्ष में करने के लिए कोई कसर नहीं छोड़ी। उन्होंने अपने चुनाव अभियान की तुलना तीर्थयात्रा से करते हुए देवी का आह्वान किया और कहा-मां काली ने मुझे नई ऊर्जा से भर दिया। इसके साथ ही उन्होंने अपने पहले से रंगीन चुनाव अभियान में झालमुड़ी का तड़का भी लगा दिया। प्रधानमंत्री का एक सड़क किनारे के विक्रेता से झालमुड़ी का पैकेट मांगने वाला वीडियो देखते ही देखते व्यापक रूप से प्रसारित हो गया। जब विक्रेता ने यह पूछ लिया कि क्या वह प्याज खाते हैं, क्योंकि मिश्रण में प्याज एक प्रमुख सामग्री होती है, तब प्रधानमंत्री ने मुस्कुराते हुए जवाब दिया, “प्याज खाते हैं, दिमाग नहीं खाते बस।”
विक्रेता के मना करने के बावजूद श्री मोदी ने झालमुड़ी के बदले उसे 10 रुपये का नोट थमा दिया। बाद में उन्होंने लिखा, ‘व्यस्त रविवार के दौरान चार जनसभाओं के बीच मुझे झाड़ग्राम में स्वादिष्ट मसालेदार मुरमुरे खाने का अवसर मिला।’ यदि मोदी अपने पूरे रंग में थे तो ममता बनर्जी भी पीछे रहने वाली नहीं थीं। उन्होंने भी चुनाव प्रचार में कोई कसर नहीं छोड़ी। कभी वह दोपहिया वाहन पर पीछे बैठकर नजर आईं, तो कभी अचानक उतरकर एक सब्जी विक्रेता से सब्जियां खरीदती दिखीं।
हाल ही में एक चुनावी सभा को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा, ‘भारतीय जनता पार्टी आपको मछली नहीं खाने देगी। न ही वह आपको मांस या अंडे खाने देगी। बंगाल मछली और चावल पर जीवित है।’ उन्होंने भारतीय जनता पार्टी को “बाहरी” करार देते हुए कहा कि बंगाली संस्कृति और खान-पान की परंपराएं उसके लिए अपरिचित हैं। यह सर्वविदित है कि पश्चिम बंगाल में मछली भोजन का अनिवार्य हिस्सा मानी जाती है। शुभ अवसरों और धार्मिक अनुष्ठानों में भी इसका विशेष महत्व होता है।
विवाह समारोहों में दुल्हन को हिल्सा, जिसे लोकप्रिय रूप से ‘इलीश’ कहा जाता है, की एक जोड़ी भेंट की जाती है। जो लोग सामर्थ्य रखते हैं, उनके यहां मेहमानों को परोसे जाने वाले भोज में भी यह विशेष रूप से शामिल होती है। ऐसे में मछली केवल सांस्कृतिक जुड़ाव का ही नहीं, बल्कि भावनात्मक संबंध का भी प्रतीक है। इसे तृणमूल कांग्रेस द्वारा उभारी जा रही बंगाली अथवा क्षेत्रीय अस्मिता से जोड़कर देखा गया, जिसके चलते यह धारणा बनी कि भारतीय जनता पार्टी रक्षात्मक स्थिति में आ गई है। मछली के साथ अपनी निकटता दिखाने की भारतीय जनता पार्टी की बेचैनी का आलम यह था कि उन्होंने अनुराग ठाकुर को विशेष रूप से बुलाकर उन्हें मछली खाते हुए प्रदर्शित किया। पूर्व केंद्रीय मंत्री अनुराग ठाकुर हिमाचल प्रदेश से आते हैं। खान-पान और दोपहिया वाहनों की सवारी से इतर चुनावी प्रतिद्वंद्वियों के बीच तीखी बयानबाजी का दौर भी चला।
जिस राज्य पर तृणमूल कांग्रेस लगातार तीन कार्यकाल तक शासन करती रही, वहां उसकी सत्ता से विदाई ने पारंपरिक राजनीतिक समझ को उलट कर रख दिया। इस बार भारी मतदान ने वास्तव में ममता बनर्जी सरकार को बाहर का रास्ता दिखा दिया, जिसकी भविष्यवाणी बाद में आए एग्जिट पोलों ने भी की थी। हालांकि भारतीय जनता पार्टी के आलोचकों ने एग्जिट पोल के अनुमानों को यह कहकर खारिज कर दिया कि अतीत में वे कई बार पूरी तरह गलत साबित हुए हैं। यदि पीछे मुड़कर देखा जाए तो ममता बनर्जी सरकार के खिलाफ सत्ता विरोधी लहर स्पष्ट रूप से दिखाई देती है।
चुनावी तूफ़ान…
Summary :
पश्चिम बंगाल में अपने चुनाव प्रचार अभियान के समापन के दौरान जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा था कि वह 04 मई के बाद राज्य में भारतीय जनता पार्टी के मुख्यमंत्री के शपथ ग्रहण समारोह में शामिल होने के लिए फिर लौटेंगे, तब अनेक लोगों ने इसे महज़ एक कल्पनात्मक दावा माना था। कुछ अन्य लोगों ने इसे ‘बड़ी-बड़ी और खोखली बातें’ कहकर खारिज कर दिया था, ठीक वैसे ही जैसे 2024 के लोकसभा चुनावों के दौरान भारतीय जनता पार्टी के प्रचार अभियान में स्वयं प्रधानमंत्री सहित ‘इस बार चार सौ पार’ का नारा दिया गया था। उस समय ऐसा…


Download Android App
Download iOS App



