मानवता के मसीहा थे पूज्यनीय रमेश चन्द्र जी

Summary :

पंजाब केसरी के संस्थापक अमर शहीद रमेश चन्द्र जी का आज जन्मदिन है। इस दिन हम आदरणीय रमेश जी को याद करते हैं। वरिष्ठ नागरिक केसरी क्लब की स्थापना के समय ही वृद्घ केसरी रोमेश चन्द्र ट्रस्ट की शुरुआत की थी। जो बुजुर्गों के स्वास्थ्य, जागरूकता व आत्मसम्मान के लिए समर्पित है। हमारे आदरणीय रमेश चन्द्र ऐसे महान व्यक्तित्व थे, जिन्होंने सारी उम्र देश व समाज की सेवा की तथा देश की एकता-अखंडता के लिए शहीद हो गए। वे एक आदर्श पिता, आदर्श पुत्र, आदर्श ससुर और सफल पति थे। वे एक आदर्श समाज सुधारक थे। अपने पीछे अच्छे संस्कारों…

पंजाब केसरी के संस्थापक अमर शहीद रमेश चन्द्र जी का आज जन्मदिन है। इस दिन हम आदरणीय रमेश जी को याद करते हैं। वरिष्ठ नागरिक केसरी क्लब की स्थापना के समय ही वृद्घ केसरी रोमेश चन्द्र ट्रस्ट की शुरुआत की थी। जो बुजुर्गों के स्वास्थ्य, जागरूकता व आत्मसम्मान के लिए समर्पित है। हमारे आदरणीय रमेश चन्द्र ऐसे महान व्यक्तित्व थे, जिन्होंने सारी उम्र देश व समाज की सेवा की तथा देश की एकता-अखंडता के लिए शहीद हो गए। वे एक आदर्श पिता, आदर्श पुत्र, आदर्श ससुर और सफल पति थे। वे एक आदर्श समाज सुधारक थे। अपने पीछे अच्छे संस्कारों और देश भक्ति की विरासत छोड़ गए। हम उनके दिखाए मार्ग पर चल रहे हैं तथा उनके बताए समाज कल्याण कार्यों को करने की भरपूर कोशिश कर रहे हैं। इसलिए पिछले 22 वर्षों से वरिष्ठï नागरिक केसरी क्लब के सभी सदस्य उन्हें दिल से याद करके बुजुर्गों की सहायता करने में तत्पर रहते हैं। इस अवस्था में अकेलापन दूर करने के साथ-साथ एलजाईमर जैसी बीमारियों से भी हजारों वरिष्ठजनों को राहत मिली है। इस संस्था में अकेलेपन दूर करने के साथ-साथ एलजाईमर, आखों की समस्याएं, जोड़ों के दर्द से वरिष्ठजनों को राहत मिलती है। जरूरतमंद बुजुर्गों को आर्थिक सहायता और जरूरत का सामान दिया जाता है। इसका अर्थ है हर अवस्था के बुजुर्ग चाहे वे अच्छे घरों से हो या जरूरतमंद घरों से उनको हर प्रकार से सहायता की जाती है। उनको सकारात्मक सोच के अनुसार दिशा दिखाई जाती है। हम सब जानते हैं कि इस उम्र में शारीरिक पीड़ा तो होती है साथ ही मानसिक पीड़ा भी होती है। ये हम सभी पर लागू होता है। कुछ बच्चे हमारे पास आते हैं और कहते हैं कि इस महंगाई में हम अपने माता-पिता को नहीं रख सकते। हमें कोई वृद्घाश्रम बताएं। तो हम उन्हें यही कहते हैं कि वृद्घाश्रम रोटी-कपड़ा, छत तो दे सकता है पर अपनापन नहीं। इस उम्र में सबको अपनेपन, प्यार और मान-सम्मान की जरूरत है। इसलिए हम उन्हें कहते हैं कि है कि हम अडोप्शन कराएंगे। इन्हें आप अपने साथ घर पर ही रखें। अडोप्शन का अर्थ है उन्हें घर लेकर नहीं जाना। उनकी दवाई व खाने का खर्च देना।

पंजाब केसरी के संस्थापक अमर शहीद रमेश चन्द्र जी

ये प्रथा हमने दुनिया में पहली बार चलाई है और पिछले 22 सालों से सफलतापूर्वक चल रही है। जिसका लाखों बुजुर्ग लाभ उठा रहे हैं। अपने घरों में बच्चों के साथ रह रहे हैं। इस संसार में बुजुर्गों का आना-जाना लगा रहता है। कोई भी सज्जन अपने पूर्वजों के नाम और अच्छे काम पर सम्पन्न परिवार के लोग इनको अडोप्ट करते हैं। आज वरिष्ठï नागरिक केसरी क्लब जो भी और जैसे भी सफलतापूर्वक चल रहा है। यही नहीं पंजाब केसरी पूरा परिवार स्व. रमेश चन्द्र जी के आशीर्वाद से चल रहा है। उन्हीं की मेहनत, त्याग व बलिदान है जिनके नाम को लेकर पंजाब केसरी परिवार व वरिष्ठ ïनागरिक केसरी क्लब परिवार आगे बढ़ रहा है। सही मायने में हम कहें आज हम जो कुछ भी हैं उन्हीं की देन है। मैंने उनके साथ 6 वर्ष गुजारे उन्होंने मुझे इतना प्यार व सम्मान दिया कि मुझे लगता कि मैंने उनके साथ 6 हजार साल बिताए हैं। आज के ही दिन मैं उनको हैप्पीबर्थडे का कार्ड बनाकर देती थी और उनके मनपसंद की मिठाई भी लाकर देती थी। उनको मीठा खाना बहुत पसंद था। एक बार मैं और अश्विनी जी शिमला गए तो वो हमें कितने ही किलोमीटर चलाकर अपने मन पसंद की दूध जलेबी खिलाने ले गए। यही नहीं वो हमेशा मुझे बहादुर बेटी बनने की शिक्षा देते थे। जब लाला जी की हत्या हुई तब मैंने उनको देखा था तब मुझे आदित्य होने वाला था। तब मैं बहुत डरती थी वे हमेशा कहते थे कि तुम हमेशा बहादुर बनना और बहादुर बच्चा पैदा करना। एक बार मैं व अश्विनी जी उनके साथ अमरनाथ यात्रा पर गई थी तब मैं ऊंचाई से डरती थी तब उन्होंने कहा जीवन में एक बार मरना है तो डरना क्यों?
तब उन्होंने रामायण की चौपाई सुनाई।
जीवन-मरण, लाभ-हानि,
यश-अपयश सब विधि हाथ।
वे हमेशा कहते थे कि बहादुरी से जीना है, बहादुरी से मरना। जो वो कहते थे, उन्होंने वैसा ही कर दिखाया और हम सबको प्रेरणा दे गए हमें बहादुरी से जीना है। वो सारी उम्र अपनों के लिए नहीं बल्कि उन्होंने देश, समाज के लिए जीए। उन्होंने हमें सिखाया जो दूसरों के लिए जीया जाता है। वह जब तक जीये दूसरों के लिए जीये। जब तक वो जीवित रहे हमारा संयुक्त परिवार हमारा एक किचन परिवार रहा। वह अपने बच्चों से पहले अपने भाई के बच्चों को प्यार करते और ख्याल रखते थे। आज हम उनसे प्रेरणा लेकर उनका जन्मदिवस मना रहे हैं और सबको संदेश दे रहे हैं।

Kiran Chopra