एफटीए : ट्रम्प को ठेंगा

Summary :

भारत एक के बाद फ्री ट्रेड एग्रीमेंट (एफटीए) कर रहा है। पिछले हफ्ते ओमान के साथ एफटीए किया गया और अब न्यूजीलैंड के साथ बातचीत के बाद एफटीए पर सहमति बन गई है। ​दिसम्बर 2025 तक भारत में अलग-अलग देशों और क्षेत्रीय ब्लाकों के साथ 18 ट्रेड एग्रीमेंट किए हैं। अमेरिका के साथ भारत की व्यापार वार्ता पूरी होने में अभी और कितना वक्त लगेगा इसके बारे में फिलहाल कुछ कहा नहीं जा सकता। दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय व्यापार समझौता पूरा होने में देरी हो रही है। दोनों देशों के बीच तनाव साफ दिखाई दे रहा है। भारत की…

भारत एक के बाद फ्री ट्रेड एग्रीमेंट (एफटीए) कर रहा है। पिछले हफ्ते ओमान के साथ एफटीए किया गया और अब न्यूजीलैंड के साथ बातचीत के बाद एफटीए पर सहमति बन गई है। ​दिसम्बर 2025 तक भारत में अलग-अलग देशों और क्षेत्रीय ब्लाकों के साथ 18 ट्रेड एग्रीमेंट किए हैं। अमेरिका के साथ भारत की व्यापार वार्ता पूरी होने में अभी और कितना वक्त लगेगा इसके बारे में फिलहाल कुछ कहा नहीं जा सकता। दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय व्यापार समझौता पूरा होने में देरी हो रही है। दोनों देशों के बीच तनाव साफ दिखाई दे रहा है। भारत की इस वक्त मुख्य चुनौती निर्यात के उन क्षेत्रों को नया व्यापार दिलाने की है जो अमेरिकी टैरिफ से बुरी तरह प्रभावित हुए हैं। भारत को नए बाजार भी मिल रहे हैं। भारत में अमेरिका की परवाह किए ​बिना दुनिया की बड़ी अर्थव्यवस्थाओं के साथ फ्री ट्रेड एग्रीमेंट और कॉम्प्रिहैंसिव ट्रेड समझौते किए हैं। जिनमें ​ब्रिटेन, जापान, दक्षिण कोरिया, संयुक्त अरब अमीरात, मारिशिस, सिंगापुर, मलेशिया, श्रीलंका और थाइलैंड इत्यादि शामिल हैं। जबकि यूरोपीय यूनियन इजराइल और कनाडा के साथ एफटीए को लेकर बातचीत जारी है। 1990 के दशक में​ विश्व राजनीति में दो ध्रुवीय व्यवस्था के टूटने के बाद यह स्पष्ट हो गया था कि राजनीतिक आैर आर्थिक सत्ता के वैकल्पिक केन्द्र स्थापित करने होंगे। यूरोप में यूरोपीय संघ और एशिया में दक्षिण पूर्व एशियाई राष्ट्रों के संगठन आसियान का उदय दमदार शक्तियों के रूप में हुआ।
भारत ने 13 अगस्त, 2009 को बैकांक में भारत आसियान मुक्त व्यापार समझौते पर हस्ताक्षर किए थे। तब से ही ऐसे समझौतों का मार्ग प्रशस्त हुआ है। मुक्त व्यापार समझौता एक ऐसी व्यवस्था है जिसमें दो या दो से अधिक देश एक-दूसरे के लिए अपने बाजारों को खोलने के लिए प्रतिबद्ध होते हैं, जिसमें शुल्क, कोटा या अन्य व्यापार बाधाओं को कम करना या हटाना शामिल है जिससे वस्तुओं और सेवाओं का आवागमन आसान हो जाता है। मुक्त व्यापार की अवधारणा व्यापार संरक्षणविद या आर्थिक अलगाववाद के बिल्कुल विपरीत है। मुक्त व्यापार दो मॉडलों पर आधारित होते हैं। पहला व्यापारवाद और दूसरा तुलनात्मक लाभ। भारत इस समय अमेरिकी टैरिफ से हो रहे कारोबार में नुक्सान की भरपाई करने में जुटा हुआ है। ओमान के साथ पिछले वित्त वर्ष में भारत का कुल कारोबार 10.6 मिलियन डॉलर था। अब दोनों देशों में एफटीए हो जाने के बाद दोनों देशों का व्यापार और बढ़ेगा। ओमान को निर्यात की जाने वाली भारत की 99 प्रतिशत वस्तुएं शुल्क मुक्त हो जाएंगी आैर इसकी एवज में ओमान से आयात किए जाने वाले उत्पादों को भी शुल्क मुक्त किया जाएगा। भारत को उम्मीद है कि ऐसे समझौतों से भारत का सेवा क्षेत्र अपनी पैठ बना सकेगा।
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने न्यूजीलैंड के प्रधानमंत्री क्रिस्टोफर लक्सन को फोन घुमाया और बातचीत के बाद दोनों ने ही एफटीए पर वार्ता सम्पन्न होने की घोषणा की। इस समझौते से भारत को बहुत फायदा मिलने की उम्मीद है। एफटीए के तहत दोनों देशों के बीच बाजार तक बेहतर पहुंच सुनिश्चित होगी। इससे व्यापार में बढ़ाैतरी, निवेश प्रवाह में इजाफा और विभिन्न क्षेत्रों में सहयोग को मजबूती मिलेगी। यह समझौता खासतौर पर नवाचार से जुड़े लोगों, उद्यमियों, किसानों, सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यमों (एमएसएमई), छात्रों और युवाओं के लिए नए अवसर खोलेगा। कृषि, शिक्षा, तकनीक, स्टार्टअप, सेवाएं और विनिर्माण जैसे क्षेत्रों में इसका सकारात्मक असर देखने को मिलेगा। दोनों देशों के प्रधानमंत्रियों ने इस मजबूत आधार के साथ भरोसा जताया कि अगले पांच वर्षों में भारत और न्यूजीलैंड के बीच द्विपक्षीय व्यापार को दोगुना किया जा सकता है। इसके साथ ही न्यूजीलैंड की ओर से अगले 15 वर्षों में भारत में करीब 20 अरब अमेरिकी डॉलर के निवेश की संभावना भी जताई गई। इसे भारत की बढ़ती अर्थव्यवस्था और निवेश के लिए अनुकूल माहौल में अन्तर्राष्ट्रीय विश्वास के रूप में देखा जा रहा है।
भारत को एफटीए से उस खजाने की चाबी मिल गई है जिससे वह अमेरिका और चीन की दादागिरि का जवाब दे सकता है और अपनी अर्थव्यवस्था को वैश्विक स्तर पर बहुत आगे ले जा सकता है। रिपोर्ट के मुताबिक, पिछले कुछ सालों में भारत और न्यूजीलैंड के बीच व्यापार में बढ़त देखी जा रही है। वित्त वर्ष 2021 में न्यूजीलैंड से भारत का आयात 381.5 मिलियन डॉलर रहा, जबकि भारत का निर्यात 486.2 मिलियन डॉलर रहा। इस क्षेत्र के जानकार अनुमान लगाते हैं कि आने वाले वर्षों में भारत और न्यूजीलैंड के बीच व्यापार में और भी बढ़ाैतरी होने की संभावना है। इससे दोनों देशों को फायदा होगा। रिपोर्ट बताती है कि भारत की ओर से न्यूजीलैंड को सबसे अधिक निर्यातों में पैट्रोलियम प्रोडक्ट्स, दवा निर्माण और जैविक उत्पाद, मोटर गाड़ियां और रेडीमेड कपड़े शामिल हैं। वहीं, न्यूजीलैंड की ओर से भारत में आने वाले सामानों में लोहा और स्टील, कच्ची ऊन, डेयरी प्रोडक्ट्स, ताजे फल, कोयला, लकड़ी के प्रोडक्ट्स आदि शामिल हैं। एफटीए होने के बाद अब दोनों देशों के बीच अन्य कई क्षेत्रों में व्यापार बढ़ने की संभावना है।
डोनाल्ड ट्रम्प ने भारत पर 100 फीसदी टैरिफ यह कहते हुए लगाया कि भारत रूस से तेल की खरीदारी करता है। इससे मिलने वाले पैसों का रूस, यूक्रेन के खिलाफ युद्ध में यूज करता है। हालांकि, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ट्रम्प के साथ अपने व्यक्तिगत रिश्तों को नजरअंदाज करते हुए देशहित में फैसला लिया और यूएस के द्वारा थोपे गए टैरिफ का जवाब देते हुए कई बड़े कदम उठाए हैं। अमेरिका के साथ ट्रेड को थोड़ा किनारा करते हुए भारत ने कई देशों के साथ अपने व्यापार को मजबूत कर लिया है। इससे भारत का निर्यात अमेरिका में जहां टैरिफ के कारण कम हुआ, वहीं अन्य देशों में काफी बढ़ गया। एक तरह से कहा जा सकता है कि भारत को गिराने की कोशिश में ट्रम्प खुद के बने गड्ढे में गिरते हुए दिख रहे हैं। ट्रम्प और अमेरिका की परवाह किए बगैर पीएम मोदी ने रूस के साथ तेल की खरीदारी को जारी रखा है। हाल ही में भारत आए रूस के प्रेसिडेंट व्लादिमीर पुतिन ने भी कहा था कि बिना किसी दबाव और रुकावट के रूस भारत को तेल भेजने की सप्लाई को जारी रखेगा। उन्होंने संकेत दिए थे कि भारत रूस से पहले के मुकाबले और भी अधिक मात्रा में तेल की खरीदारी करेगा। कुल मिलाकर भारत ने ट्रम्प को ठेंगा दिखा दिया है। इन समझौतों से अमेरिका के साथ चल रही वार्ता में भारत का पक्ष भारी रहेगा।

Aditya Chopra

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