पथ विक्रेताओं के सशक्तिकरण की परिवर्तनकारी यात्रा

Summary :

भारत में शहरीकरण तीव्र गति से बढ़ रहा है। अनुमान है कि वर्ष 2050 तक देश की लगभग 50% आबादी शहरी क्षेत्रों में निवास करेगी। वर्तमान में शहरी कार्यबल का लगभग 66% हिस्सा अनौपचारिक क्षेत्र से जुड़ा है, जो शहरी अर्थव्यवस्था का महत्वपूर्ण आधार है। इस अनौपचारिक क्षेत्र में पथ विक्रेताओं की भूमिका विशेष रूप से उल्लेखनीय है। फल, सब्ज़ियां, चाय, नाश्ता, कपड़े तथा दैनिक उपयोग की अन्य वस्तुएं उपलब्ध कराने वाले ये लाखों विक्रेता न केवल करोड़ों नागरिकों के जीवन को सुगम बनाते हैं, बल्कि शहरी अर्थव्यवस्था को भी सशक्त करते हैं। इसके बावजूद, लंबे समय तक उनकी औपचारिक…

भारत में शहरीकरण तीव्र गति से बढ़ रहा है। अनुमान है कि वर्ष 2050 तक देश की लगभग 50% आबादी शहरी क्षेत्रों में निवास करेगी। वर्तमान में शहरी कार्यबल का लगभग 66% हिस्सा अनौपचारिक क्षेत्र से जुड़ा है, जो शहरी अर्थव्यवस्था का महत्वपूर्ण आधार है। इस अनौपचारिक क्षेत्र में पथ विक्रेताओं की भूमिका विशेष रूप से उल्लेखनीय है। फल, सब्ज़ियां, चाय, नाश्ता, कपड़े तथा दैनिक उपयोग की अन्य वस्तुएं उपलब्ध कराने वाले ये लाखों विक्रेता न केवल करोड़ों नागरिकों के जीवन को सुगम बनाते हैं, बल्कि शहरी अर्थव्यवस्था को भी सशक्त करते हैं। इसके बावजूद, लंबे समय तक उनकी औपचारिक बैंकिंग और ऋण तक पहुंच सीमित रही। क्रेडिट हिस्ट्री के अभाव में उन्हें अक्सर ऊंची ब्याज दरों पर अनौपचारिक ऋण लेना पड़ता था जिससे उनकी आय का बड़ा हिस्सा ऋण चुकाने में खर्च हो जाता था।
वर्ष 2020 में कोविड-19 आपदा ने उनकी कठिनाइयों को और बढ़ा दिया, जिससे पथ विक्रेताओं का व्यवसाय बहुत प्रभावित हुआ। ऐसे चुनौतीपूर्ण समय में प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी के नेतृत्व में जून 2020 में प्रधानमंत्री स्ट्रीट वेंडर्स आत्मनिर्भर निधि (पीएम स्वनिधि) योजना का शुभारंभ किया गया। यह पथ विक्रेताओं के लिए भारत की पहली व्यापक माइक्रो-क्रेडिट योजना है, जिसने उन्हें पहली बार औपचारिक वित्तीय प्रणाली के माध्यम से संस्थागत ऋण तक सरल और सम्मानजनक पहुंच प्रदान की है। योजना के अंतर्गत बैंकों एवं अन्य वित्तीय संस्थानों द्वारा ऋण तीन चरणों में क्रमशः ₹15,000, ₹ 25,000 और ₹ 50,000 तक के ऋण उपलब्ध कराये जाते हैं। साथ ही, समय पर पुनर्भुगतान को प्रोत्साहित करने के लिए नियमित रूप से ऋण चुकाने वाले लाभार्थियों को 7% ब्याज सब्सिडी प्रदान की जाती है। गत छह वर्षों में पीएम स्वनिधि योजना ने लगभग 76 लाख पथ विक्रेताओं तक पहुंच बनाते हुए, योजना के तहत तीन चरणों में ₹ 17,800 करोड़ से अधिक के ऋण वितरित किए जा चुके हैं।
भारतीय पथ विक्रेता बदलती वैश्विक परिस्थितियों और विभिन्न आर्थिक व्यवधानों के बीच भी अपनी दृढ़ता और संघर्षशीलता के लिए जाने जाते हैं। पीएम स्वनिधि ने उनकी इस उद्यमशीलता को नई ऊर्जा प्रदान की है। यह केवल ऋण उपलब्ध कराने तक सीमित नहीं रही, बल्कि सम्मान, पहचान और नए अवसरों का एक सशक्त माध्यम बनी है।
योजना की सफलता का प्रमुख आधार “Whole of Government Approach” रहा, जिसमें केंद्र, राज्य, शहरी स्थानीय निकायों और बैंकिंग संस्थानों के समन्वित प्रयासों ने इसे देशभर अभूतपूर्व रूप से पहुंचाया तथा उल्लेखनीय परिणाम प्राप्त किये। इस योजना के अंतर्गत लाखों विक्रेताओं के बैंक खाते सक्रिय हुए, उनका वित्तीय व्यवहार दर्ज होने लगा और पहली बार उनके लिए एक औपचारिक क्रेडिट हिस्ट्री का निर्माण हुआ। इससे भविष्य में और अधिक ऋण तथा वित्तीय सेवाओं तक उनकी पहुंच आसान हुई और वे आज बैंक के सम्मानित ग्राहक और उद्यमी के रूप में उभरे हैं।
इस योजना का एक अन्य महत्वपूर्ण पहलू डिजिटल सशक्तिकरण है। यूपीआई और क्यूआर-कोड आधारित भुगतान को बढ़ावा देने के लिए कैशबैक प्रोत्साहन की व्यवस्था की गई है। इस पहल ने अभी तक 55 लाख विक्रेताओं को डिजिटल अर्थव्यवस्था से जोड़ा, उनके लेन-देन को पारदर्शी बनाया और उनकी वित्तीय साख को मजबूत किया है। योजना की सोच केवल व्यवसाय तक सीमित नहीं रही। ‘स्वनिधि से समृद्धि’ पहल के माध्यम से लाभार्थियों और उनके परिवारों को भारत सरकार की आठ प्रमुख कल्याणकारी योजनाओं से जोड़ा गया। अब तक 50 लाख से अधिक पथ विक्रेता परिवारों की प्रोफाइलिंग की जा चुकी है तथा इन योजनाओं के अंतर्गत 1.52 करोड़ से अधिक लाभ स्वीकृत किए जा चुके हैं। पेंशन, बीमा, स्वास्थ्य सुरक्षा और सामाजिक सुरक्षा जैसी सुविधाओं तक पहुंच प्रदान कर यह पहल पथ विक्रेताओं और उनके परिवारों के लिए एक व्यापक सामाजिक सुरक्षा तंत्र का माध्यम बनी है।
महिला सशक्तिकरण के क्षेत्र में भी योजना का योगदान उल्लेखनीय रहा है। कुल लाभार्थियों में लगभग 46% महिलाएं हैं। इससे उनकी आय, सामाजिक प्रतिष्ठा और पारिवारिक निर्णयों में भागीदारी बढ़ी है। वर्ष 2023 और 2025 में की गयी इंडिपेंडेंट इम्पैक्ट अस्सेस्मेंट्स ने भी योजना के दूरगामी प्रभावों की पुष्टि की है। लगभग 95% लाभार्थियों ने अपने जीवन में पहली बार औपचारिक वित्तीय प्रणाली से ऋण प्राप्त किया जो वित्तीय समावेशन की दिशा में एक ऐतिहासिक उपलब्धि है। इतना ही नहीं, बल्कि लगभग 30% लाभार्थी पीएम स्वनिधि से आगे बढ़कर अन्य औपचारिक वित्तीय संस्थानों से भी ऋण प्राप्त करने में सफल हुए, जो उनके बढ़ते वित्तीय विश्वास और सुदृढ़ क्रेडिट प्रोफाइल का प्रमाण है।
पुनर्गठित योजना के अंतर्गत पथ विक्रेताओं के ऋण की सीमा में वृद्धि की गई है तथा योजना का दायरा शहरी स्थानीय निकायों से आगे बढ़ाकर Census Towns/ Peri Urban तक विस्तारित किया गया है। इसके साथ ही क्षमता निर्माण पर विशेष बल दिया जा रहा है, ताकि पथ विक्रेता बदलती आर्थिक आवश्यकताओं के अनुरूप अपने उद्यमों को और अधिक सशक्त बना सकें। इसी क्रम में स्वनिधि क्रेडिट कार्ड की शुरुआत भी एक महत्वपूर्ण कदम है। यद्यपि, पीएम स्वनिधि योजना ने सड़क विक्रेताओं को वित्तीय सशक्तिकरण प्रदान की है। इस दिशा में एक छोटी सी पहल – स्ट्रीट फूड हब के माध्यम से उन्हें सुगम एवं व्यवस्थित व्यापारिक स्थान उपलब्ध कराए जाएंगे। इससे न केवल उनकी आजीविका अधिक सुदृढ़ होगी, बल्कि शहरों की स्वच्छता, सुव्यवस्था और समग्र शहरी वातावरण को भी बढ़ावा मिलेगा।
यह योजना आत्मनिर्भर भारत और ‘वोकल फॉर लोकल’ के संकल्प को जमीनी स्तर पर साकार करती है। पीएम स्वनिधि की सफलता इस बात का प्रमाण है कि समावेशी विकास का लाभ जमीनी स्तर तक पहुंच रहा है। पीएम स्वनिधि योजना ने पथ विक्रेताओं के लिए वित्तीय समावेशन और सामाजिक सुरक्षा का एक प्रभावी मॉडल प्रस्तुत किया है। मुझे विश्वास है कि आने वाले वर्षों में यह योजना लाखों विक्रेताओं की आजीविका को सशक्त बनाते हुए नई परिवर्तनकारी कहानियां रचेगी तथा विकसित भारत के निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।

– मनोहर लाल खट्टर
केन्द्रीय आवास एवं शहरी मामलों के मंत्री

Team Desk