हिमंता की जगह कौन?

‘ख्वाबों की खुदकुशियों का मंजर
भी एकदम अलहदा था
जिधर देखो नींद में चलते हुए
लोगों का जमावड़ा था’

बंगाल चुनाव के अधबीच न्यू टाउन कोलकाता के एक पंचतारा होटल में असम के लगभग 9 टॉप नौकरशाह भाजपा के एक बड़े नेता से मिलने पहुंचे। कहते हैं इन टॉप नौकरशाहों के साथ भाजपा के बड़े नेता की मीटिंग कोई घंटे भर चली। इस मीटिंग का एजेंडा था कि ‘अगर असम में भाजपा की फिर से वापसी हो रही है तो क्या हिमंता बिस्वा सरमा को फिर से सीएम बनाया जाना उचित रहेगा? असम की जनता चाहती क्या है? वहां जनभावना क्या है? नई सरकार की रूपरेखा कैसी होनी चाहिए? पहले सौ दिन का एजेंडा क्या होना चाहिए? आदि-आदि…।’
हिमंता को जैसे ही इस मीटिंग की खबर लगी वे भागे-भागे होटल पहुंचे (उस वक्त वे भी चुनाव प्रसार के सिलसिले में बंगाल में ही थे), पर कहते हैं भाजपा के कद्दावर नेता संग उनकी मुलाकात नहीं हो पाई, उनसे कहा गया कि ‘वे 4 मई के बाद दिल्ली आकर उनसे मिलें।’ तब से हिमंता का दिल लगातार तेज-तेज धड़क रहा है।
जीपी सिंह हो सकते हैं नए सीबीआई डायरेक्टर
असम-मेघालय कैडर के 1991 बैच के आईपीएस अफसर जीपी सिंह यानी ज्ञानेंद्र प्रताप सिंह को उनकी उत्कृष्ट सेवा का जल्द ही ईनाम मिल सकता है, वे मौजूदा सीबीआई डायरेक्टर प्रवीण सूद की जगह ले सकते हैं। आईआईटी दिल्ली से स्नातक प्रवीण सूद मई 2023 में दो वर्षों के लिए सीबीआई डायरेक्टर नियुक्त किए गए थे, फिर मई 2025 में ही उन्हें एक वर्ष का सेवा विस्तार दे दिया गया, अब उनकी सेवा विस्तार अवधि भी इसी माह समाप्त होने वाली है।
अलीगढ़, उत्तर प्रदेश से ताल्लुक रखने वाले जीपी सिंह 2023-25 तक असम पुलिस के डीजी रहे हैं। इसके बाद 30 जनवरी 2025 को उन्होंने केंद्रीय पुलिस बल सीआरपीएफ के डायरेक्टर जनरल का पद संभाला। भाजपा सरकार की नज़र में जीपी सिंह की इमेज को और बेहतर बना दिया है, संकेत मिल रहे हैं कि इन्हें शीघ्र ही इसका ईनाम भी मिलेगा और प्रवीण सूद की जगह इन्हें देश का नया सीबीआई डायरेक्टर बनाए जाने की चर्चा रायसिना हिल्स में अब हर तरफ हिलौरे मार रही है।
क्या आईबी डायरेक्टर को भी मिलेगा एक्सटेंशन?
हालिया बंगाल चुनाव ने आईबी डायरेक्टर तपन डेका को भी सत्ता शीर्ष की नज़रों में और पल्लवित-पुष्पित होने का मौका दिया है। कहते हैं स्वयं गृहमंत्री डेका की जमीनी रिपोर्ट के कायल हैं। असम के बारपेटा से ताल्लुक रखने वाले डेका 1988 बैच के हिमाचल कैडर के आईपीएस हैं, इन्हें राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजित डोभाल का भी बेहद करीबी माना जाता है।
बतौर आईबी डायरेक्टर जून 2025 तक के लिए इनकी नियुक्ति हुई थी, फिर इन्हें जून 2026 तक के लिए सेवा विस्तार दे दिया गया। अब संकेत मिल रहे हैं कि तमाम परंपराओं से अलहदा इन्हें एक और एक्सटेंशन मिलने जा रहा है। वैसे भी सबसे लंबे समय तक आईबी चीफ बने रहने का रिकार्ड भी इन्हीं के नाम हैं, अगर इन्हें फिर से एक साल का और सेवा विस्तार मिल जाता है तो बतौर आईबी चीफ इनका रिकार्ड कहीं और भी बेहतर हो जाएगा।
नई पारी के लिए कमर कसते केजरीवाल
दूध के जले केजरीवाल अब हर धोखे से बेहद सजग रहते हुए फूंक-फंूक कर कदम रख रहे हैं। वे पुराने अवतार में लौट आए हैं, बेहद अलर्ट मोड में हैं। अब उन्होंने अपना डेरा-डंडा फिर से पंजाब में जमा लिया है। पंजाब चुनाव से पहले वे अपनी पार्टी में और कोई टूट नहीं चाहते। सो, अब पार्टी के छोटे-छोटे मुद्दे भी उन्होंने खुद देखने शुरू कर दिए हैं।
सूत्र बताते हैं कि आने वाले पंजाब चुनाव में अपनी चुनावी रणनीतियों को धार देने के लिए, अपने कैडर को एकजुट रखने के लिए और उसे विस्तार देने के लिए केजरीवाल ने एक नया ‘वार रूम’ बनाया है, जहां वे बंद दरवाजों के पीछे अब तक अपने खास रणनीतिकारों के साथ कम से कम तीन बैठकें कर चुके हैं।
इन बैठकों में कई मुद्दों पर गहन विचार-विमर्ष हुआ, मसलन-बूथ स्तर पर फिर से संगठन को कैसे मजबूत बनाया जाए, स्थानीय प्रभावशाली लोगों की शिनाख्त कैसे हो, उन्हें पार्टी के साथ कैसे जोड़ा जाए, चुनाव के लिए फंड कैसे जुटाया जाए और आम आदमी पार्टी का फिर से ‘इमेज मेकओवर’ हो। सनद रहे कि अब से पहले इन कार्यों के निष्पादन की जिम्मेदारी केजरीवाल ने अपने बेहद खास संदीप पाठक को सौंप रखी थी, जो जमीनी डाटा इक्ट्ठा करते थे, उसका ​विश्लेषण करते थे, कैडर की पहचान सुनिश्चित करते थे और उसे एक्टिव रखते थे। पर पाठक एक बार बेवफा क्या हुए अपने साथ आप की सारी प्लॉनिंग और जरूरी डेटा लेकर ही भाजपा में चले गए। यह आप के लिए सबसे बड़ा झटका था।
सूत्रों की मानें तो इन विकट सियासी परिस्थितियों में केजरीवाल के लिए तारणहार बन कर आईं ममता दीदी, जिन्होंने अपनी ओर से ‘आईपैक’ रणनीतिकारों की एक टीम फौरन केजरीवाल की सहायता के लिए पंजाब भेज दी है। जो अब आप की नई चुनावी रणनीतियों को सिरे चढ़ा रही है। वहीं दूसरी ओर केजरीवाल अपने दगाबाज साथियों को बख्शने के मूड में नहीं हैं। आप छोड़ कर भाजपा में गए राज्यसभा मेंबर राजेंद्र गुप्ता की ‘ट्राइडेंट ग्रुप’ की फैक्ट्री पर ‘पंजाब पाल्यूशन कंट्रोल बोर्ड’ की रेड पड़ी है तो संदीप पाठक पर दो गैर जमानती एफआईआर दर्ज हो गई हैं। माना जाता है कि जब संदीप पाठक को ढूंढती हुई पंजाब पुलिस की टीम उनके दिल्ली स्थित निवास पर पहुंची तो पाठक समय रहते अपने घर के पिछले दरवाजे से निकल गए।
…और अंत में
बिहार सरकार की रहनुमाई अब धीरे-धीरे प्रदेश के नए नवेले सीएम सम्राट चौधरी को बेहद रास आने लगी है। सबसे पहले तो वे अपनी ‘इमेज मेकओवर’ की चिंता कर रहे हैं और यूपी के सीएम योगी की तर्ज पर अपनी छवि एक सख्त प्रशासक की बनाना चाहते हैं। आने वाले दिनों में बिहार की नौकरशाही में भी एक व्यापक फेरबदल देखने को मिल सकता है।
फिलहाल प्रदेश के नए सीएम अपने पसंदीदा व काबिल अफसरों की शिनाख्त में जुटे हैं। इस कड़ी में पहला नाम बिहार कैडर के 1991 बैच के आईएएस अफसर प्रत्यय अमृत का आता है, जो वर्तमान में बिहार के चीफ सैक्रेटरी हैं, इनकी अभी काफी सर्विस बची है, 2029 में इनका रिटायरमेंट है। ये काफी काबिल अफसरों में शुमार होते हैं, इन्हें ‘प्राइम मिनिस्टर अवार्ड फॉर एक्सीलेंस पब्लिक एडमिनिस्टेशन’ से भी नवाजा जा चुका है। गांवों तक बिजली पहुंचाना, बिहार में रोड व ब्रिज नेटवर्क को बेहतर बनाने का क्रेडिट इनको जाता है। ये सम्राट के पसंदीदा अधिकारियों में शुमार होते हैं।
बतौर अपना प्रिंसिपल सैक्रेटरी सम्राट संजय कुमार को लाना चाहते हैं। राज्य के डीजीपी के लिए दो लोगों के नाम चल रहे हैं, इस पद पर पहला दावा कुंदन कृष्णन का है, जो नालंदा के रहने वाले हैं और जाति से नीतीश के सजातीय यानी कुर्मी हैं, वहीं इस रेस में जितेंद्र सिंह गंगवार का नाम भी शामिल बताया जाता है, ये फिलहाल डीजी-सिविल डिफेंस हैं। इनके भाई भी एक आईएएस अफसर हैं। डीजीपी के लिए ही एक और दावा विनय कुमार का भी है जो जाति से भूमिहार हैं।

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