3 Idiots Sonam Wangchuk Real Story: क्या आप जानते हैं कि ब्लॉकबस्टर फिल्म ‘3 इडियट्स’ में आमिर खान का निभाया गया ‘फुंसुक वांगडू’ का किरदार असल जिंदगी के एक नायक से प्रेरित है? जी हाँ, हम बात कर रहे हैं लद्दाख के मशहूर शिक्षाविद् और इनोवेटर सोनम वांगचुक की। अपने अनूठे आविष्कारों और पर्यावरण-अनुकूल विचारों के लिए दुनिया भर में पहचाने जाने वाले वांगचुक को अक्सर लोग असली ‘फुंसुक वांगडू’ भी कहते हैं।
अपने समाज सेवा के जज्बे के लिए मशहूर वांगचुक हाल के दिनों में दिल्ली में अनशन को लेकर काफी सुर्खियों में रहे हैं। हालांकि, उनका यह संघर्ष बच्चों की परीक्षाओं से नहीं, बल्कि लद्दाख के पर्यावरण को बचाने और उसे संविधान की छठी अनुसूची के तहत विशेष सुरक्षा व राज्य का दर्जा दिलाने के लिए है। शिक्षा में सुधार की अलख जगाने वाले वांगचुक आज पूरे लद्दाख और देश के लिए एक प्रेरणास्रोत बने हुए हैं।
कैसे सोनम वांगचुक बने आमिर खान की प्रेरणा

फिल्म ‘3 इडियट्स’ में आमिर खान द्वारा निभाया गया ‘रैंचो’ (रेंचोड़दास चांचड़) का किरदार एक ऐसे होनहार छात्र की कहानी था, जिसने रट्टा मारने वाली पारंपरिक शिक्षा व्यवस्था को चुनौती दी और Creativity को तरजीह दी। बड़े पर्दे का यह जीनियस किरदार असल जिंदगी के मशहूर इनोवेटर सोनम वांगचुक से प्रेरित था, जिन्होंने लद्दाख के दुर्गम इलाकों में शिक्षा के स्तर को सुधारने के लिए सालों तक जमीनी काम किया है।
‘3 इडियट्स’ की शूटिंग शुरू होने से कुछ महीने पहले, मुंबई में आयोजित एक अवॉर्ड फंक्शन में सोनम वांगचुक और आमिर खान की मुलाकात हुई थी। उस समारोह में वांगचुक के जीवन और उनके आविष्कारों पर आधारित एक डॉक्यूमेंट्री दिखाई गई थी। कयास लगाए जाते हैं कि लद्दाख के इस असली जीनियस के काम और उनके लीक से हटकर सोचने के अंदाज ने फिल्म के मेकर्स और आमिर खान को ‘रैंचो’ के किरदार को गढ़ने में सबसे बड़ी प्रेरणा दी।
सोनम वांगचुक का इंजीनियरिंग से पर्यावरण और शिक्षा क्रांति का सफर

सोनम वांगचुक मैकेनिकल इंजीनियरिंग पढ़ना चाहते थे, जबकि उनके पिता की इच्छा उन्हें सिविल इंजीनियर बनाने की थी। अपने इस सपने और विचारों के अंतर के कारण उन्हें कुछ समय के लिए घर भी छोड़ना पड़ा। विज्ञान और गणित के अपने बेहतरीन ज्ञान के दम पर उन्होंने लेह में वहाँ का पहला कोचिंग सेंटर शुरू किया। इस दौरान उन्होंने महसूस किया कि कई होनहार छात्र परीक्षाओं में असफल हो रहे थे। वांगचुक ने समझा कि कमी छात्रों की काबिलियत में नहीं, बल्कि मौजूदा शिक्षा व्यवस्था में थी, जो छात्रों को सही सपोर्ट देने में नाकाम थी। यही वह टर्निंग पॉइंट था जिसने उन्हें शिक्षा सुधार की राह पर आगे बढ़ाया।
शिक्षा के क्षेत्र में काम करने के अलावा, सोनम वांगचुक ने लद्दाख की गंभीर पर्यावरणीय चुनौतियों का भी समाधान निकाला। उन्होंने ‘आइस स्तूप’ (Ice Stupa) की अनूठी तकनीक विकसित की। ये एक प्रकार के कृत्रिम ग्लेशियर (Artificial Glaciers) हैं, जो सर्दियों के पानी को बर्फ के रूप में जमा करते हैं और गर्मियों के सूखे महीनों में पिघलकर खेती व सिंचाई के लिए पानी उपलब्ध कराते हैं।
जंतर-मंतर पर 17वें दिन भी भूख हड़ताल जारी

मशहूर शिक्षा सुधारक और पर्यावरणविद् सोनम वांगचुक इन दिनों दिल्ली के जंतर-मंतर पर अपनी भूख हड़ताल (Hunger Strike) को लेकर देश भर में चर्चा का विषय बने हुए हैं। रिपोर्ट्स के मुताबिक, उनकी इस अनिश्चितकालीन हड़ताल को आज 17 दिन हो चुके हैं। वांगचुक देश की शिक्षा व्यवस्था में बुनियादी बदलाव और जवाबदेही तय करने के लिए यह शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रहे हैं।


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