मशहूर इंजीनियर, एक्टिविस्ट और इनोवेटर सोनम वांगचुक की भूख हड़ताल को अब समर्थन मिल रहा है। इस आंदोलन के समर्थन में एंटरटेनमेंट इंडस्ट्री की कई जानी-मानी हस्तियां भी आगे आई हैं। कई बड़े सितारों ने सोशल मीडिया के ज़रिए सोनम वांगचुक और लद्दाख के अधिकारों के लिए चल रहे इस प्रदर्शन (Protest) के प्रति अपना एकजुटता संदेश साझा किया है, वहीं कई अन्य कलाकारों ने भी उनके इस नेक मकसद की खुलकर वकालत की है।
Zeenat Aman

अभिनेत्री ज़ीनत अमान ने लद्दाख के पर्यावरण कार्यकर्ता सोनम वांगचुक की भूख हड़ताल का समर्थन किया है। उन्होंने इंस्टाग्राम पर एक विस्तृत पोस्ट साझा कर बताया कि उनका ध्यान इस समय देश की राजधानी पर है, जहाँ सोनम वांगचुक की अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल 17वें दिन में प्रवेश कर चुकी है। ज़ीनत ने भारत सरकार से अपील की है कि वे इस मामले की गंभीरता को समझते हुए जल्द से जल्द बातचीत शुरू करें, क्योंकि यह मुद्दा पूरे देश के भविष्य से जुड़ा हुआ है।
Omi Vaidya
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‘3 इडियट्स’ के ‘साइलेंसर’ यानी ओमी वैद्य इन दिनों जंतर-मंतर पर सोनम वांगचुक के अनशन को लेकर काफी भावुक नज़र आए। उन्होंने एक वीडियो जारी कर अपनी चिंता व्यक्त की और कहा कि वह नहीं चाहते कि असल ज़िंदगी के ‘फुंसुक वांगडू’ (सोनम वांगचुक, जिन पर यह फ़िल्म बनी है) को कुछ भी हो। वीडियो में उनकी चिंता साफ़ देखी जा सकती है जहाँ उन्होंने कहा, “मैं नहीं चाहता कि फुंसुक वांगडू की मौत हो।”
Anurag Kashyap

मशहूर फिल्ममेकर अनुराग कश्यप लद्दाख के एक्टिविस्ट सोनम वांगचुक के समर्थन में खुलकर सामने आए हैं। सोशल मीडिया पर एक लंबी पोस्ट साझा करते हुए कश्यप ने कहा, “एक दौर था जब भूख हड़ताल की अपनी एक अहमियत होती थी। आज तंत्र का लोगों की जिंदगियों के प्रति इस कदर बेपरवाह हो जाना वाकई बेहद चिंताजनक है।” उन्होंने आगे लिखा कि ऐसा कदम उठाने के लिए बहुत हिम्मत और दूसरों के दर्द को समझने की संवेदनशीलता चाहिए, जो वांगचुक में है। अनुराग ने खुद को उनके जितना साहसी न बताते हुए कहा कि इस मुद्दे पर सत्ता में बैठे लोगों की चुप्पी उनकी लापरवाही को साफ बयां करती है। उन्होंने खुद को सोनम वांगचुक के साथ मजबूती से खड़ा बताया।
Swara Bhasker

स्वरा भास्कर ने जंतर-मंतर पहुंचकर अनशन के 17वें दिन सोनम वांगचुक से मुलाकात की और छात्रों के भविष्य के लिए उनके संघर्षकी सराहना की है। स्वरा भास्कर ने प्रधानमंत्री का नाम लिए बिना तंज कसते हुए कहा, काश, राजनीति और पढ़ाई के साथ-साथ थोड़ी इंसानियत भी सीख ली होती, तो छात्रों और प्रदर्शनकारियों को सड़कों पर बैठने की जरूरत नहीं पड़ती।
Prakash Raj



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