इस साल जगन्नाथ भगवान की यात्रा आज यानी 16 जुलाई 2026 से शुरू हो गई है। यह यात्रा 24 जुलाई 2026 को खत्म होगी। माना जाता है कि जो भी व्यक्ति इस यात्रा में शामिल होता है, उसके जीवन में कभी भी दरिद्रता नहीं रहती है और उसे मोक्ष की प्राप्ति होती है। भगवान जगन्नाथ की रथ यात्रा में श्रद्धालुओं की काफी ज्यादा भीड़ देखने को मिलती है, लेकिन क्या आप जानते हैं कि भगवान जगन्नाथ का रथ लकड़ी का क्यों बनाया जाता है और इसका ऐतिहासिक रहस्य क्या है अगर नहीं, तो आज हम उनके बारे में बताने जा रहे हैं, जो शायद ही आप नहीं जानते होंगे, तो आइए इसके बारे में विस्तार से जानते हैं।
जगन्नाथ भगवान की मूर्ति का रहस्य

पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, जब भगवान कृष्ण ने अपनी लीला खत्म करके अपने शरीर का त्याग किया, तब उनके पार्थिव शरीर का अंतिम संस्कार किया गया। कहा जाता है कि उनका शरीर अग्नि में भस्म हो गया, लेकिन उनका पिंड धड़क रहा था। तभी पांडवों ने उनके जलते हुए पिंड को समुद्र में बहा दिया। वही हृदय लकड़ी के रूप में बहकर पुरी समुद्र के किनारे पर मिला। तब राजा इंद्रद्युम्न को सपना आया कि वह इसी लकड़ी ने भगवान की मूर्ति बनाएं, इसलिए भगवान जगन्नाथ की मूर्ति लकड़ी की बनाई जाती है।
जगन्नाथ भगवान की मूर्ति का रहस्य सिर्फ लकड़ी तक सीमित नहीं रहता है। हर साल जब मूर्ति बदली जाती है, तो पुरानी मूर्ति से कुछ चीज़ें निकालकर नई मूर्ति में रखी जाती है। मंदिर में पुजारी लोगों का मानना है कि ये वही पिंडी है, जो आज भी धड़कता है। इसे कोई भी व्यक्ति देख नहीं पाता है, यहां तक की मूर्ति बदलते समय पुजारी अपनी आंखों पर पट्टी बांधते हैं, इसलिए भगवान जगन्नाथ की मूर्ति लकड़ी की बनाई जाती है, ताकि पहले वाले मूर्ति के कुछ पार्ट इसमें रखे जा सकें।
जगन्नाथ भगवान की मूर्ति लकड़ी की क्यों होती है?

जगन्नाथ भगवान की मूर्ति को ‘दारु ब्रह्म’ कहा जाता है। इसे बनाने के लिए नीम की लकड़ी का इस्तेमाल किया जाता है, लेकिन क्या आप जानते हैं इसके पीछे कई रहस्य भी छिपे हुए हैं। इसे नीम की लकड़ी से इसलिए बनाया जाता है, क्योंकि नीम के पेड़ को काफी पवित्र माना जाता है। इसके साथ ही नीम की लकड़ी में दीमक नहीं लगता है और ये लंबे समय तक मजबूत रहती है।



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