कल से आषाढ़ मास की गुप्त नवरात्रि का प्रारंभ होने वाला है। हिंदू धर्म में आषाढ़ महीने की गुप्त नवरात्रि का खास महत्व होता है। यह नवरात्रि आषाढ़ महीने के शुक्ल पक्ष से शुरू होती है और नवमी के दिन खत्म होती है। साल 2026 में आषाढ़ गुप्त नवरात्रि 15 जुलाई (बुधवार) से शुरू होकर 22 जुलाई (बुधवार) तक चलेगी। मान्यता है कि जो भी भक्त इन दिनों सच्चे दिल से मां दुर्गा की पूजा करता है, उसकी हर इच्छा पूरी होती है। इस नवरात्रि में मां दुर्गा के नौ रूपों की पूजा तो होती ही है, साथ ही 10 देवियों की भी पूजा की जाती है। इन नौ दिनों में पूजा करने वाले लोग माता रानी को प्रसन्न करने के लिए मंत्रों का जाप करते हैं, हवन करते हैं और पूरे विधि विधान के साथ नौ दिनों तक पूजा पाठ करते हैं। यह नौ दिन तंत्र-मंत्र की विद्या सीखने वालों, अध्यात्म पर चलने वालों और देवी शक्ति की गुप्त रूप से पूजा करने वालों के लिए बहुत खास होते हैं। अगर इन दिनों आप माता रानी की पूजा करने वाले हैं, तो कुछ नियमों का पालन (Gupt Navratri Puja Niyam) करना जरूरी है, वरना पूजा का पूर्ण फल नहीं मिलता है। आइए, जानें इन नौ दिन किन बातों का ध्यान रखना चाहिए।
घटस्थापना का शुभ मुहूर्त (Ashadha Gupt Navratri 2026)

कलश स्थापना का शुभ समय 15 जुलाई 2026 की सुबह 05:33 बजे से लेकर 10:09 बजे तक रहेगा। प्रतिपदा तिथि 14 जुलाई की दोपहर 03:12 बजे से शुरू हो जाएगी और 15 जुलाई की सुबह 11:50 बजे समाप्त होगी।
गुप्त नवरात्रि में क्या करना चाहिए?

- अपनी पूजा को गुप्त रखें: गुप्त नवरात्रि का सबसे जरूरी नियम यही है कि आप जो भी पाठ, मंत्र या व्रत कर रहे हैं, उसके बारे में घर से बाहर के किसी भी व्यक्ति को न बताएं। आपकी पूजा जितनी गोपनीय रहेगी, उसका फल आपको उतना ही ज्यादा और अच्छा मिलेगा।
- घर को सूना न छोड़ें: अगर आपने अपने पूजा घर में कलश रखा है या नौ दिनों के लिए अखंड दीपक जलाया है, तो ध्यान रखें कि घर में हमेशा कोई न कोई मौजूद रहे। घर को कभी भी ताला लगाकर अकेला न छोड़ें।
- साफ-सुथरा और साधारण जीवन जिएं: इन नौ दिनों में अपने मन में अच्छे विचार रखें, किसी को बुरा न बोलें और न ही कोई गलत काम करें। सुबह और शाम दोनों समय माता रानी की आरती करें और शुद्ध शाकाहारी खाना ही खाएं।
गुप्त नवरात्रि में क्या नहीं करना चाहिए? (Gupt Navratri Puja Niyam)
- अशुद्ध भोजन न करें: इन नौ दिनों में खाने में प्याज, लहसुन, मांस, मछली या शराब जैसी चीजों का इस्तेमाल बिल्कुल न करें। किसी भी तरह के नशे से पूरी तरह दूर रहें।
- पूजा में ये चीजें न चढ़ाएं: शास्त्रों के नियमों के अनुसार, मां दुर्गा की पूजा करते समय उन्हें आक के फूल, मदार के फूल, दूब और तुलसी के पत्ते कभी नहीं चढ़ाने चाहिए। ये माता रानी को पसंद नहीं होते।
- चमड़े की चीजों का इस्तेमाल न करें: जब आप पूजा कर रहे हों या व्रत के दौरान बाहर जा रहे हों, तो चमड़े से बनी चीजें जैसे बेल्ट, पर्स, जैकेट या जूते-चप्पल पहनने से बचें।
- लड़ाई-झगड़े और बुरी आदतों से दूर रहें: इन दिनों अपने पार्टनर के साथ ब्रह्मचर्य का पालन करें। घर में किसी भी तरह का क्लेश, वाद-विवाद, गुस्सा या दूसरों की बुराई करने से बचें। गुस्सा करने से आपकी पूजा-पाठ से मिली सारी अच्छी और सकारात्मक ऊर्जा खत्म हो जाती है।
आषाढ़ गुप्त नवरात्रि कैलेंडर 2026 (Gupt Navratri 2026 Dates)
15 जुलाई 2026, बुधवार (पहला नवरात्र): इस दिन कलश स्थापना की जाएगी और मां शैलपुत्री की पूजा होगी।
16 जुलाई 2026, गुरुवार (दूसरा नवरात्र): इस दिन मां ब्रह्मचारिणी की पूजा की जाएगी।
17 जुलाई 2026, शुक्रवार (तीसरा और चौथा नवरात्र): इस दिन मां चंद्रघंटा और मां कूष्मांडा दोनों की पूजा एक साथ होगी।
18 जुलाई 2026, शनिवार (पांचवां नवरात्र): इस दिन मां स्कंदमाता की पूजा की जाएगी।
19 जुलाई 2026, रविवार (छठा नवरात्र): इस दिन मां कात्यायनी की पूजा होगी।
20 जुलाई 2026, सोमवार (सातवां नवरात्र): इस दिन मां कालरात्रि की पूजा की जाएगी।
21 जुलाई 2026, मंगलवार (आठवां नवरात्र): इस दिन दुर्गा अष्टमी मनाई जाएगी और मां महागौरी की पूजा होगी।
22 जुलाई 2026, बुधवार (नौवां नवरात्र): इस दिन महा नवमी होगी और मां सिद्धिदात्री की पूजा की जाएगी।
23 जुलाई 2026, गुरुवार: इस दिन नवरात्रि व्रत का समापन होगा और व्रत खोला जाएगा।
16 जुलाई 2026, गुरुवार (दूसरा नवरात्र): इस दिन मां ब्रह्मचारिणी की पूजा की जाएगी।
17 जुलाई 2026, शुक्रवार (तीसरा और चौथा नवरात्र): इस दिन मां चंद्रघंटा और मां कूष्मांडा दोनों की पूजा एक साथ होगी।
18 जुलाई 2026, शनिवार (पांचवां नवरात्र): इस दिन मां स्कंदमाता की पूजा की जाएगी।
19 जुलाई 2026, रविवार (छठा नवरात्र): इस दिन मां कात्यायनी की पूजा होगी।
20 जुलाई 2026, सोमवार (सातवां नवरात्र): इस दिन मां कालरात्रि की पूजा की जाएगी।
21 जुलाई 2026, मंगलवार (आठवां नवरात्र): इस दिन दुर्गा अष्टमी मनाई जाएगी और मां महागौरी की पूजा होगी।
22 जुलाई 2026, बुधवार (नौवां नवरात्र): इस दिन महा नवमी होगी और मां सिद्धिदात्री की पूजा की जाएगी।
23 जुलाई 2026, गुरुवार: इस दिन नवरात्रि व्रत का समापन होगा और व्रत खोला जाएगा।
इस लेख में दी गई जानकारी धार्मिक ग्रंथियों, कहानियों या मान्यताओं पर आधारित है। पंजाब केसरी इसकी सत्यता की पुष्टि नहीं करता है।






















