भोपाल, 14 जुलाई (आईएएनएस ) मध्य प्रदेश के व्यापमं घोटाले के व्हीसल ब्लोअर एवं पूर्व विधायक पारस सकलेचा ने सीबीआई की जांच की परिधि में आए 212 मामलों की रिपोर्ट सार्वजनिक करने की मांग की है । पूर्व विधायक सकलेचा ने एक बयान जारी कर कहा है कि सर्वोच्च न्यायालय के आदेश 9 जुलाई 2015 के अनुपालन में व्यापमं घोटाले से जुड़े 212 आपराधिक प्रकरण, जिनमें 4,076 आरोपी नामजद थे, जांच के लिए केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) को सौंपे गए थे।
ये प्रकरण वर्ष 2005 से 2013 के बीच आयोजित 33 परीक्षाओं से संबंधित थे, जिनमें 15 प्री-मेडिकल एवं प्री-पीजी परीक्षाएं, 15 भर्ती परीक्षाएं तथा 3 पात्रता परीक्षाएं शामिल थीं। इन परीक्षाओं में लगभग 41.78 लाख अभ्यर्थियों ने भाग लिया तथा व्यापम को 128.26 करोड़ रुपये परीक्षा शुल्क के रूप में प्राप्त हुए। सकलेचा ने कहा कि व्यापमं घोटाला देश के सबसे चर्चित परीक्षा घोटालों में से एक रहा, जिसकी राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चर्चा हुई। उस समय शासन ने आश्वासन दिया था कि इस घोटाले में शामिल प्रत्येक व्यक्ति, चाहे उसका पद कितना भी ऊंचा क्यों न हो, उसके विरुद्ध निष्पक्ष और प्रभावी कार्रवाई की जाएगी।
उन्होंने कहा कि जांच सीबीआई को सौंपे जाने के लगभग 11 वर्ष बाद भी अनेक प्रकरणों में जांच पूरी नहीं हो सकी है। जिन मामलों में न्यायालयों के निर्णय आ चुके हैं, उनमें भी कुल आरोपियों की तुलना में दोषसिद्धि की संख्या अत्यंत कम दिखाई देती है। इससे जांच की प्रभावशीलता तथा न्यायिक प्रक्रिया की गति पर गंभीर प्रश्न खड़े होते हैं। सकलेचा ने कहा कि जिन प्रकरण में आरोपी बरी हुए हैं , उनमें सीबीआई ने उच्च न्यायालय तथा उच्चतम न्यायालय में अपील करने के संवैधानिक दायित्व का निर्वाह नहीं किया।
चिंताजनक तथ्य यह भी है कि , आज तक सीबीआई ने यह रिपोर्ट सार्वजनिक नहीं की है कि 212 प्रकरणों में से कितनों की जांच पूरी हुई, कितनों में आरोप पत्र प्रस्तुत किए गए, कितने मामले न्यायालयों में लंबित हैं, कितनों का अंतिम निर्णय हो चुका है , तथा किस-किस प्रकरण में कितने आरोपियों को दोषसिद्धि या दोष मुक्ति हुई।
पारस सकलेचा ने कहा कि इतने बड़े सार्वजनिक महत्व के मामले में पारदर्शिता और जवाबदेही अनिवार्य है । सीबीआई को व्यापम घोटाले के सभी 212 प्रकरणों की वर्तमान स्थिति पर विस्तृत सार्वजनिक विज्ञप्ति जारी कर देश और प्रदेश की जनता को तथ्यात्मक जानकारी उपलब्ध कराना चाहिए ।
–आईएएनएस
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