Dev Deepawali Kyu Manayi Jati Hai: देव दीपावली का सनातन धर्म में खास महत्व है। यह त्योहार दिवाली के ठीक 15 दिन बाद मनाया जाता है, इस दिन मां लक्ष्मी और गणेश जी की पूजा की जाती है। माना जाता है कि इस दिन पूजा करने से घर में सुख समृद्धि आती है। वैदिक पंचांग के अनुसार यह पर्व हर साल कार्तिक पूर्णिमा की रात को मनाया जाता है। दिवाली जिसे हम देव दीपावली कहते हैं, इस दिन को बहुत महत्वपूर्ण माना जाता है।
इस दिन पूरा काशी दुल्हन की तरह सजा होता है। देश-विदेश से लोग देव दीपावली देखने के लिए काशी आते हैं। आइए जानते हैं, क्यों मनाई जाती है देव दीपावली और वाराणसी में यह इतनी खास क्यों है।

दिवाली के ठीक 15 दिन बाद काशी में बड़े ही धूम-धाम से देव दीपावली मनाई जाती है। इसे देवताओं की दिवाली कहा जाता है। इस दिन पूरी काशी नगरी दीयों की रौशनी से जगमगाती है। माना जाता है कि इस दिन देवता खुद धरती पर आकर गंगा घाट पर दीप जलाते हैं। देव दीपावली हर साल कार्तिक पूर्णिमा के दिन मनाई जाती है। इस बार देव दीपावली 05 नवंबर 2025 को मनाई जाएगी।
Dev Deepawali ka Mahatva: देव दीपावली का महत्त्व

हिंदू मान्यताओं के अनुसार, इस दिन भगवान शिव ने त्रिपुरासुर नामक राक्षस का वध किया था। उसी ख़ुशी में देवताओं ने स्वर्ग और पृथ्वी पर दीप जलाकर इस ख़ुशी को धूम-धाम से मनाया था। तब से अभी तक हर साल इसी दिन देव दीपावली मानाने की परम्परा चली आ रही है। देव दीपावली को बहुत ही पवित्र माना जाता है। कहा जाता है कि इस दिन जो भी लोग गंगा में स्नान करते हैं, उन्हें जन्म-जन्मांतर के पापों से मुक्ति मिल जाती है। इस दिन लाखों की संख्या में श्रद्धालु वाराणसी के घाटों पर दीप जलाते हैं और भगवान शिव तथा गंगा माता की पूजा करते हैं।

काशी में इस दिन का नजारा ही कुछ और होता है। हर जगह रौशनी ही रौशनी होती है। दशाश्वमेध घाट, असी घाट और राजेंद्र प्रसाद घाट पर लाखों दीए एक साथ जलाए जाते हैं। गंगा आरती, भजन, शंखनाद और पटाखों की आवाज़ से पूरा वातावरण गूंज उठता है। माना जता है कि इस दिन देवता स्वयं स्वर्गलोक से पृथ्वी पर गंगा स्नान करने के लिए आते हैं। इस दिन स्नान करने से पुण्य प्राप्त होता है।
Dev Deepawali Kyu Manayi Jati Hai: देव दीपावली पर करें ये शुभ काम

- देव दीपावली के दिन पवित्र नदियों में स्नान करें। अगर आस-पास नदी नहीं है, तो पानी में गंगाजल डालकर स्नान कर सकते हैं।
- इसके बाद घर में भी गंगाजल छिड़कें।
- महादेव, माता लक्ष्मी, गणेश जी और विष्णु जी का स्मरण करें।
- देवी-देवताओं के समक्ष घी के दीपक जलाएं।
- सभी देवी-देवताओं को फूलों की माला पहनाएं, फल-फूल और मिठाई अर्पित करें।
- प्रदोष काल में घर के कोने-कोने में घी के दीपक प्रज्वलित करें।
- घर में शिव चालीसा का पाठ करें।
- परिवार वालों के साथ मिलकर आरती करें।


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