Ganesh Ji Ki Aarti Lyrics: आज यानी 14 सितंबर को देशभर में गणेश चतुर्थी का पर्व श्रद्धा और उत्साह के साथ मनाया जा रहा है। इसी के साथ 10 दिनों तक चलने वाले गणेशोत्सव की शुरुआत भी हो गई है। इस मौके पर भक्त अपने घरों और पूजा पंडालों में भगवान गणेश की प्रतिमा स्थापित कर विधि-विधान से पूजा करते हैं। गणेश चतुर्थी के दिन भगवान गणेश को उनके पसंदीदा भोग अर्पित किए जाते हैं। इसके साथ ही सुबह और शाम उनकी पूजा और आरती की जाती है। धार्मिक मान्यता के अनुसार, किसी भी शुभ कार्य की शुरुआत भगवान गणेश की पूजा से करना मंगलकारी माना जाता है। इसी वजह से उन्हें विघ्नहर्ता और प्रथम पूज्य भी कहा जाता है।
मान्यता है कि गणपति की पूजा के बाद आरती करने से पूजा का पूर्ण फल मिलता है। भक्त श्रद्धा के साथ बप्पा की आरती करते हैं और परिवार की सुख-शांति, समृद्धि और खुशहाली की कामना करते हैं। गणेश चतुर्थी के इस पावन अवसर पर आप भी भगवान गणेश की पूजा के बाद श्रद्धा से उनकी आरती कर सकते हैं। यहां पढ़ें गणेश जी की प्रसिद्ध आरती के बोल।
1-गणेश जी की आरती
जय गणेश, जय गणेश,
जय गणेश देवा।
माता जाकी पार्वती,
पिता महादेवा॥
एकदंत दयावंत,
चार भुजा धारी।
माथे सिंदूर सोहे,
मूसे की सवारी॥
2- शेंदूर लाल चढ़ायो
शेंदुर लाल चढ़ायो अच्छा गजमुख को
दोंदिल लाल बिराजे सुत गौरिहर को
हाथ लिए गुडलद्दु सांई सुरवर को
महिमा कहे न जाय लागत हूं पद को
जय देव जय देव
जय जय श्री गणराज विद्या सुखदाता
धन्य तुम्हारो दर्शन मेरा मन रमता
जय देव जय देव
3-घालीन लोटांगण, वंदीन चरण
घालीन लोटांगण, वंदीन चरण,
डोळ्यांनी पाहीन रूप तुझें ॥ प्रे
में आलिंगिन, आनंदे पूजिन,
भावें ओवाळिन म्हणे नामा ॥ १ ॥
त्वमेव माता च पिता त्वमेव,
त्वमेव बंधुश्च सखा त्वमेव ।
त्वमेव विद्या द्रविणं त्वमेव,
त्वमेव सर्वं मम देव देव ॥२॥
4-नाना परिमळ दुर्वा शेंदूर शमिपत्रें आरती
नानापरिमळ दुर्वा शेंदूर शमिपत्रें ।
लाडू मोद्क अन्ने परिपूरित पात्रें ।।
ऎसे पूजन केल्या बीजाक्षरमंत्रे ।
अष्टहि सिद्धी नवनिधी देसी क्षणमात्रें
जय देव जय देव जय मंगलमूर्ती ।
तुझे गुण वर्णाया मज कैची स्फ़ूर्ती ।। धृ. ।।
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