Gudi Padwa 2026: 19 या 20 मार्च, कब है मराठी नववर्ष? जानें गुड़ी स्थापना का समय और धार्मिक महत्व

Summary :

Gudi Padwa 2026 Date: चैत्र माह के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि को गुड़ी पड़वा का पर्व बड़े धूमधाम के साथ मनाया जाता है। यह पर्व हिंदू नववर्ष और विक्रम संवत के आरंभ का प्रतीक है, साथ ही इसी तिथि से चैत्र नवरात्रि का भी शुभारंभ होता है। महाराष्ट्र, गोवा और दक्षिण भारत के राज्यों में इस त्योहार को बेहद उत्साह के साथ मनाया जाता है। आइए, वर्ष 2026 में गुड़ी पड़वा की तिथि, शुभ मुहूर्त और पूजा की परंपराओं के बारे में विस्तार से जानते हैं। Gudi Padwa 2026 Date: गुड़ी स्थापना का समय द्रिक पंचांग के अनुसार, चैत्र शुक्ल…

Gudi Padwa 2026 Date: चैत्र माह के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि को गुड़ी पड़वा का पर्व बड़े धूमधाम के साथ मनाया जाता है। यह पर्व हिंदू नववर्ष और विक्रम संवत के आरंभ का प्रतीक है, साथ ही इसी तिथि से चैत्र नवरात्रि का भी शुभारंभ होता है। महाराष्ट्र, गोवा और दक्षिण भारत के राज्यों में इस त्योहार को बेहद उत्साह के साथ मनाया जाता है। आइए, वर्ष 2026 में गुड़ी पड़वा की तिथि, शुभ मुहूर्त और पूजा की परंपराओं के बारे में विस्तार से जानते हैं।

Gudi Padwa 2026 Date: गुड़ी स्थापना का समय

द्रिक पंचांग के अनुसार, चैत्र शुक्ल प्रतिपदा तिथि 19 मार्च, 2026 को सुबह 6:52 बजे से आरंभ होकर 20 मार्च, 2026 की सुबह 4:52 बजे तक रहेगी। उदया तिथि की मान्यता के अनुसार, गुड़ी पड़वा का त्योहार 19 मार्च 2026, दिन गुरुवार को मनाया जाएगा। इसी दिन विजय पताका यानी ‘गुड़ी’ स्थापित की जाएगी।

Gudi Padwa 2026 Shubh Muhurat : गुड़ी पड़वा शुभ मुहूर्त

Gudi Padwa 2026
Gudi Padwa 2026 Date (AI Generated)
  • ब्रह्म मुहूर्त: सुबह 04:51 से 05:39 तक
  • विजय मुहूर्त: दोपहर 02:30 से 03:18 तक
  • गोधूलि मुहूर्त: शाम 06:29 से 06:53 तक
  • निशिता मुहूर्त: रात्रि 12:05 से 12:52 तक

ऐसे मनाया जाता है गुड़ी पड़वा का पर्व

गुड़ी पड़वा के दिन स्नान के बाद नए वस्त्र धारण करने की परंपरा है। लोग अपने घरों के प्रवेश द्वार को ‘गुड़ी’ (नीम के पत्तों, गाठी और उलटे तांबे के कलश से सुसज्जित बांस की लाठी) से सजाते हैं और आंगन में सुंदर रंगोली बनाते हैं। खान-पान में विशेष रूप से पूरन पोली, साबूदाने की खीर, श्रीखंड और पूरी-चने का भोग लगाया जाता है। इस दिन दान-पुण्य करना भी बहुत शुभ माना जाता है, जिससे वर्ष का आरंभ मंगलमय होता है।

Gudi Padwa History and Importance: गुड़ी पड़वा पर्व का महत्व

गुड़ी पड़वा का पर्व गौरवशाली इतिहास और पावन पौराणिक कथाओं से जुड़ा हुआ है। माना जाता है कि इसी दिन ब्रह्मा जी ने सृष्टि का सृजन कर समय के चक्र को गति दी थी। यह दिन मर्यादा पुरुषोत्तम श्री राम के अयोध्या आगमन और महान सम्राट शालिवाहन द्वारा हूणों पर प्राप्त विजय का उत्सव भी है। वहीं महाराष्ट्र के जन-मानस के लिए यह छत्रपति शिवाजी महाराज के अदम्य साहस और मुगलों पर उनके विजय अभियानों की याद दिलाता है।
मराठी नववर्ष का प्रतीक गुड़ी पड़वा न केवल सांस्कृतिक बल्कि गहरा आध्यात्मिक महत्व भी रखता है। इसे सकारात्मकता और नई शुरुआत का पर्व माना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, ब्रह्मा जी ने इसी दिन सृष्टि की रचना आरंभ की थी, इसलिए यह जीवन के नए चक्र का प्रतीक है। घर के द्वार पर स्थापित ‘गुड़ी ध्वज’ सुख-समृद्धि और सकारात्मक ऊर्जा का संवाहक माना जाता है, जिसकी पूजा से आत्मिक बल की प्राप्ति होती है।

Khushi Srivastava

खुशी श्रीवास्तव मीडिया इंडस्ट्री में करीब 3 साल का अनुभव रखती हैं। वायरल कंटेंट, लाइफस्टाइल, हेल्थ और वास्तु शास्त्र टिप्स पर प्रमुखता से काम किया है। इलाहाबाद विश्वविद्यालय, प्रयागराज से मास्टर ऑफ मास कम्यूनिकेशन की पढ़ाई के बाद पहली बार पत्रकारिता के श्रेत्र में कदम रखा। इसके बाद अमर उजाला प्रिंट (प्रयागराज) में इंटर्नशिप की। फिलहाल खुशी, पंजाब केसरी दिल्ली के डिजिटल प्लैटफॉर्म के लिए कंटेंट राइटिंग का काम करती हैं।