चैत्र अमावस्या पर जरूर से करें इस पावन व्रत कथा का पाठ, दूर होंगी सभी परेशानियां

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Chaitra Amavasya 2026 Vrat Katha in Hindi: हिंदू धर्म में अमावस्या का दिन बहुत खास होता है, खासकर अपने पूर्वजों को याद करने और उनका आशीर्वाद लेने के लिए। साल 2026 में चैत्र अमावस्या 19 मार्च को मनाई जाएगी। माना जाता है कि इस दिन पवित्र नदी में स्नान करने, दान करने और अपने पूर्वजों की पूजा करने से पितृ दोष खत्म होता है और जीवन में सुख-समृद्धि आती है। ऐसी मान्यता है कि चैत्र अमावस्या का व्रत रखने से हमारे पूर्वजों की आत्मा को शांति और मोक्ष मिलता है। साथ ही, इस व्रत को करने से इंसान के जीवन…

Chaitra Amavasya 2026 Vrat Katha in Hindi: हिंदू धर्म में अमावस्या का दिन बहुत खास होता है, खासकर अपने पूर्वजों को याद करने और उनका आशीर्वाद लेने के लिए। साल 2026 में चैत्र अमावस्या 19 मार्च को मनाई जाएगी। माना जाता है कि इस दिन पवित्र नदी में स्नान करने, दान करने और अपने पूर्वजों की पूजा करने से पितृ दोष खत्म होता है और जीवन में सुख-समृद्धि आती है।
ऐसी मान्यता है कि चैत्र अमावस्या का व्रत रखने से हमारे पूर्वजों की आत्मा को शांति और मोक्ष मिलता है। साथ ही, इस व्रत को करने से इंसान के जीवन की सारी मुश्किलें और दुख भी दूर हो जाते हैं। व्रत के साथ इस दिन कथा का पाठ करना भी फलदाई माना जाता है। आइए जानें इससे जुड़ी व्रत कथा के बारे में।

Chaitra Amavasya 2026 Vrat Katha in Hindi: चैत्र अमावस्या की पौराणिक कथा

Chaitra Amavasya 2026 Vrat Katha
Chaitra Amavasya 2026 Vrat Katha (Social Media)

चैत्र अमावस्या से जुड़ी पौराणिक कथा के अनुसार, पुराने समय में एक राजा और रानी थे। रानी बहुत पूजा-पाठ करती थी। महल के सामने रहने वाली एक साहूकारनी उसकी पक्की सहेली थी। एक दिन साहूकारनी के रोने की आवाज़ सुनकर रानी ने राजा से इसका कारण पूछा। राजा ने बताया कि उसका बेटा मर गया है, इसलिए वह दुखी है। रानी ने आज तक कभी दुख देखा ही नहीं था, तो उसने पूछा कि “दुख क्या होता है?” राजा ने कहा कि जब तुम्हारा खुद का बेटा मरेगा, तब तुम्हें समझ आएगा। रानी ने तुरंत अपने बेटे को ऊपर से नीचे फेंक दिया, लेकिन भगवान की कृपा से उसे खरोंच तक नहीं आई।

रानी ने फिर वही सवाल किया, तो राजा ने कहा कि जब मैं अकेले युद्ध पर जाऊंगा और तुम मेरे मरने की खबर सुनोगी, तब तुम्हें दुख का पता चलेगा। लेकिन रानी हमेशा अमावस्या का व्रत रखती थी, इसलिए उस व्रत के असर से राजा युद्ध जीतकर सुरक्षित घर लौट आए। राजा ने हार नहीं मानी और कहा कि जब हम गंगा किनारे जाएंगे और मैं नदी में कूद जाऊंगा, तब तुम्हें दुख होगा। वहीं दूसरी तरफ, भगवान शिव और माता पार्वती यह सब देख रहे थे। शिवजी ने पार्वती जी से कहा कि चलो मैं तुम्हें एक ऐसी आत्मा के दर्शन कराता हूं जिसे कोई दुख छू ही नहीं सकता।

Chaitra Amavasya 2026
Chaitra Amavasya 2026 (Social Media)

भगवान शिव और माता पार्वती ने बकरी और बकरे का रूप लिया और एक बावड़ी के पास घास चरने लगे। राजा-रानी जब वहां आराम करने रुके, तो रानी ने उनकी बातें सुन लीं। शिवजी कह रहे थे कि रानी ने हमेशा अमावस्या का व्रत किया है, इसलिए इस जन्म में उसे कोई भी दुख नहीं मिल सकता। रानी को सारा सच समझ आ गया और उसने राजा को भी यह बात बताई। तभी से यह माना जाता है कि अमावस्या का व्रत रखने से इंसान के सारे संकट कट जाते हैं।

Disclaimer: यहां बताई गई जानकारी धार्मिक मान्यताओं पर आधारित है। पंजाब केसरी इसकी पुष्टि नहीं करता है।

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Khushi Srivastava

खुशी श्रीवास्तव मीडिया इंडस्ट्री में करीब 3 साल का अनुभव रखती हैं। वायरल कंटेंट, लाइफस्टाइल, हेल्थ और वास्तु शास्त्र टिप्स पर प्रमुखता से काम किया है। इलाहाबाद विश्वविद्यालय, प्रयागराज से मास्टर ऑफ मास कम्यूनिकेशन की पढ़ाई के बाद पहली बार पत्रकारिता के श्रेत्र में कदम रखा। इसके बाद अमर उजाला प्रिंट (प्रयागराज) में इंटर्नशिप की। फिलहाल खुशी, पंजाब केसरी दिल्ली के डिजिटल प्लैटफॉर्म के लिए कंटेंट राइटिंग का काम करती हैं।