आज 06 अक्टूबर, मंगलवार को इंद्रा एकादशी का व्रत है। हिंदू धर्म में भादों महीने के कृष्ण पक्ष में आने वाली इंद्रा एकादशी बहुत महत्वपूर्ण होती है। इस दिन लोग भगवान विष्णु की पूजा करते हैं और व्रत रखते हैं। माना जाता है कि सही नियम से इंद्रा एकादशी का व्रत करने से पुण्य मिलता है और भगवान विष्णु की कृपा बनी रहती है। एकादशी की पूजा में व्रत कथा पढ़ना या सुनना बहुत जरूरी है, क्योंकि इसके बिना पूजा पूरी नहीं मानी जाती है, इसलिए आज पूजा के बाद अजा एकादशी की कथा का पाठ जरूर करें।
Indira Ekadashi Vrat Katha in Hindi: इंद्रा एकादशी की व्रत कथा

इंद्रा एकादशी की कथा सतयुग के माहिष्मती नगर से शुरू होती है, जहां इन्द्रसेन नाम के एक धर्मप्रिय राजा राज्य करते थे। वे भगवान विष्णु के परम भक्त थे और प्रजा का पालन पुत्र की भांति करते थे। एक दिन देवर्षि नारद उनकी सभा में पधारे। राजा इन्द्रसेन ने उनका आदर-सत्कार किया और उनके आने का कारण पूछा। तब नारद जी ने बताया कि वे यमलोक से आ रहे हैं और वहां उनकी भेंट राजा के स्वर्गीय पिता से हुई थी, जो किसी पूर्व जन्म की भूल के कारण यमलोक में कष्ट भोग रहे हैं।
नारद जी ने राजा को उनके पिता का संदेश देते हुए कहा कि यदि उनका पुत्र अश्विन मास के कृष्ण पक्ष में आने वाली इंद्रा एकादशी का व्रत रखे और उसका पुण्य अपने पिता को अर्पित कर दे, तो उन्हें यमलोक के दुखों से मुक्ति मिल जाएगी। अपने पिता का संदेश सुनकर राजा इन्द्रसेन अत्यंत भावुक हो गए और उन्होंने नारद जी से इस व्रत को करने का पूरा नियम और तरीका पूछा।
देवर्षि नारद ने राजा को व्रत की विधि समझाते हुए बताया कि दशमी तिथि को स्नान के बाद सात्विक भोजन ग्रहण करें। एकादशी के दिन सुबह स्नान करके भगवान विष्णु का ध्यान करते हुए व्रत का संकल्प लें और दोपहर में पितरों के नाम से दान-पुण्य और तर्पण करें। इसके बाद पूरा दिन संयम के साथ रहकर भगवान विष्णु की पूजा करें, रात में जागरण करें और द्वादशी के दिन दान-पुण्य करने के बाद ही अपना व्रत खोलें।
राजा इन्द्रसेन ने नारद जी के बताए अनुसार पूरे नियम, श्रद्धा और भक्ति के साथ इंद्रा एकादशी का व्रत रखा। एकादशी समाप्त होने पर उन्होंने व्रत से प्राप्त सारा पुण्य फल अपने पिता की आत्मा की शांति के लिए समर्पित कर दिया। इस व्रत के प्रभाव से उनके पिता के सभी पाप नष्ट हो गए, आकाश से पुष्प वर्षा हुई और राजा के पिता दिव्य विमान में बैठकर सीधे वैकुंठ धाम चले गए। इस प्रकार राजा इन्द्रसेन ने अपने पितरों का उद्धार किया और स्वयं भी जीवन के अंत में मोक्ष को प्राप्त हुए।
Indira Ekadashi 2026: इंद्रा एकादशी व्रत का महत्व

इंद्रा एकादशी यह व्रत पितरों के उद्धार और पूर्वजों को शांति दिलाने के लिए किया जाता है। इस कथा को पढ़ने और सुनने से ही मनुष्य को सैकड़ों यज्ञों के बराबर पुण्य की प्राप्ति होती है।
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