Maa Kushmanda Aarti Lyrics: शारदीय नवरात्रि की शुरुआत 11 अक्टूबर से हो चुकी है। यह पर्व नौ दिनों तक मनाया जाता है। इन नौ दिनों में मां दुर्गा के नौ अलग-अलग रूपों की पूजा की जाती है। नवरात्रि का हर दिन खास माना जाता है। चौथे दिन मां कूष्मांडा की पूजा की जाती है। इस दिन भक्त मां से अपने परिवार में सुख-शांति, खुशहाली और समृद्धि बनाए रखने की प्रार्थना करते हैं।
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, मां कूष्मांडा अपने भक्तों के कष्ट दूर करती हैं और उन्हें शक्ति व साहस प्रदान करती हैं। माना जाता है कि उनकी पूजा से आत्मविश्वास बढ़ता है। नवरात्रि के चौथे दिन मां कूष्मांडा की आरती करने और मंत्रों का जाप करने का विशेष महत्व है।
शारदीय नवरात्रि के चौथे दिन मां कूष्मांडा की पूजा की जाती है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, मां कूष्मांडा को सृष्टि की रचना करने वाली देवी माना जाता है। कहा जाता है कि जब चारों ओर अंधकार था, तब मां ने अपनी मुस्कान से ब्रह्मांड की रचना की थी। इसी वजह से उन्हें सृष्टि की आदिशक्ति भी कहा जाता है।
मां कूष्मांडा की पूजा करने से जीवन में सुख-शांति, सकारात्मकता और खुशहाली आने की मान्यता है। भक्त मां से परिवार की तरक्की और सुख-समृद्धि की प्रार्थना करते हैं। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, मां अपने भक्तों को साहस, शक्ति और आत्मविश्वास प्रदान करती हैं।
पूजा विधि
- सुबह स्नान करें: नवरात्रि के चौथे दिन सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और साफ कपड़े पहनें।
- पूजा की तैयारी करें: मंदिर या पूजा स्थल की सफाई करके मां कूष्मांडा की प्रतिमा या तस्वीर स्थापित करें।
- दीपक जलाएं: मां के सामने दीपक जलाएं और फूल, अक्षत, रोली, धूप और फल अर्पित करें।
- मंत्रों का जाप करें: मां कूष्मांडा के मंत्र का श्रद्धापूर्वक जाप करें। इससे मन को शांति और सकारात्मकता मिलने की मान्यता है।
- आरती करें: पूजा के अंत में मां कूष्मांडा की आरती करें और परिवार की सुख-शांति के लिए प्रार्थना करें।
- प्रसाद चढ़ाएं: मां को अपनी श्रद्धा के अनुसार फल, मिठाई या मालपुआ का भोग लगाएं और प्रसाद बांटें।
मां कूष्मांडा का प्रिय रंग और भोग
धार्मिक मान्यताओं में मां कूष्मांडा को पीला रंग प्रिय माना जाता है। इसलिए इस दिन पूजा में पीले फूलों का इस्तेमाल कर सकते हैं और पीले रंग के वस्त्र पहन सकते हैं। मां को मालपुआ का भोग लगाने की भी परंपरा है।
मां कूष्मांडा की आरती
मां कूष्मांडा की आरती नवरात्रि के चौथे दिन श्रद्धा के साथ गाई जाती है। धार्मिक मान्यता के अनुसार, मां की आरती करने से घर में सुख-शांति और खुशहाली की कामना की जाती है।
कूष्मांडा जय जग सुखदानी।
मुझ पर दया करो महारानी॥
पिगंला ज्वालामुखी निराली।
शाकंबरी माँ भोली भाली॥
लाखों नाम निराले तेरे ।
भक्त कई मतवाले तेरे॥
भीमा पर्वत पर है डेरा।
स्वीकारो प्रणाम ये मेरा॥
सबकी सुनती हो जगदंबे।
सुख पहुँचती हो माँ अंबे॥
तेरे दर्शन का मैं प्यासा।
पूर्ण कर दो मेरी आशा॥
माँ के मन में ममता भारी।
क्यों ना सुनेगी अरज हमारी॥
तेरे दर पर किया है डेरा।
दूर करो माँ संकट मेरा॥
मेरे कारज पूरे कर दो।
मेरे तुम भंडारे भर दो॥
तेरा दास तुझे ही ध्याए।
भक्त तेरे दर शीश झुकाए॥


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