Sawan Purnima Kab Hai: इस साल कब है सावन पूर्णिमा? जानें सही तिथि, स्नान-दान का शुभ मुहूर्त और पूजा विधि

Summary :

हिंदू धर्म में पूर्णिमा तिथि बहुत खास मानी जाती है, खासकर सावन महीने की पूर्णिमा, जिसे श्रावणी पूर्णिमा भी कहते हैं। इस दिन गंगा जैसी पवित्र नदियों में स्नान और दान करने से बड़ा पुण्य मिलता है। इसी दिन रक्षाबंधन का त्योहार भी मनाया जाता है। सावन पूर्णिमा पर पूजा-पाठ करने से भगवान विष्णु और भगवान शिव, दोनों का आशीर्वाद प्राप्त होता है।

Sawan Purnima Kab Hai: हिंदू धर्म में पूर्णिमा तथि बहुत खास मानी जाती है। इस दिन गंगा जैसी पवित्र नदियों में स्नान और दान करने से बड़ा पुण्य मिलता है। हर महीने की पूर्णिमा जरूरी होती है, लेकिन सावन महीने की पूर्णिमा का महत्व ज्यादा होता है। इसे श्रावणी पूर्णिमा भी कहा जाता है।

इसी दिन रक्षाबंधन का त्योहार भी मनाया जाता है, जिसमें बहनें अपने भाइयों की कलाई पर राखी बांधकर उनकी लंबी उम्र की दुआ मांगती हैं। सावन पूर्णिमा पर पूजा-पाठ करने से भगवान विष्णु और भगवान शिव, दोनों का आशीर्वाद मिलता है। आइए, जानते हैं कि इस साल यह पूर्णिमा कब है और पूजा का सही समय और विधि क्या है।

 

सावन पूर्णिमा 2026 कब है? (Sawan Purnima Kab Hai)

Sawan Purnima Kab Hai
Sawan Purnima Kab Hai (AI Generated)

हिंदू कैलेंडर के अनुसार, सावन महीने के शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा 27 अगस्त को सुबह 9:08 बजे शुरू होगी और 28 अगस्त को सुबह 9:48 बजे खत्म होगी।

पूर्णिमा की मुख्य तारीख: 28 अगस्त 2026
चांद निकलने का समय (चंद्रोदय): शाम 7:09 बजे

स्नान और दान के लिए शुभ मुहूर्त (Sawan Purnima 2026 Snan Daan)

  • ब्रह्म मुहूर्त: सुबह 04:51 से 05:37 बजे तक
  • सुबह की पूजा का समय: सुबह 05:14 से 06:23 बजे तक
  • अभिजित मुहूर्त: दोपहर 12:14 से 01:05 बजे तक
  • विजय मुहूर्त: दोपहर 02:45 से 03:36 बजे तक

सावन पूर्णिमा पूजा विधि (Sawan Purnima Puja Vidhi)

  • सुबह जल्दी उठें और किसी पवित्र नदी में स्नान करें या घर पर ही नहाने के पानी में थोड़ा सा गंगाजल मिलाकर स्नान कर लें और साफ-सुथरे कपड़े पहनें।
  • मन ही मन भगवान शिव और विष्णु जी का ध्यान करते हुए व्रत रखने का संकल्प लें।
  • एक लकड़ी की चौकी पर लाल या पीला कपड़ा बिछाएं और उस पर भगवान शिव-पार्वती व भगवान विष्णु की फोटो रखें।
  • शिवलिंग पर जल चढ़ाएं। उन्हें बेलपत्र, धतूरा, भांग, सफेद फूल और चंदन अर्पित करें।
  • विष्णु जी को पीले फूल, मेवे, मिठाई और तुलसी के पत्ते चढ़ाएं।
  • रात को जब चांद निकले, तब जल में थोड़ा कच्चा दूध, चीनी और सफेद फूल मिलाकर चंद्रमा को चढ़ाएं।
  • इस दिन गरीब या जरूरतमंद लोगों को खाना, कपड़े, फल या कोई भी सफेद चीज दान करना बहुत शुभ माना जाता है।
  • इस दिन रक्षाबंधन के साथ-साथ कई जगहों पर ‘नारियल पूर्णिमा’ भी मनाई जाती है।

पूर्णिमा का व्रत क्यों रखा जाता है? (Sawan Purnima Significance)

स्कंद पुराण के अनुसार, पूर्णिमा का व्रत रखने से व्यक्ति की कुंडली में चंद्रमा मजबूत होता है और जीवन की परेशानियां दूर होती हैं। इस व्रत को करने से घर में सुख, शांति और खुशहाली आती है। पूर्णिमा की तिथि भगवान विष्णु को बहुत प्रिय है, इसलिए इस दिन पूजा और व्रत करने से माता लक्ष्मी भी बहुत प्रसन्न होती हैं।

 

इस लेख में दी गई जानकारी धार्मिक ग्रंथियों, कहानियों या मान्यताओं पर आधारित है। पंजाब केसरी इसकी सत्यता की पुष्टि नहीं करता है।

Khushi Srivastava

खुशी श्रीवास्तव मीडिया इंडस्ट्री में करीब 3 साल का अनुभव रखती हैं। वायरल कंटेंट, लाइफस्टाइल, हेल्थ और वास्तु शास्त्र टिप्स पर प्रमुखता से काम किया है। इलाहाबाद विश्वविद्यालय, प्रयागराज से मास्टर ऑफ मास कम्यूनिकेशन की पढ़ाई के बाद पहली बार पत्रकारिता के श्रेत्र में कदम रखा। इसके बाद अमर उजाला प्रिंट (प्रयागराज) में इंटर्नशिप की। फिलहाल खुशी, पंजाब केसरी दिल्ली के डिजिटल प्लैटफॉर्म के लिए कंटेंट राइटिंग का काम करती हैं।