इस दिन लोग भगवान शिव को जल, दूध, दही, शहद, बेलपत्र, धतूरा और भांग चढ़ाते हैं। ऐसी मान्यता है कि अगर सच्चे दिल और श्रद्धा से शिवजी की पूजा की जाए, तो जीवन की सारी परेशानियां दूर हो जाती हैं, घर में सुख-समृद्धि आती है और भक्तों की हर मनोकामना पूरी होती है।
कब है सावन की शिवरात्रि? (Sawan Shivratri 2026 Kab Hai)

पंचांग के अनुसार, इस साल सावन शिवरात्रि की चतुर्दशी तिथि 11 अगस्त को सुबह 4:53 बजे शुरू होगी और 12 अगस्त को रात 1:51 बजे खत्म होगी। चूंकि शिवरात्रि में रात की पूजा का ज्यादा महत्व होता है, इसलिए यह त्यौहार 11 अगस्त को ही मनाना सही रहेगा। इस दिन रात के चारों प्रहर में भगवान शिव की पूजा करने का नियम है।
चार प्रहर की पूजा का समय (Sawan Shivratri Puja Time)
पहले प्रहर की पूजा: शाम 07:04 बजे से रात 09:45 बजे तक
दूसरे प्रहर की पूजा: रात 09:45 बजे से रात 12:26 बजे तक
तीसरे प्रहर की पूजा: रात 12:26 बजे से सुबह 03:07 बजे तक
चौथे प्रहर की पूजा: सुबह 03:07 बजे से सुबह 05:49 बजे तक
सावन शिवरात्रि पूजा सामग्री
- साफ जल
- गंगाजल
- कच्चा दूध
- दही
- शहद
- शक्कर
- घी
- बेलपत्र
- शमी के पत्ते
- धतूरा
- सफेद या पीला चंदन
- अक्षत
- सफेद फूल और मदार के फूल
- देसी घी का दिया
- धूपबत्ती
ऐसे करें शिव जी की पूजा

- सुबह स्नान करके मंदिर जाएं या घर पर उत्तर दिशा की तरफ मुंह करके शिवलिंग रखें। इसके बाद मन में व्रत और पूजा करने का संकल्प लें।
- सबसे पहले शिवलिंग पर साफ जल या गंगाजल चढ़ाएं।
- दूध, दही, घी, शक्कर और शहद मिलाकर बनाए गए पंचामृत से शिवलिंग को स्नान कराएं, फिर दोबारा साफ जल चढ़ाएं।
- शिवलिंग पर कलावा या जनेऊ चढ़ाएं।
- चंदन या भस्म से तिलक लगाएं और चावल चढ़ाएं।
- बेलपत्र के चिकने हिस्से की तरफ से बेलपत्र, धतूरा, भांग और फूल चढ़ाएं।
- घी का दिया जलाकर ‘ॐ नमः शिवाय’ या महामृत्युंजय मंत्र का 108 बार जाप करें।
- अंत में शिव चालीसा पढ़ें और आरती करें।



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