भारत में संसद के मानसून सत्र में FCRA संशोधन बिल पर सियासी बवाल मचा हुआ है विपक्ष लगातार तीखी चर्चा कर रहा है वहीं इस बिल से अमेरिका तक हलचल मची हुई है और अमेरिकी सांसद को इतनी मिर्ची लग गई है कि बौखलाहट में इस बिल से ईसाइयों पर हमला बता दिया है। साथ ही सिर्फ एक बिल से भारत और अमेरिका के बीच द्विपक्षीय संबंधों पर असर पड़ने की बातें भी गिना दी है। अमेरिकी सांसद राइली मूर ने NGO को मिलने वाले विदेशी चंदे से जुड़े कानून पर चिंता भी जताई है।
अमेरिकी सांसद राइली मूर ने जताई आपत्ति
अमेरिकी सांसद राइली मूर ने इस संशोधन बिल पर अपनी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि भारत में ईसाइयों का इतिहास संत थॉमस के भारत के मालाबार तट पहुंचने से रहा है और भारत की सरकार इस संशोधन बिल पर बदलाव करने की योजना बना रही है जिससे धार्मिक संस्थाओं का प्रबंधन सरकार के हाथ में आ जाएगा। साथ ही इस संशोधन बिल से ईसाइयों पर हमला बताया और कहा कि अगर यह लगातार आगे बढ़ता रहेगा तो इससे भारत-अमेरिका के बीच द्विपक्षीय संबंध प्रभावित हो सकते है।
Christians have been in India since St. Thomas the Apostle traveled to the Malabar Coast just decades after the resurrection of our Lord Jesus Christ.
But despite this long Christian history, India’s Parliament is considering amending Foreign Contribution Regulation Amendment…
— Rep. Riley M. Moore (@RepRileyMoore) August 4, 2026
क्या है FCRA संशोधन बिल
FCRA एक ऐसा संशोधन विधेयक है जिसमें NGO को विदेश से मिलने वाले चंदे और फंडिंग को नियंत्रण करना है। विदेशी पैसों का इस्तेमाल भारत की राष्ट्रीय सुरक्षा, संप्रभुता और सार्वजनिक हित के विरोध में न हो। इतना ही नहीं इस बिल को लाने के लिए NGOs, ट्रस्ट, सोसायटी और अन्य संस्थाओं की विदेशी फंडिंग पर शिकंजा कसना भी है। साथ ही NGO को मिलने वाले गलत तरीके से बिल को रोकना भी है।



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