सेवा, करुणा और समर्पण की मिसाल थे श्री राजू पुड्डू पुथरन, ऐसी महान आत्मा को भावपूर्ण श्रद्धांजलि

Summary :

Raju P. Putharan Death Anniversarys

Raju P. Putharan Death Anniversarys: 03 अगस्त 2026 का दिन उन सभी लोगों के लिए बेहद भावुक रहा, क्योंकि इस दिन  समाजसेवी, परोपकारी और सरस्वथी फाउंडेशन के प्रेरणास्रोत श्री राजू पी. पुथरन को भावभीनी श्रद्धांजलि दी गई। उनका पूरा जीवन सेवा, सादगी और मानवता के लिए समर्पित रहा। उन्होंने हमेशा समाज के कमजोर और जरूरतमंद लोगों की मदद को अपनी सबसे बड़ी जिम्मेदारी माना। शिक्षा, स्वास्थ्य और सामाजिक कल्याण के क्षेत्र में उनके योगदान को आज भी लोग सम्मान के साथ याद करते हैं। राजू पी. पुथरन ने कर्नाटक में सरस्वथी फाउंडेशन की शुरुआत एक छोटे सामाजिक प्रयास के रूप में की थी। शुरुआत में संस्था के पास सीमित संसाधन थे, लेकिन उनकी मेहनत, ईमानदारी और दूरदर्शी सोच ने इसे आगे बढ़ाया।

समय के साथ यह फाउंडेशन समाज के लिए काम करने वाला एक मजबूत संगठन बन गया। उनका मानना था कि विकास तभी सार्थक है, जब उसका लाभ समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुंचे। इसी सोच के साथ उन्होंने शिक्षा, स्वास्थ्य और जरूरतमंद परिवारों की सहायता से जुड़े कई कार्यक्रम शुरू किए। इन प्रयासों का लाभ हजारों लोगों तक पहुंचा और कई परिवारों को नई उम्मीद मिली।

शिक्षा और समाज कल्याण को दी नई दिशा

राजू पी. पुथरन हमेशा चाहते थे कि आर्थिक रूप से कमजोर बच्चों को पढ़ाई का पूरा अवसर मिले। उन्होंने शिक्षा को समाज में बदलाव का सबसे मजबूत माध्यम माना। इसके साथ ही उन्होंने जरूरतमंद लोगों की मदद, सामुदायिक विकास और सामाजिक जागरूकता के लिए भी लगातार काम किया। उनकी पहल से कई लोगों को न केवल आर्थिक सहायता मिली, बल्कि आत्मविश्वास के साथ आगे बढ़ने का अवसर भी मिला। यही वजह है कि समाज के विभिन्न वर्गों में उन्हें सम्मान और स्नेह दोनों प्राप्त हुआ।

कर्नाटक के अलावा मुंबई में भी राजू पी. पुथरन ने कई सामाजिक और धार्मिक गतिविधियों में महत्वपूर्ण योगदान दिया। उन्होंने राम मंदिर से जुड़े कार्यों में सहयोग किया और नवदुर्गा सेवा समिति के कोषाध्यक्ष के रूप में जिम्मेदारी संभाली। इस भूमिका में उन्होंने संस्था की आर्थिक व्यवस्था को मजबूत बनाने के साथ-साथ सामाजिक कार्यक्रमों को आगे बढ़ाने में भी अहम योगदान दिया। गरीबों की सहायता, धार्मिक आयोजनों और जनहित के कार्यों में उनकी सक्रिय भागीदारी हमेशा प्रेरणादायक रही।

सेवा भावना ही थी उनकी सबसे बड़ी पहचान

राजू पी. पुथरन के लिए समाज सेवा केवल एक काम नहीं, बल्कि जीवन जीने का तरीका था। वे हर जरूरतमंद की सहायता को अपना कर्तव्य मानते थे। किसी गरीब परिवार की मदद करनी हो, बच्चों की पढ़ाई में सहयोग देना हो या सामाजिक कार्यों में भाग लेना हो, वे हमेशा सबसे आगे रहते थे।

उनका व्यवहार बेहद सरल और विनम्र था। वे लोगों को सिर्फ मदद ही नहीं करते थे, बल्कि उन्हें आत्मनिर्भर बनने के लिए प्रेरित भी करते थे। यही गुण उन्हें समाज में एक अलग पहचान दिलाते हैं।

आज भी प्रेरणा दे रही है उनकी विरासत

आज भले ही राजू पी. पुथरन हमारे बीच मौजूद नहीं हैं, लेकिन उनके विचार, उनके संस्कार और समाज के लिए किए गए कार्य आज भी लोगों को प्रेरित कर रहे हैं। उनकी जयंती पर सरस्वथी फाउंडेशन से जुड़े सदस्य, सामाजिक कार्यकर्ता और अनेक नागरिक उन्हें श्रद्धापूर्वक याद कर रहे हैं।

उनकी सेवा, करुणा और मानवता की भावना आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा का स्रोत बनी रहेगी। उनका जीवन यह संदेश देता है कि सच्ची सफलता केवल अपने लिए नहीं, बल्कि दूसरों के जीवन में सकारात्मक बदलाव लाने में है।

प्यार और कृतज्ञता के साथ स्मरण:
सरस्वती राजू पुथरन, सुधीर राजू पुथरन एवं सुप्रिता कुंदर।

Amit Kumar

अमित कुमार पिछले 3 सालों से पत्रकारिता के क्षेत्र में काम कर रहे हैं। उन्हें विदेश, बिजनेस, ऑटो, टेक और गैजेट्स से जुड़ी खबरें लिखने का अच्छा अनुभव है। उन्होंने दिल्ली विश्वविद्यालय से बैचलर ऑफ मास कम्युनिकेशन, आईआईएमसी से पोस्ट ग्रेजुएट डिप्लोमा और उत्तर प्रदेश राजर्षि टंडन विश्वविद्यालय से मास्टर ऑफ मास कम्युनिकेशन की पढ़ाई की है। पत्रकारिता की शुरुआत उन्होंने वेबसाइट पर लिखने से की। इसके बाद इंडिया डेली न्यूज़ चैनल और न्यूज़ इंडिया 24x7 में हिंदी सब-एडिटर के तौर पर काम किया। वर्तमान में वह पंजाब केसरी, दिल्ली में हिंदी सब-एडिटर के पद पर कार्यरत हैं।