सावन सोमवार व्रत के फायदे

1. जीवन में आता है सुख और धन
सावन के हर सोमवार को व्रत रखने और शिवलिंग पर जल चढ़ाने से घर में खुशहाली और तरक्की आती है। भगवान शिव के आशीर्वाद से पैसों से जुड़ी सारी परेशानियां धीरे-धीरे खत्म होने लगती हैं और परिवार में धन-दौलत बढ़ती है।
2. परिवार में आती है शांति
शिवजी की सच्चे मन से पूजा करने पर घर के लोगों के बीच एक-दूसरे के प्रति प्यार और समझ बढ़ती है। आपसी लड़ाई-झगड़े और तनाव दूर होते हैं, जिससे पूरे घर का माहौल शांत, खुशनुमा और एकजुट बना रहता है।
3. जीवन की रुकावटें दूर होती हैं
पौराणिक कथाओं के अनुसार, जब समुद्र मंथन के दौरान ज़हर निकला था, तो दुनिया को बचाने के लिए शिवजी ने उसे खुद पी लिया था। यह घटना सावन के महीने में ही हुई थी। इसीलिए माना जाता है कि इस दिन पूजा करने से जीवन की बड़ी से बड़ी रुकावट और मुसीबत टल जाती है।
4. वैवाहिक जीवन होता है बेहतर
शादीशुदा महिलाएं अगर इस दिन व्रत रखकर भगवान शिव और माता पार्वती की एक साथ पूजा करें, तो उनके रिश्ते की तमाम खटास और समस्याएं दूर हो जाती हैं। पति-पत्नी के बीच प्रेम, भरोसा और आपसी तालमेल हमेशा बना रहता है।
5. स्वास्थ्य में सुधार
ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, सावन सोमवार का व्रत करने से चंद्रमा मजबूत होता है। चंद्रमा हमारे मन की शांति और दिमागी संतुलन को संभालता है। इसके अलावा, इस व्रत को रखने से शरीर को बीमारियों से लड़ने की शक्ति मिलती है और सेहत में सुधार होता है।
6. मन को मिलता है सुकून
सावन सोमवार व्रत विधि

- सावन के पहले दिन सुबह जल्दी उठकर स्नान कर लें। फिर भगवान शिव की मूर्ति या तस्वीर के सामने घी का दिया जलाएं।
- शिवजी को बेलपत्र, भांग, धतूरा और इत्र चढ़ाएं। इसके बाद हाथ में थोड़े से चावल और फूल लेकर पूरे व्रत का संकल्प लें।
- शिवलिंग पर गंगाजल या शुद्ध जल चढ़ाएं। इसके बाद दूध, दही, घी, शहद और शक्कर मिलाकर पंचामृत से अभिषेक कराएं और फिर शुद्ध जल से स्नान कराएं।
- शिव जी को चंदन का तिलक लगाएं। इसके बाद अक्षत, बेलपत्र, भांग, धतूरा, आक के फूल और मौसमी फल अर्पित करें।
- शाम को दोबारा स्नान करने के बाद शिव मंदिर जाएं या घर के पूजा स्थान पर दीपक जलाएं।
- हाथ में फूल और अक्षत लेकर सावन सोमवार की व्रत कथा का पाठ करें।
- “ॐ नमः शिवाय” मंत्र का 108 बार जाप करें।
- व्रत कथा का पाठ करें और आरती गाएं।
- इसके बाद श्री गणेश जी और फिर भगवान शिव की आरती करें।
- अंत में प्रसाद का भोग लगाएं और पूजा में हुई किसी भी भूल-चूक के लिए क्षमा मांगे।



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