आज है सोम प्रदोष व्रत! इस आरती से भोलेनाथ होंगे प्रसन्न, पूरी होगी हर मनोकामना

Summary :

Som Pradosh Vrat Shiv Ji Ki Aarti Lyrics: हिंदू धर्म में प्रदोष व्रत का बहुत महत्व माना गया है। यह हर महीने की कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि को प्रदोष व्रत रखा जाता है। आज, 16 मार्च 2026, सोमवार को चैत्र महीने का पहला प्रदोष व्रत है। चूंकि यह व्रत सोमवार के दिन पड़ रहा है, तो इसे सोम प्रदोष व्रत कहते हैं। भगवान शिव का आशीर्वाद पाने के लिए यह दिन बेहद शुभ माना गया है। माना जाता है कि इस दिन व्रत रखने से भक्तों के सभी दुख दूर होते हैं और जीवन में सुख-शांति आती है। इस दिन भगवान भोलेनाथ…

Som Pradosh Vrat Shiv Ji Ki Aarti Lyrics: हिंदू धर्म में प्रदोष व्रत का बहुत महत्व माना गया है। यह हर महीने की कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि को प्रदोष व्रत रखा जाता है। आज, 16 मार्च 2026, सोमवार को चैत्र महीने का पहला प्रदोष व्रत है। चूंकि यह व्रत सोमवार के दिन पड़ रहा है, तो इसे सोम प्रदोष व्रत कहते हैं।
भगवान शिव का आशीर्वाद पाने के लिए यह दिन बेहद शुभ माना गया है। माना जाता है कि इस दिन व्रत रखने से भक्तों के सभी दुख दूर होते हैं और जीवन में सुख-शांति आती है। इस दिन भगवान भोलेनाथ की आरती करने से जीवन में सफलता के रास्ते खुलते हैं और सुख-समृद्धि में वृद्धि होती है।

Som Pradosh Vrat Shiv Ji Ki Aarti Lyrics in Hindi: शिव जी की आरती

Som Pradosh Vrat Shiv Ji Ki Aarti Lyrics
Som Pradosh Vrat Shiv Ji Ki Aarti Lyrics (Source: Social Media)
ॐ जय शिव ओंकारा, स्वामी जय शिव ओंकारा।
ब्रह्मा, विष्णु, सदाशिव, अर्द्धांगी धारा॥
ओम जय शिव ओंकारा॥
एकानन चतुरानन पञ्चानन राजे।
हंसासन गरूड़ासन वृषवाहन साजे॥
ओम जय शिव ओंकारा॥दो भुज चार चतुर्भुज दसभुज अति सोहे।
त्रिगुण रूप निरखत त्रिभुवन जन मोहे॥
ओम जय शिव ओंकारा॥अक्षमाला वनमाला मुण्डमालाधारी।
त्रिपुरारी कंसारी कर माला धारी॥
ओम जय शिव ओंकारा॥श्वेताम्बर पीताम्बर बाघंबर अंगे।
सनकादिक गरुड़ादिक भूतादिक संगे॥
ओम जय शिव ओंकारा॥

कर के मध्य कमण्डल चक्र त्रिशूलधारी।
जगकर्ता जगभर्ता जगसंहारकर्ता॥
ओम जय शिव ओंकारा॥ब्रह्मा विष्णु सदाशिव जानत अविवेका।
प्रणवाक्षर के मध्ये ये तीनों एका॥
ओम जय शिव ओंकारा॥पर्वत सोहैं पार्वती, शंकर कैलासा।
भांग धतूरे का भोजन, भस्मी में वासा॥
ओम जय शिव ओंकारा॥जटा में गंग बहत है, गल मुण्डन माला।
शेष नाग लिपटावत, ओढ़त मृगछाला॥
ओम जय शिव ओंकारा॥

काशी में विराजे विश्वनाथ, नन्दी ब्रह्मचारी।
नित उठ दर्शन पावत, महिमा अति भारी॥
ओम जय शिव ओंकारा॥

त्रिगुणस्वामी जी की आरति जो कोइ नर गावे।
कहत शिवानन्द स्वामी, मनवान्छित फल पावे॥
ओम जय शिव ओंकारा॥

स्वामी ओम जय शिव ओंकारा॥

Khushi Srivastava

खुशी श्रीवास्तव मीडिया इंडस्ट्री में करीब 3 साल का अनुभव रखती हैं। वायरल कंटेंट, लाइफस्टाइल, हेल्थ और वास्तु शास्त्र टिप्स पर प्रमुखता से काम किया है। इलाहाबाद विश्वविद्यालय, प्रयागराज से मास्टर ऑफ मास कम्यूनिकेशन की पढ़ाई के बाद पहली बार पत्रकारिता के श्रेत्र में कदम रखा। इसके बाद अमर उजाला प्रिंट (प्रयागराज) में इंटर्नशिप की। फिलहाल खुशी, पंजाब केसरी दिल्ली के डिजिटल प्लैटफॉर्म के लिए कंटेंट राइटिंग का काम करती हैं।