Surya Grahan 2026 Kab Lagega: देश में साल 2026 का दूसरा और सबसे खास सूर्य ग्रहण को लेकर लोगों के मन में सवाल है कि ये ग्रहण अब और किसी तारीख को लगने वाला है। बता दें कि लोगों के बीच दो तारीखों को लेकर विशेष तौर पर सस्पेंस बना हुआ है। 11 और 12 अगस्त। ऐसे में अब ये सस्पेंस क्लियर हो गया है। दरअसल ये सूर्य ग्रहण 12 अगस्त को लगने वाला है। यह एक पूर्ण सूर्य ग्रहण (Total Solar Eclipse) होगा, जिसे खगोल विज्ञान की बड़ी घटनाओं में गिना जाता है। इस दौरान चंद्रमा पूरी तरह सूर्य के सामने आ जाएगा, जिससे कुछ देशों में दिन के समय भी अंधेरा देखने को मिलेगा। वैज्ञानिकों के साथ-साथ ज्योतिष में भी इस ग्रहण को बेहद ही महत्वपूर्ण बताया जा रहा है। आइए जानते हैं यह सूर्य ग्रहण कहां दिखाई देगा, भारत में इसका क्या असर होगा और इससे जुड़े सभी जरूरी अपडेट।
मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, 12 अगस्त 2026 का पूर्ण सूर्य ग्रहण मुख्य रूप से उत्तरी गोलार्ध के कई हिस्सों में देखने को मिल सकता है। यह ग्रीनलैंड, आइसलैंड, स्पेन, रूस और अटलांटिक महासागर के कुछ क्षेत्रों में पूरी तरह दिखाई देगा। इसके अलावा यूरोप के कई देशों, उत्तरी अमेरिका के कुछ इलाकों और उत्तर-पश्चिम अफ्रीका में लोगों ये आंशिक सूर्य ग्रहण के रूप में नजर आएगा।
क्या भारत में दिखाई देगा सूर्य ग्रहण?
- इस बार का सूर्य ग्रहण भारत में दिखाई नहीं देगा।
- इसके पीछे की वजह यह है कि ग्रहण भारतीय समय के अनुसार रात में लगेगा, जब यहां सूर्य दिखाई नहीं देता। इसलिए भारत के लोग इस खगोलीय घटना को सीधे नहीं देख पाएंगे।
- भारतीय समय के अनुसार यह सूर्य ग्रहण 12 अगस्त की रात 9:04 बजे शुरू होगा और 13 अगस्त की रात 1:27
- बजे समाप्त होगा। ग्रहण अपने सबसे महत्वपूर्ण चरण यानी चरम स्थिति पर रात 11:17 बजे पहुंचेगा।
ग्रहण के दौरान किन बातों का रखें खास ध्यान?
- धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, ग्रहण के समय गर्भवती महिलाओं को भगवान शिव या अपने आराध्य देव का स्मरण और मंत्र जाप करना शुभ माना जाता है।
- वहीं, ग्रहण खत्म होने के बाद गेहूं, गुड़, तांबे के बर्तन या लाल वस्त्र का दान करना भी शुभ फलदायी माना जाता है।
- क्योंकि यह ग्रहण भारत में दिखाई नहीं देगा, इसलिए यहां रहने वाले लोगों के लिए किसी विशेष धार्मिक नियम का पालन करना आवश्यक नहीं है।
- फिर भी जो लोग अपनी आस्था के अनुसार ग्रहण से जुड़े नियम मानना चाहते हैं, वे अपनी परंपराओं का पालन कर सकते हैं।
ज्योतिष के अनुसार क्यों है खास?
- हिन्दू धार्मिक मान्यता के अनुसार सूर्य ग्रहण से लगभग 12 घंटे पहले सूतक काल की शुरुआत हो जाती है।
- इस दौरान शुभ कार्य, पूजा-पाठ और मंदिरों के कपाट बंद रखने की परंपरा है।
- लेकिन , क्योंकि यह ग्रहण भारत में दिखाई नहीं देगा, इसलिए यहां सूतक काल मान्य नहीं माना जाएगा।
- मंदिरों में नियमित पूजा होती रहेगी और लोगों को अपने दैनिक धार्मिक कार्य रोकने की जरूरत नहीं है।
- ज्योतिष शास्त्र के अनुसार यह सूर्य ग्रहण सिंह राशि और मघा नक्षत्र में लग रहा है।
- सिंह राशि के स्वामी सूर्य देव माने जाते हैं, इसलिए अपनी ही राशि में लगने वाला यह ग्रहण विशेष महत्व रखता है।
- ज्योतिषाचार्यों के अनुसार, ऐसे में सिंह राशि के लोगों को सोच-समझकर फैसले लेने चाहिए और अनावश्यक विवाद से बचना चाहिए।
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