Vat Savitri Puja Muhurat 2026: वट सावित्री व्रत पर सुहागिन महिलाएं ऐसे करें पूजा, यहां देखें अखंड सौभाग्य पाने के शुभ मुहूर्त और इसका महत्त्व

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Vat Savitri Puja Muhurat 2026: हिंदू धर्म में वट सावित्री के व्रत को बहुत ज्यादा महत्वपूर्ण माना जाता है, ये व्रत साल में दो बार आता है। भारत के कुछ हिस्सों में महिलाएं इसे ज्येष्ठ अमावस्या को रखती हैं, तो कुछ जगहों पर इसे ज्येष्ठ पूर्णिमा के दिन मनाया जाता है। उत्तर प्रदेश, बिहार, मध्य प्रदेश, पंजाब और हरियाणा जैसे राज्यों में ज्येष्ठ अमावस्या वाला व्रत मुख्य रूप से रखा जाता है। इस व्रत में मुख्य रूप से बरगद के पेड़ की पूजा की जाती है और सावित्री-सत्यवान की पौराणिक कथा सुनी जाती है। ऐसे में आइए जानते हैं, इसका…

Vat Savitri Puja Muhurat 2026: हिंदू धर्म में वट सावित्री के व्रत को बहुत ज्यादा महत्वपूर्ण माना जाता है, ये व्रत साल में दो बार आता है। भारत के कुछ हिस्सों में महिलाएं इसे ज्येष्ठ अमावस्या को रखती हैं, तो कुछ जगहों पर इसे ज्येष्ठ पूर्णिमा के दिन मनाया जाता है। उत्तर प्रदेश, बिहार, मध्य प्रदेश, पंजाब और हरियाणा जैसे राज्यों में ज्येष्ठ अमावस्या वाला व्रत मुख्य रूप से रखा जाता है। इस व्रत में मुख्य रूप से बरगद के पेड़ की पूजा की जाती है और सावित्री-सत्यवान की पौराणिक कथा सुनी जाती है। ऐसे में आइए जानते हैं, इसका शुभ मुहूर्त और पूजा विधि क्या है।

Vat Savitri Puja Muhurat 2026: वट सावित्री पूजा शुभ मुहूर्त

vat savitri puja time
vat savitri puja time (Source: AI)
  • पूजा का सबसे उत्तम समय: सुबह 07:12 बजे से 08:24 बजे तक।
  • अभिजीत मुहूर्त: सुबह 11:50 बजे से दोपहर 12:45 बजे तक।

Vat Savitri Puja Vidhi: वट सावित्री पूजा विधि

Vat Savitri Puja Vidhi
Vat Savitri Puja Vidhi (Source: AI)
  • व्रत के दिन सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और सोलह श्रृंगार करें।
  • एक टोकरी में पूजा का सारा सामान जैसे फल, फूल, भीगे चने, धूप-दीप और कच्चा सूत रखकर बरगद के पेड़ के पास जाएं।
  • सबसे पहले पेड़ की जड़ में जल चढ़ाएं। इसके बाद धूप-दीपक जलाकर भगवान को फल और मिठाई का भोग लगाएं।
  • पूजा के दौरान हाथ वाले पंखे से बरगद के पेड़ को हवा की जाती है।
  • महिलाएं अपने पति की लंबी उम्र के लिए प्रार्थना करते हुए बरगद के पेड़ के चारों ओर 7 बार कच्चा धागा लपेटती हैं और परिक्रमा करती हैं।
  • पूजा के अंत में पेड़ के नीचे बैठकर सावित्री और सत्यवान की कहानी सुनी जाती है।
  • घर लौटने के बाद उसी हाथ वाले पंखे से पति को हवा करें और उनके पैर छूकर आशीर्वाद लें। शाम को पूजा के फल खाकर मीठा भोजन करना चाहिए।

Vat Savitri Puja 2026: इस व्रत का धार्मिक महत्व

Vat Savitri Puja 2026
Vat Savitri Puja 2026 (Source: AI)

हिंदू धर्म में वट सावित्री व्रत का बहुत बड़ा महत्व है। माना जाता है कि जो महिला बरगद के पेड़ के नीचे बैठकर पूरी श्रद्धा से पूजा और कथा सुनती है, उसकी सभी इच्छाएं पूरी होती हैं। यह व्रत मुख्य रूप से पति की लंबी उम्र और उनके अच्छे स्वास्थ्य के लिए रखा जाता है। पौराणिक कथाओं के अनुसार, जैसे माता सावित्री ने अपने दृढ़ संकल्प से यमराज से अपने पति सत्यवान के प्राण वापस ले लिए थे, वैसी ही शक्ति और सुख की प्राप्ति के लिए सुहागिन महिलाएं यह व्रत करती हैं।

Kajal Yadav

काजल यादव पत्रकारिता में पिछले 2 वर्षों से सक्रिय हैं। वास्तु, ट्रैवल , वायरल, हेल्थ और लाइफस्टाइल के अलावा आद्यात्मिक खबरें लिखना पसंद करती हैं। रामा विश्वविद्यालय (कानपुर) से बैचलर ऑफ मास कम्यूनिकेशन की पढ़ाई पूरी की। इसके बाद दीनार टाइम्स (कानपुर) से पत्रकारिता की शुरुआत करते हुए बत्तौर 'सोशल मीडिया' संभालने से लेकर 'वॉइस ओवर' के रूप में काम किया। वर्तमान में पंजाब केसरी दिल्ली में हिन्दी सब-एडिटर के तौर पर काम कर रही हैं। कानपुर में जन्म लेने वाली काजल की शिक्षा उनके गृह जिले में ही हुई है।